डीजल से नहीं, अब ऐसे चलेंगे जनरेटर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कंपनियों को फरमान

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गुडग़ांव : हरियाणा स्टेट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शहर की औद्योगिक इकाईयों को सर्कुलर जारी किया है। जिसमें कहा गया है सभी कंपनियां अपने जनरेटर सेट को डीजल के बजाय सीएनजी सिस्टम से चलाएं। ताकि उससे निकलने वाले धुएं से हवा को प्रदूषित होने से बचाया जा सके। हरियाणा स्टेट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसके लिए कंपनियों को 3 माह की मोहलत दी है। उसके बाद जांच में अगर ऐसा नही पाया जाता तो कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी हो सकती है।

सर्कुलर में आदेश दिया गया है कि इण्डस्ट्री को 3 माह के भीतर 500 केवीए या उससे अधिक क्षमता वाले डीजल जनरेटर पर सीपीसीबी मान्यता वाली लैब से स्वीकृत उत्र्सजन नियंत्रण उपकरण की रेट्रोफिटिंग कराना या उसे गैस आधारित जनरेटर में परिर्वतित करना आवश्यक है।

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जिस पर गुडग़ांव इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष जेएनमंगला ने कहा उद्योग पर्यावरण से संबंधित है व पर्यावरण संरक्षण का पूर्ण समर्थन करता है। उद्योग पहले से ही पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी आदेशों के सभी मानदंडों को पूरा कर रहा है। यहां तक कि ऑनलाइन सतत निगरानी प्रणाली स्थापित की है जो सीपीसी सर्वर से जुड़े हैं। उत्र्सजन नियंत्रण उपकरण  की लागत बहुत ज्यादा है तथा इस उपकरण की दक्षता अपेक्षित स्तर की नही है। कुछ वर्षो में इससे उत्पन्न उत्सर्जन की मात्रा अधिक हो जाती है।

पीएनजी की लागत मौजूदा ईंधन की लागत से 3 गुना से अधिक है। इसके अलावा सभी औद्यौगिक क्षेत्र में पीएनजी की लाइन उपलब्ध नही है। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष मेजर (रि.) केसी संदल ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण दिनॉक 22 मार्च से लाकडाउन के कारण औद्यौगिक इकाईयो को बंद करना पड़ा। जिससे उद्यमियों को भारी आर्थिक संकट से गुजरना पड़ रहा है। लाकडाउन- 4 में उद्यमियों को औद्यौगिक इकाईयॉ कुछ शर्तो के साथ शुरू करने का अवसर दिया गया। अनलॉक-1 में और रियायतें दी लेकिन बिगड़ी अर्थव्यवस्था के काफी कठिनाईयो का सामना करना पड़ रहा है।

ऐसी स्थिति में उद्योग को 3 माह के भीतर डीजल जनरेटर पर उत्र्सजन नियंत्रण उपकरण की रेट्रोफिटिंग कराने अथवा उनको गैस आधारित जनरेटर में परिवर्तित करने का दबाव नही बनाना चाहिए। जबकि उद्योग पहले से ही सभी प्रदूषण नियंत्रण मानदंडों को पूरा कर रहा है। मंगला ने कहा कि एसोसिएशन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अपेक्षा करती है कि सीपीसीबी द्वारा निर्धारित सभी उत्सर्जन मानदंडों का अनुपालन कर रहे हैं। जो ऑनलाइन निगरानी प्रणाली के अन्तर्गत है। उन्हें उभरने का समय दिया जाये तथा इस आदेश पर पुर्नविचार किया जाए।

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