Kuljinder Mohan Singh Bath देश के 40 सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों में शामिल!
हरियाणा के करनाल शहर के लिए यह बेहद गर्व का पल है। दून इंटरनेशनल स्कूल के प्रबंध निदेशक, प्रसिद्ध शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता कुलजिंदर मोहन सिंह बाठ को देश के 40 सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों की प्रतिष्ठित सूची में स्थान मिला है। पूरे हरियाणा से इस सम्मान के लिए चुने जाने वाले वे एकमात्र शिक्षक हैं। उन्हें यह सम्मान नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा प्रदान किया गया।

शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित करने के लिए आयोजित इस राष्ट्रीय चयन प्रक्रिया में इस वर्ष कुल 36,770 नामांकन प्राप्त हुए थे। इनमें से गहन मूल्यांकन के बाद केवल 40 शिक्षकों को ही ‘श्रेष्ठ शिक्षक सम्मान’ के लिए चुना गया। यह सम्मान उन शिक्षकों को दिया जाता है जिन्होंने शिक्षा के माध्यम से समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया हो।
दिल्ली में केंद्रीय शिक्षामंत्री ने किया सम्मानित
नई दिल्ली में आयोजित इस समारोह में देशभर से आए शिक्षाविदों, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और राजधानी की कई गणमान्य हस्तियों ने भाग लिया। समारोह के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कुलजिंदर मोहन सिंह बाठ को सम्मानित करते हुए कहा कि देश के लगभग सवा करोड़ शिक्षकों में से उनका इस राष्ट्रीय सम्मान के लिए चुना जाना अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि है और पूरे देश को उन पर गर्व है।
Kuljinder Mohan Singh Bath देश के 40 सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों में शामिल
सम्मान प्राप्त करने के बाद अपने विचार व्यक्त करते हुए कुलजिंदर मोहन सिंह बाठ ने कहा कि यह पुरस्कार केवल उनका नहीं है, बल्कि उनके सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और करनाल के नागरिकों का भी सम्मान है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा समावेशी, मूल्य-आधारित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्राथमिकता दी है। यह सम्मान उन्हें और अधिक विनम्रता और समर्पण के साथ शिक्षा के क्षेत्र में काम करने की प्रेरणा देगा।
इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के विजेताओं का चयन राष्ट्रीय स्तर की तीन सदस्यीय जूरी ने किया। इस जूरी में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अनिरुद्ध बोस, आईआईएम इंदौर के निदेशक प्रो. हिमांशु राय और एक राष्ट्रीय दैनिक के मुख्य संपादक अरुण चौहान शामिल थे। इन सभी विशेषज्ञों ने गहन मूल्यांकन और समीक्षा के बाद देश के श्रेष्ठ शिक्षकों की सूची तैयार की।
कुलजिंदर मोहन सिंह बाठ लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक जिम्मेदारी के साथ कार्य कर रहे हैं। उन्होंने करनाल के विभिन्न सेक्टरों की झुग्गी-झोपड़ियों में बांस से बनी अस्थायी कक्षाओं के माध्यम से गरीब और वंचित बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान की। इतना ही नहीं, उन्होंने इन बच्चों को किताबें और अन्य शैक्षणिक सामग्री भी उपलब्ध करवाई, जिससे वे शिक्षा से जुड़ सके।
उनकी एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि करनाल जेल में बंद कैदियों के बच्चों के लिए शिक्षा की व्यवस्था उपलब्ध करवाना रही। इस पहल को बाद में हरियाणा सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में अपनाया और बाद में इसे राज्य की सभी जेलों में लागू किया गया। इसके बाद भारत सरकार ने इस मॉडल को देश की अन्य जेलों में भी लागू किया, जिससे लाखों बच्चों को शिक्षा का लाभ मिला।
इसी उत्कृष्ट सेवा के लिए कुलजिंदर मोहन सिंह बाठ को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के चेयरमैन द्वारा स्वामी विवेकानंद नेशनल स्कूल ऑफ एक्सीलेंस अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।
इसके अलावा शिक्षा और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता कई अन्य पहल में भी दिखाई देती है। उन्होंने ‘बेटी पढ़ायो, बेटी बचायो’ जैसे प्रेरणादायक संदेश को लिखकर समाज में बेटियों की शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का काम किया। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज की प्रेरणा से उन्होंने ‘जियो गीता अभियान’ के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए एक अनूठा पाठ्यक्रम तैयार किया, जिसमें अंग्रेजी के A, B, C की जगह पौराणिक पात्रों के उदाहरण जैसे अ – अर्जुन और ब – भीम को शामिल किया गया।
इतना ही नहीं, उन्होंने 700 श्लोकों पर आधारित श्रीमद्भगवद्गीता का एक हस्तलिखित ग्रंथ भी तैयार करवाया, जिसे आज कुरुक्षेत्र के गीता स्थानम में सुरक्षित रखा गया है। शिक्षा के अधिकार (RTE), धारा 134-ए और चिराग योजना के अंतर्गत उन्होंने करनाल में सबसे अधिक जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शिक्षा के साथ-साथ शहर के विकास में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। करनाल को स्मार्ट सिटी बनाने और दिल्ली से करनाल तक रैपिड रेल परियोजना लाने के प्रयासों में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। करनाल स्मार्ट सिटी विषय पर आयोजित एक निबंध प्रतियोगिता में लगभग 9000 प्रतिभागियों में से उन्होंने पहला स्थान हासिल किया और पुरस्कार स्वरूप मिली 25,000 रुपये की राशि को करनाल विकास निधि में दान कर दिया।
दयाल सिंह कॉलेज करनाल के पूर्व छात्र रहे कुलजिंदर मोहन सिंह बाठ वर्तमान में कॉलेज की एलुमनी एसोसिएशन के अध्यक्ष और गवर्निंग बॉडी के सदस्य भी हैं। उन्होंने महान देशभक्त और शिक्षाविद दयाल सिंह मजिठिया के जीवन और कार्यों पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाई, जिसमें मजिठिया की भूमिका उन्होंने स्वयं निभाई।
इस राष्ट्रीय सम्मान के बाद शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख लोगों की ओर से उन्हें लगातार बधाई संदेश मिल रहे हैं। कुलजिंदर मोहन सिंह बाठ ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा।
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