बिना SLC प्रमाण पत्र के दाखिलें के आदेश पर सरकार से खफा निजी स्कूल

हरियाणा के निजी स्कूलों व सरकार के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। बिना स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट (एसएलसी) सरकारी स्कूलों में दाखिला के निर्णय से स्कूल संचालक खफा हैं। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग पर निजी स्कूलों को खत्म करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। यह निर्णय वापस न लिए जाने की स्थिति में संचालक स्कूलों पर ताला लगाकर चाबी मुख्यमंत्री का सौंपने की तैयारी में हैं। प्राइवेट स्कूल संघ ने सरकारी आदेशों की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन करने व करनाल स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय का घेराव करने की चेतावनी दी है।

हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ के प्रदेशाध्यक्ष सत्यवान कुंडू, संरक्षक तेलूराम रामायणवाला, प्रांतीय महासचिव पवन राणा व अशोक रोहतक, कोषाध्यक्ष श्यामलाल शर्मा, रणधीर पूनिया, संजय धत्तरवाल व प्रदेश प्रवक्ता विनय वर्मा ने कहा कि प्राइवेट स्कूल पहले ही करोना महामारी की मार झेल रहे हैं। हजारों स्कूल बंद होने की कगार पर हैं। विकट परिस्थिति में सरकार को चाहिए कि प्राइवेट स्कूलों को वित्तीय सहायता मुहैया कराए, जबकि सरकार इसके उलट हर रोज तुगलकी फरमान जारी कर प्राइवेट स्कूलों को बंद करने के लिए आमादा है।

अब शिक्षा निदेशालय ने सरकारी स्कूलों में दाखिलों को लेकर बड़ा ही दुर्भाग्यपूर्ण फैसला लिया है। इसके अनुसार अब सरकारी स्कूलों में दाखिला लेने के लिए एसएलसी की जरूरत नहीं पड़ेगी। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि सरकारी स्कूलों में आने वाले हर बच्चे को तुरंत दाखिला दिया जाए, चाहे उसके पास स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट न हो। कुंडू ने कहा कि 19 मार्च से जून के मध्य तक शिक्षा विभाग ने दर्जनों ऐसे नोटिफिकेशन जारी किए हैं, जिनसे निजी स्कूल प्रभावित हुए हैं।

कम बजट के प्राइवेट स्कूल केवल ट्यूशन फीस में कैसे आधुनिक सुविधाएं दे पाएंगे। प्राइवेट स्कूलों को फीस लेनी ही पड़ेगी ताकि वे अध्यापक को वेतन दे सकें। प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के  ने अभी तक इस सत्र के तीन महीनों की फीस जमा नहीं करवाई है। कई अभिभावकों का तो पिछले साल का भी काफी बकाया रह रहा है फिर भी प्राइवेट स्कूल जैसे-तैसे अपने वित्तीय साधनों से अपने स्कूल की व्यवस्था को संभाले हुए हैं और ऑनलाइन काम दे रहे हैं।

छूट देना प्राइवेट स्कूलों के साथ नाइंसाफी : विनय वर्मा

प्रदेश प्रवक्ता विनय वर्मा ने कहा कि जिस अभिभावक को अपने बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ाने हो, वो जाएं, इसमें प्राइवेट स्कूलों को कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन, अभिभावक स्कूलों की फीस भरकर, नाम कटवाकर और स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट लेकर जाएं। प्राइवेट स्कूलों की फीस मारकर सरकारी स्कूलों में दाखिले की छूट देना प्राइवेट स्कूलों के साथ नाइंसाफी है। यदि सरकार प्राइवेट स्कूलों का साथ नहीं देगी तो हरियाणा के सभी प्राइवेट स्कूल सरकार के किसी नियम की पालना नहीं करेंगे। सरकार के बिना एसएलसी दाखिला के ताजा फैसले से लगभग 20 हजार प्राइवेट स्कूल प्रभावित होंगे।

Advertisement