हरियाणा में बढ़ेंगे दूध के रेट, पशुपालकों और दुग्धत उत्‍पादकों को मिलेगी बड़ी राहत

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार राज्‍य में दूध के रेट बढ़ाने की तैयारी में है। राज्‍य की मनोहरलाल सरकार दुग्‍ध उत्‍पादक और इससे जुडे़ किसानों को बड़ी राहत देेगी। राज्‍य सरकार उनसे खरीदे जा रहे दूध के रेट में वृद्धि करने की तैयारी में है। इस बार में जल्‍द ही फैसला होने की संभावना है।

हरियाणा के पशुपालकों और दुग्‍ध उत्‍पादकों को मिलेगी बड़ी राहत

प्रदेश सरकार दूध के रेट बढ़ाकर गांव-देहात में दूध का काम करने वाले पशुपालकों और किसानों को बड़ी राहत देने की कोशिश में है। हरियाणा सरकार गांवों में सहकारी समितियों के माध्यम से दूध की खरीददारी करती है। इस दूध के रेट बढ़ाने पर सरकार में मंथन चल रहा है। इसका फायदा हजारों की संख्या में दूध उत्पादक किसानों व इससे जुड़े लोगों को मिलेगा।

माना जा रहा है कि दिल्ली बार्डर पर चल रहे किसानों के आंदोलन को देखते हुए भी सरकार का यह निर्णय काफी अहम हो सकता है। हालांकि कोई भी निर्णय लेने से पहले सरकार वित्त विभाग से भी चर्चा करेगी ताकि इस फैसले के बाद पड़ने वाले वित्तीय बोझ का समय रहते प्रबंध किया जा सके।

नंबरदारों को अभी नहीं मिलेंगे स्‍मार्ट फोन

हरियाणा सरकार इस बार भी नंबरदारों को स्मार्ट फोन देने के अपने वादे को पूरा नहीं कर पाएगी। प्रदेश सरकार जिला उपायुक्तों के माध्यम से नंबरदारों को यह फोन वितरित करना चाहती थी, लेकिन राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्रालय इसके हक में नजर नहीं आया। नतीजतन योजना अधर में लटक गई।

अब राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग किसी कंपनी से एग्रीमेंट या टेंडर कर नंबरदारों को यह स्मार्ट फोन दिलवाएगा, लेकिन इस काम में समय लग सकता है। 31 मार्च को खत्म हो रहे वित्तीय वर्ष से पहले नंबरदारों को स्मार्ट फोन मिलने मुश्किल हैं। इसलिए अब इस योजना के लिए अगले बजट में प्रावधान करना पड़ेगा।

कोरोना काल की वजह से गहराया वित्तीय संकट सरकार के लिए इस समय किसी चुनौती से कम नहीं है। प्रदेश सराकर को कोरोना काल में कम से कम 12 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचा है।

हालांकि आबकारी एवं कराधान विभाग विभिन्न माध्यम से कर संग्रहण के इस लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में लगातार मेहनत कर रहा है। इसमें विभाग को सफलता भी मिल रही है।

सूत्रों का कहना है कि नंबरदारों को स्मार्ट फोन नहीं मिल पाने के राजनीतिक कारण भले ही हों, लेकिन वित्तीय संकट भी बड़ी वजह है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से नंबरदारों को दिए जाने वाले इन स्मार्ट फोन के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था।

सरकार ने फिलहाल यह फाइल लौटा दी है। प्रदेश में 15 हजार के आसपास नंबरदार हैं। अब वित्त विभाग के साथ इस योजना पर नए सिरे से चर्चा होगी।

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