हरियाणा के प्राइवेट स्कूलों के लिए नया आदेश, सिर्फ ये स्कूल ही वसूल सकेंगे ट्यूशन फीस

नई दिल्‍ली. हरियाणा में प्राइवेट स्‍कूलों द्वारा ट्यूशन फीस वसूली को लेकर आ रही अभिभावकों की शिकायतों के बाद अब स्‍कूलों के लिए एक और नया आदेश जारी किया गया है. इसके अनुसार सभी प्राइवेट स्‍कूल बच्‍चों से फीस नहीं वसूल पाएंगे. बल्कि सिर्फ ऑनलाइन पढ़ाई करवाने वाले स्‍कूल ही अभिभावकों से ट्यूशन फीस वसूल सकेंगे. इसके साथ ही कहा गया है कि पुरानी ट्यूशन फीस के अलावा और कोई चार्ज नहीं ले सकेंगे. साथ ही ट्यूशन फीस भी नहीं बढ़ा सकेंगे.

हाईकोर्ट के फैसले के बाद शिक्षा निदेशक हरियाणा द्वारा 10 अक्टूबर को निकाले गए आदेश का पालन न होने पर चेयरमैन एफएफआरसी कम मंडल कमिश्नर फरीदाबाद ने शुक्रवार को एक आदेश निकाला है. जिसमें सभी स्कूल प्रबंधकों से कहा गया है कि वे अभिभावकों से सिर्फ बिना बढ़ाई गई ट्यूशन फीस ही मासिक आधार पर वसूल करें. इसके अलावा अन्य कोई फंड ना लें. यह ट्यूशन फीस भी वही स्कूल लेंगे जो अपने विद्यार्थियों को रेगुलर ऑनलाइन पढ़ाई करा रहे हैं. पत्र में चेतावनी दी गई है कि ऐसा न करने वाले स्कूलों के खिलाफ शिक्षा नियमावली की धारा 158 ए के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी.

फीस के संबंध में अभिभावकों की शिकायतें सरकार तक पहुंचाने वाले हरियाणा अभिभावक एकता मंच का कहना है कि इससे पहले चेयरमैन एफएफआरसी ने यह आदेश निकाले थे कि जिन स्कूल प्रबंधकों ने अभिभावकों से बढ़ी हुई ट्यूशन फीस व अन्य फंडों में फीस वसूली है, स्कूल प्रबंधक उस वसूली गई फालतू फीस को वापस करें या आगे की फीस में एडजस्ट करें. लेकिन स्कूल प्रबंधकों ने ना तो फीस वापस की और न ही एडजस्ट की है. ऐसी हालात में स्कूल प्रबंधक इस आदेश का कितना पालन करेंगे यह देखने की बात है.


मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा व जिला सचिव डॉ. मनोज शर्मा का कहना है कि मॉडर्न डीपीएस, डीपीएस 19 व 81, ग्रैंड कोलंबस, मॉडर्न, मानव रचना, एमवीएन आदि स्कूल शुरू से ही शिक्षा विभाग के आदेशों का उल्लंघन करके अभिभावकों से बढ़ी हुई ट्यूशन फीस, एनुअल चार्ज, ट्रांसपोर्ट फीस, कंप्यूटर फीस आदि कई फंडों में तिमाही आधार पर अभिभावकों से फीस वसूल कर रहे हैं.

कुछ स्‍कूलों की शिकायत पीएमओ तक पहुंच चुकी है और जांच के आदेश भी आ चुके हैं. इस दौरान जो पेरेंट्स इस मनमानी का विरोध कर रहे हैं उनके बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई बंद कर दी गई है. स्कूल संचालक ऐसे अभिभावकों को उनके बच्चे का नाम काटने और परेशान करने की धमकी दे रहे हैं. हाल ही में एमडीपीएस डायरेक्टर यूएस वर्मा द्वारा दी गई ऐसी ही एक धमकी वाला ऑडियो वायरल हुआ है.

मंच के जिला अध्यक्ष एडवोकेट शिव कुमार जोशी ने कहा है कि एक अक्टूबर को हाईकोर्ट ने फैसला दिया था कि स्कूल प्रबंधक पिछले सात महीनों की बैलेंस शीट चार्टेड अकाउंटेंट से वेरिफाई करवाकर दो सप्ताह में सौंपे लेकिन स्कूल प्रबंधकों ने अभी तक ऑडिटेड बैलेंस शीट जमा नहीं कराई है.

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