करनाल को मिली बेसिक ड्रग प्लांट की सौगात, चीन को देगा कड़ी टक्कर

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करनाल । कोरोना काल में दवा उद्योग की बेहद अहम भूमिका के मद्देनजर केंद्र और हरियाणा सरकार की ओर से चीन पर निर्भरता खत्म करके स्वदेश में ही इस सेक्टर को बढ़ावा देने के भरसक प्रयास हो रहे हैं। इसी के तहत अब बल्क ड्रग के क्षेत्रीय उत्पादन पर फोकस करते हुए करीब 53 ऐसे एक्टिव फार्मा इनग्र्रेडिएंट्स यानी एपीआई चिन्हित किए गए हैं। इनका इस्तेमाल कोरोना व अन्य संक्रमण से लड़ने में कारगर 41 दवाओं के उत्पादन में होता है।

केंद्र सरकार की उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन योजना से फार्मा सेक्टर उत्साहित

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करनाल सहित पूरे हरियाणा में उच्च गुणवत्ता के मानकों पर खरी उतरने वाली कई कंपनियां इसके लिए आगे आने को तैयार हैं। इन्हें केंद्र सरकार की विशेष पीएलआइ यानि प्रोडक्शन लिंक्ड योजना में कवर किया जाएगा, जिसकी पूरी लागत करीब सात हजार करोड़ रुपये है।

दरअसल, बल्क ड्रग उस आधारभूत सामग्री को कहा जाता है, जिसकी मदद से विभिन्न प्रकार की दवाएं तैयार होती हैं। इन्हेंं बेसिक ड्रग, बुनियादी कच्चा माल या रॉ मैटिरियल भी कहते है। कोरोना काल से पहले तक देश में बड़े पैमाने पर इनका निर्यात चीन से होता था लेकिन जिस तरह बीते कुछ समय में परिस्थितियां पूरी तरह परिवॢतत होती चली गईं, उसे देखते हुए अब फार्मा सेक्टर के दिग्गजों ने भी केंद्र और प्रदेश सरकार की नीति के अनुरूप चीन को हर मोर्चे पर मात देने की तैयारी कर ली है।

कोरोना से लड़ने में कारगर 41 दवाओं के उत्पादन में मिलेगी कारगर मदद

इसी के तहत पूरा फोकस है कि अब तमाम दवाओं का बल्क ड्रग भारत में ही निर्मित हो। इनमें हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, पेरासिटामोल, सिफोरॉक्सीमएक्सिल और एजिथ्रोमाइसिन सरीखी उन तमाम दवाओं के एपीआइ शामिल हैं, जिनकी इस समय न सिर्फ भारत बल्कि अमेरिका सहित विभिन्न देशों में खासी मांग है। कोरोना संक्रमण सहित इसी प्रकार की अन्य बीमारियों से लडऩे में बेहद कारगर इन दवाओं की लगातार बढ़ती इसी मांग के चलते अब भारत सरकार ने दवा निर्माताओं के लिए विशेष योजना  पेश की है।

करनाल सहित पूरे हरियाणा में करीब 20 दवा निर्माताओं ने दर्शाया उत्साह

हरियाणा फार्मास्युटिकल्स मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के वरिष्ठ राज्य उप प्रधान आरएल शर्मा ने बताया कि ये दवाएं तैयार करने के लिए जो रॉ मैटिरियल चाहिए, वह चीन से आना या तो बंद हो चुका है अथवा इसका बचा स्टॉक मुंबई में बैठे होलसेलरों के मार्फत खासा महंगा मिल रहा है। ऐसे में बल्क ड्रग के स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए केंद्र सरकार ने 6,940 करोड़ रुपये की उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन योजना शुरू की है।

इसके तहत 53 तरह के एपीआई का उत्पादन करने के लिए नए संयत्र लगाने होंगे, जिन्हें सरकार की ओर से पूरा वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग विश्व का तीसरा सबसे बड़ा और मूल्य के लिहाज से 14वों सबसे बड़ा औषधि उद्योग है।

वैश्विक स्तर पर निर्यात होने वाली कुल दवाओं में भारत का योगदान 3.5 फीसदी है। इन उपलब्धियों के बावजूद भारत बुनियादी कच्चे माल यानी बल्क ड्रग्स के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, जिनका इस्तेमाल तैयार खुराक वाले फॉर्मूलेशन के उत्पादन में होता है। नई योजना से हरियाणा में भी इसका उत्पादन खासा बढ़ेगा।

इन दवा निर्माताओं ने दिखाई रुचि

केंद्र सरकार के प्रयासों के बीच हरियाणा फार्मास्युटिकल्स मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन से जुड़े अमन वत्स, रमन गुप्ता, राजेश कुमार, नरेंद्र, संजीव वैद, अशोक अरोड़ा, गुलशन डावर, आकाश बांगिया, परमजीत सिंह, नरेंद्र अरोड़ा, जतिंदर पाहुजा, डा. चेतन सोबती, सुनील साहनी, प्रतीक त्रिखा, अभय अरोड़ा, दिनेश कक्कड़, डा. गौरव बत्रा, अभिषेक गुप्ता, अनूप भारद्वाज और अन्य दवा निर्माताओं ने नए प्लांट लगाने के प्रति उत्साह दर्शाया है। खासकर, करनाल में पहले से प्रस्तावित फार्मा पार्क प्रोजेक्ट को लेकर वे इसे सकारात्मक कदम करार दे रहे हैं।

पूरी मदद करेंगे : एसडीसी

”दवा उत्पादकों की पूरी मदद की जाएगी। संकट की घड़ी में उनकी भूमिका बहुत अहम है। इसलिए पूरा प्रयास किया जा रहा है कि बल्क ड्रग उत्पादन के लिए नए प्लांट लगाने में उन्हेंं पूरा वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाए। चीन से बल्क ड्रग नहीं आ रहा है। ऐसे में यही सर्वश्रेष्ठ विकल्प है कि नए प्लांट लगाए जाएं। केंद्र सरकार से विस्तृत गाइडलाइंस मिलते ही इस दिशा में कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

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