इस देश में परेशान नर्सें नौकरियां छोड़ने को मजबूर  

अमेरिका: कोरोना कहर ढा रहा है और नर्सें नौकरियां छोड़ रही हैं, क्यों?अमेरिका में नर्सिंग स्टाफ के लिए सुरक्षा उपकरणों की कमी की खबरें हैं| अलजज़ीरा ने यह तस्वीर छापकर रिपोर्ट दी|

संयुक्त राज्य अमेरिका में सोमवार के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक कोविड 19 महामारी के कन्फर्म केस 13.6 लाख से ज़्यादा हैं और 81 हज़ार से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं| ऐसे में, आप सोचकर देखिए अगर स्वास्थ्य क्षेत्र में काम कर रही दो तिहाई नर्सें अपनी नौकरी छोड़ दें तो कोरोना वायरस (Corona Virus) का संकट और कितना गहरा जाएगा!

भवेश सक्सेना

अमेरिका (America) में स्वास्थ्य संकट कई परतों में पैठा हुआ है| विकसित देशों की पोल खोल चुकी कोरोना वायरस (Corona Virus Pandemic) आपदा के चलते नया खुलासा यह है कि संयुक्त राज्य के स्वास्थ्य सेक्टर में काम करने वाली कई नर्सें (Nursing Staff) इस कदर डरी हुई हैं कि अपनी नौकरी (Jobs) छोड़ चुकी हैं या छोड़ रही हैं| ‘हम ​बलि के बकरे बना दिए गए हैं!’ डर के साथ ही इन नर्सों की नाराज़गी, शिकायतें, आरोप और इनसे जुड़े आंकड़े अमेरिका की बेबसी की तस्वीर दिखाते हैं|

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कहानी 1 : ‘हम बलि के बकरे हैं’

वॉशिंगटन के एक अस्पताल में काम करने वाली 28 सालों की अनुभवी नर्स केली स्टैंटन ने मार्च के आखिर में इस्तीफा देकर नौकरी छोड़ी| केली का आरोप है कि पीपीई को लेकर रोग नियंत्रण केंद्र यानी सीडीसी की गाइडलाइन्स लगातार बदलती रहीं| यहां तक कि नर्सों को सिंगल यूज़ मास्क को कई बार इस्तेमाल करने को कहा गया| हर बार जब गाइडलाइन बदलती तो केली को लगता ‘जैसे हम भेड़ें हैं और कुर्बानी के लिए भेजे गए हैं’|

अस्पताल से घर जाकर केली को यही डर सताता था कि उसकी वजह से कहीं उसके पति और बच्चों को भी संक्रमण अपनी चपेट में न ले ले| ऐसे ही डर के चलते वह कई रात सो नहीं सकी| अपने परिवार की सुरक्षा को तवज्जो देते हुए आखिरकार केली ने नौकरी छोड़ने का फैसला लिया| हालांकि केली अब भी कहती है कि सुरक्षा के पूरे इंतज़ाम हों तो वह जॉब में खुशी खुशी वापसी चाहेंगी|

नर्सों की सुरक्षा किसी प्राथमिकता में नहीं?

अमेरिका में कोरोना वायरस के कहर के दौरान फ्रंटलाइन लड़ाकों के तौर पर काम कर रहीं नर्सों की सुरक्षा के लिए न्यूनतम सुरक्षात्मक सहयोग के प्रशासनिक रवैये के कारण सिर्फ केली नहीं कई नर्सों ने जॉब छोड़ा है| ऐसी कई नर्सों का आरोप है कि सीडीसी के नये प्रोटोकॉल के कारण नर्सें केवल कुर्बानी की चीज़ बना दी गई हैं और उनके पास जॉब छोड़ने के सिवा चारा ही नहीं बचा है|

बड़ा आरोप : अमेरिका तीनों स्तरों पर नाकाम

केली ने साफ शब्दों में कहा कि वैश्विक महामारी को लेकर चेतावनियां थीं, इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन, राज्य और संघीय सरकार, तीनों बुरी तरह नाकाम साबित हुए| नर्सों को कॉलैटरल डैमेज का हिस्सा बना दिया गया, खास तौर से महामारी के शुरूआती समय में|

कितनी नर्सें हुईं संक्रमण की शिकार?

फरवरी से अप्रैल के बीच किए गए सीडीसी के शुरूआती सर्वे के मुताबिक कहा गया है कि फ्रंटलाइन में काम करने वाले 10 हज़ार स्वास्थ्य कार्यकर्ता, जिनमें नर्सें भी शामिल हैं, टेस्ट में वायरस पॉज़िटिव पाए गए हैं| अब ये भी ध्यान देने लायक है कि यह डेटा एक धीमी और ढीली प्रक्रिया से तैयार हुआ है इसलिए यह नंबर और ज़्यादा हो सकता है| अमेरिकी नर्स एसोसिएशन की मानें तो कम से कम 79 नर्सें कोविड 19 के कारण मारी गई हैं|

कहानी 2 : ‘बगैर बंदूक के सिपाही हैं हम’

हज़ारों नर्सों ने सोशल मीडिया पर इस तरह के जज़्बात का इज़हार किया कि उन्हें बगैर किसी सुरक्षा के संकट के मोर्चे पर उतार दिया गया| अप्रैल के बीच में जॉब छोड़ने वाली न्यू मैक्सिको में नर्स रही रेबेका ने कहा कि जब लोग सोशल मीडिया पर ये कहते हैं कि नर्स की यह ड्यूटी है और नैतिकता भी तो वह कहना चाहती हैं|

हम बलि के लिए जॉब में नहीं आए थे| हम एक भयानक बीमारी के खिलाफ लड़ सकते हैं लेकिन बगैर संसाधनों के यह अपेक्षा नहीं की जा सकती| हमें कहा गया कि हम इस वक्त में सैनिक हैं, लेकिन क्या आप सैनिकों को बगैर हथियारों के मोर्चे पर उतार देते हैं और फिर उनसे अपेक्षा भी रखते हैं कि वो अपना काम करें?

