नगर निगम करनाल ने शुरू की आवारा कुत्तों की नसबंदी, रोज़ाना हो रही 15 से 20 कुत्तों के ऑपरेशन

इंडिया ब्रेकिंग/करनाल रिपोर्टर (ब्यूरो) करनाल 30 अक्तूबर, आवारा कुत्तों की नसबंदी का काम शुरू हो गया है, इससे अगले कुछ महीनो में कुत्तों की संख्या में इजाफा नहीं होगा। खास बात यह है कि जिस एन.जी.ओ. को नगर निगम की ओर से नसबंदी का ठेका दिया गया है, वह नसबंदी के साथ-साथ प्रत्येक डॉग को रेबिज का टीका लगाकर वैक्सीनेटिड भी कर रहा है, इसका फायदा यह होगा कि यदि कुत्ता काट भी ले तो उससे होने वाले नुकसान का भय नहीं।

कुत्तों की नसबंदी का काम काफी दिनो से लटका था, जो अब सिरे चढ़ गया है। नगर निगम आयुक्त विक्रम ने इस बारे विस्तार से बताया कि अलीगढ़ की एक एन.जी.ओ., दक्ष फाउण्डेशन को कुत्तों की नसबंदी का ठेका दिया गया है। संस्था की टीम में कुशल वेटेरीनरी सर्जन शामिल हैं। इससे पहले भी यह संस्था अलीगढ़, ग्वालियर और उज्जैन नगर निगमो में कुत्तों की नसबंदी का काम सफलतापूर्वक कर चुकी है।

उन्होंने बताया कि इस कार्य के लिए रांवर रोड पर संस्था ने एक जगह किराए पर ली है। कई दिन पहले संस्था के लोगों ने करनाल आकर अपनी तैयारी शुरू की दी थी, पहले ट्रायल किया और अब दो दिन से परोपरली नसबंदी का काम जारी है। संस्था के वेटेरीनरी सर्जन डॉ. विजय सिंह गुर्जर, मेल और फीमेल दोनो की नसबंदी कर रहे हैं। ऑपरेशन के बाद प्रत्येक स्वान को रेबिज का टीका लगा देते हैं, ताकि भविष्य में वह किसी व्यक्ति को काटे तो नुकसान नहीं। नसबंदी का सारा कार्य एनीमल वैल्फेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के स्टैण्डर्ड नॉर्म के अनुसार ही किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नसबंदी करने वाली संस्था के साथ नगर निगम का एक साल का करार हुआ है। यह कार्य इससे कम अवधि में भी हो सकता है।


क्या है कुत्तो को पकडऩे और उनकी नसबंदी की दिनचर्या- इस बारे संस्था के सचिव अभय तेवतिया ने बताया कि शहर के किसी न किसी भाग मे जाकर टीम 20-25 कुत्ते एक दिन में पकड़ते हैं। पकडऩे का समय प्रात: 6 से 10 बजे तक का रखा गया है। इनको पकडऩे के लिए बटरफ्लाई नेट का प्रयोग किया जाता है। पकडऩे के बाद उसे बंधीकरण सेंटर ले जाकर रखा जाता है, जहां उसकी देखभाल और खाना दोनो होते हैं। खाने में दलिया, सोयाबीन, चावल और अंडे कुत्तो के आहार में शामिल किए जाते हैं।

शुरू में कुत्ते को फास्ट पर रखते हैं, फिर नसबंदी करते हैं। सारी प्रक्रिया 3 दिन में निपट जाती है। एक ऑप्रेशन में 10 से 15 मिनट ही लगते हैं और प्रतिदिन 15 से 20 सफल ऑप्रेशन नसबंदी के हो जाते हैं। ऑप्रेशन के बाद कुत्ते को अपनी देखरेख में रखते हैं। सारा काम सी.सी.टी.वी. कैमरे की निगरानी में होता है। दो डॉक्टर इस काम के लिए रखे हैं। दूसरी और करनाल के 3 वेटरीनरी डॉक्टरों की टीम सुपरविजन के लिए लगाई गई है। प्रत्येक कुत्ते का रिकॉर्ड रखा जा रहा है। नसबंदी के बाद उसकी पहचान के लिए उसके बाएं कान पर मार्क लगा दिया जाता है, ताकि उसे दोबारा नसबंदी के लिए ना पकड़ा जाए। जिस एरिया से कुत्ता उठाते हैं, उसे वहीं छोड़ देते हैं। पिछले दो दिन में करीब 50 कुत्ते अलग-अलग जगहों से पकड़े हैं।

कुत्तो की नसबंदी के कार्य को सफल बनाने के लिए निगमायुक्त की नागरिकों से अपील- निगमायुक्त विक्रम ने शहर के तमाम नागरिकों से अपील कर कहा है कि काफी कोशिशों के बाद नगर निगम की ओर से कुत्तो की नसबंदी का काम शुरू करवाया गया है, क्योंकि शहर में आए दिन कुत्तों के आतंक और उनके काटने की घटनाओं से गली-मोहल्लो में दहशत रहती थी, अब इससे निजात मिलेगी। उन्होंने कहा कि गली-मोहल्लो में नागरिक, संस्था की टीम के सदस्यों का कुत्ते पकडऩे के दौरान विरोध ना करें, बल्कि सहयोग करें, तभी काम चलेगा।

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