जानिए फसल बीमा योजना से कौन है फायदे में ? किसान या कम्पनी

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चंडीगढ़. हरियाणा सरकार ने राज्य में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY-Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) से जुड़ी शिकायतों का फास्ट ट्रैक स्तर पर निवारण करने के लिए शिकायत निवारण समिति गठित की है. योजना से संबंधित काम को संभालने के लिए हर जिले में विशेष रूप से एक परियोजना अधिकारी और एक सर्वेक्षक नियुक्त किया है.

कृषि विभाग, हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजीव कौशल ने बताया कि राज्य में पिछले तीन वर्ष (खरीफ 2016 और रबी 2018-19) के दौरान योजना के तहत कुल प्रीमियम की तुलना में किसानों को दावों के लिए अधिक पैसा मिला है. इस दौरान 1,672.03 करोड़ रुपये प्रीमियम के तौर पर दिए गए, जबकि किसानों के दावों के लिए 2,097.93 करोड़ रुपये मिले. कुल 49,78,226 किसानों (Farmers) को योजना के दौरान कवर किया गया.

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मक्का पर बीमा का पूरा प्रीमियम देगी सरकार

यही नहीं सरकार ने प्रदेश के पांच जिलों के आठ खंडों में मक्का की फसल पर बीमा का पूरा प्रीमियम (Premium) देने का फैसला लिया है. बताया गया है कि ये वो खंड हैं जहां पर ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ स्कीम लागू है. इनमें रतिया, सीवान, गुहला, पीपली, शाहबाद, बबैन, ईस्माइलाबाद व सिरसा शामिल हैं.

कृषि विभाग, हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजीव कौशल ने बताया कि राज्य की फसल विविधिकरण योजना के तहत कपास सहित वैकल्पिक फसलों की खेती करने वाले किसानों को कोई फसल बीमा (Crop Insurance) प्रीमियम नहीं देना होगा. ऐसे किसानों को प्रीमियम दरों में किसी भी प्रकार की वृद्धि के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है.

कितना लगता है प्रीमियम

खरीफ फसलों के लिए बीमा राशि का दो प्रतिशत, रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत का भुगतान करना होता है. कपास सहित वाणिज्यिक और वार्षिक फसल के लिए पांच प्रतिशत किसान को देना होता है. बाकी केंद्र व राज्य सरकार देती हैं.

पड़ोसी राज्यों के किसान घाटे में रहे

राजस्थान के किसानों ने इन तीन साल में 8,501.31 करोड़ रुपये का प्रीमियम अदा किया जबकि 6,110.77 करोड़ रुपये दावे के रूप में मिले.

उत्तर प्रदेश के किसानों ने इस अवधि में 4,085.71 करोड़ रुपये प्रीमियम के तौर पर दिए. जबकि 1,392.6 करोड़ रुपये का दावा प्राप्त हुआ.

राष्ट्रीय स्तर पर कौन फायदे में?

फसल बीमा के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर किसानों से ज्यादा कंपनियों को फायदा मिला है. तीन साल में किसानों, केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा सामूहिक रूप से प्रीमियम के रूप में 76,154 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया जबकि किसानों ने सिर्फ 55,617 करोड़ रुपये की राशि दावों के रूप में प्राप्त की.

किसानों को दिया गया फायदे का तर्क

हरियाया में बीजेपी (BJP) की सरकार है. इसलिए वो किसानों को फसल बीमा के फायदों से जुड़ा तर्क दे रही है. कहा जा रहा है कि फसल बीमा योजना में किए गए बदलाव किसानों के लिए फायदेमंद साबित होंगे.

योजना को फसल ऋण के साथ-साथ स्वैच्छिक बनाया गया है.

बीमा कंपनियों के लिए अनुबंध की अवधि को एक वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष तक किया गया है.

एकल जोखिम के लिए भी बीमा की अनुमति दी गई है. अब किसान अपनी फसलों के लिए अधिक महंगे बहु-जोखिम कारक, जिनमें से कई कारकों के किसी क्षेत्र विशेष में होने की संभावना न के बराबर होती है, के कवर के लिए भुगतान करने की बजाय उन जोखिम कारकों का चयन कर सकते हैं, जिसके लिए वे अपनी फसल का बीमा करवाना चाहते हैं.

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