मास्क शेयरिंग के भयानक हालात!

रेबेका के आरोप काफी गंभीर हैं कि एक तो राशन की तरह हफ्ते में एक मास्क दिया जा रहा है और उसे भी दूसरे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ शेयर करने को कहा गया| रेबेका ने कहा कि वह 16 घंटे की शिफ्ट में एक ऐसे मरीज़ के संपर्क में लगातार बगैर मास्क के रहने पर मजबूर थी, जो बाद में कोरोना पॉज़िटिव पाया गया| रेबेका अपने डर को नियंत्रित नहीं कर सकी और आखिर उसने जॉब छोड़ दिया|

न्यूयॉर्क राज्य पर मुकदमा

3 हज़ार नर्सों का प्रतिनिधित्व करने वाली न्यूयॉर्क स्टेट नर्स एसोसिएशन ने पिछले महीने न्यूयॉर्क राज्य के स्वास्थ्य विभाग और दो अस्पतालों के खिलाफ मुकदमा दायर कर कोविड 19 मरीज़ों के इलाज के दौरान नर्सों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को जोखिम में डाले जाने के आरोप लगाए हैं| इन मुकदमों के संबंध में राज्य ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया|

कितनी नर्सें छोड़ना चाह रही हैं जॉब?

अमेरिका बहुत बड़े संकट में घिर सकता है अगर एक सर्वे में सामने आए रुझानों ने हकीकत का रूप ले लिया| 1 हज़ार से ज़्यादा नर्सों से बातचीत पर आधारित नर्सों की ऑनलाइन कम्युनिटी हॉलीब्लू के सर्वे के मुताबिक कहा गया है कि 62% फीसदी नर्सें या तो जॉब छोड़ने का मन बना रही हैं या​ फिर यह पेशा ही| हॉलीब्लू की कारा लन्सफोर्ड ने कहा कि ये नर्सें असुरक्षित रहते हुए अपने काम पर जाने से बेहद डर रही हैं|

कहानी 3 : ‘मैं जॉब छोड़ना नहीं चाहती!’

अप्रैल में वर्जीनिया अस्पताल में बतौर नर्स अपना जॉब छोड़ने वाली केट का कहना है ‘यह सिर्फ जॉब नहीं, एक वचनबद्धता भी रही है| जॉब से दूर होना बहुत मुश्किल और पीड़ादायी समय है| काश मैं अपने मरीज़ों के साथ रह पाती| ऐसा नहीं है कि मैं उनसे दूर होना चाहती थी| अगर मास्क उपलब्ध होते और महामारी संबंधी तमाम सावधानियां बरती गई होतीं तो बेशक मैं अब भी काम कर रही होती|

ज़रा सी ट्रेनिंग और महामारी का मोर्चा

केट के आरोप की गंभीरता यह है कि वह पोस्ट एनेस्थीसिया केयर यूनिट की नर्स थी लेकिन सिर्फ चार घंटे की ट्रेनिंग देने के बाद उसे कोरोना मरीज़ों से संबंधित क्रिटिकल केयर के मोर्चे पर उतार दिया गया| केट ने यह भी कहा कि पीपीई को लेकर भी संशय की स्थितियां थीं और उसे बिलकुल अंदाज़ा नहीं था कि अस्पताल में कितने कोरोना पॉज़िटिव मरीज़ थे|

केट इस डर के साथ रही कि कहीं वह भी तो पॉज़िटिव नहीं है और वायरस को घर लेकर तो नहीं जा रही| केट ने अपने घर में खुद को अपने पति और 1 व 3 साल के बच्चों से पूरी तरह दूर करते हुए क्वारैण्टीन कर लिया था| ऐसे में, उसके लिए जॉब जारी रख पाना मुश्किल हो गया था|

बिगड़ रही है मेडिकल कार्यकर्ताओं की मानसिक स्थिति

न्यूयॉर्क सिटी इमरजेंसी रूम की डॉक्टर लॉर्ना ब्रीन खुदकुशी कर चुकी हैं| एनबीसीन्यूज़ की रिपोर्ट पर आधारित इस लेख के आखिर में जानिए कि अमेरिकी डॉक्टरों ने एक हॉटलाइन बनाई है जिस पर वो कोरोना संकट से जूझ रहे डॉक्टरों की मानसिक चिंताओं व तनाव को दूर करने में मदद करते हैं| इस हॉटलाइन पर रोज़ 20 कॉल्स औसतन आ रहे हैं| वहीं फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों के लिए ऐसी ही एक और हॉटलाइन 24 घंटे काउंसिलिंग कर रही है|

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