करनाल बड़ा साइबर घोटाला: एनडीसी लेने के लिए यूएलबी पोर्टल पर बनाई 209 फर्जी प्रॉपर्टी आईडी

सीएम सिटी में फर्जी टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी बनाते हुए नो ड्यूज सर्टिफिकेट (एनडीसी) लेकर प्रॉपर्टी का क्रय-विक्रय और अवैध कॉलोनियों में रजिस्ट्री कराने का मामला सामने आया है। ulbhryndc.org साइट पर बगैर अधिकारियों की अप्रूवल के 209 टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी जनरेट हो गई हैं।

नगर निगम प्रशासन उस समय हरकत में आया, जब एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के पास 28 जनवरी शाम को 5:15 बजे से रात 2:08 बजे तक टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी जनरेट होने के लगातार मैसेज आते रहे। इससे नगर निगम प्रशासन को अवैध ढंग से टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी जनरेट होने का संदेह हुआ।

ईओ निशा शर्मा के मोबाइल पर टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी जनरेट की शिकायत के मद्देनजर नगर निगम कमिश्नर विक्रम ने ज्वाइंट कमिश्नर गगनदीप सिंह को 29 जनवरी को यह जांच सौंप दी। ज्वाइंट कमिश्नर ने 13 फरवरी को अपनी जांच रिपोर्ट कमिश्नर को दी। नगर निगम ने इस मामले में आरोपी को पकड़ने के लिए सिविल लाइन थाने में एफआईआर भी दर्ज करा दी है।

सिविल लाइन थाना पुलिस ने फर्जी आईडी क्रिएट करने (बनाने) के मामले में अज्ञात पर केस दर्ज किया है। कयास लगाए जा रहे हैं किसी ने वेबसाइट या फिर नगर निगम अधिकारियों की आईडी हैक करके टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी जनरेट करने का खेल खेला है। पुलिस जांच के बाद ही इसका खुलासा हो सकता है। हालांकि नगर निगम उक्त फर्जी प्रॉपर्टी आईडी पर अवैध कॉलोनियों में होने वाली रजिस्ट्रियों को कैंसिल करने के लिए पत्र लिखेगा।

किस महीने में कितनी फर्जी प्रॉपर्टी आईडी मिली: नगर निगम की ओर से 21 नवंबर से 31 जनवरी तक टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी बनाने की जांच की गई। 21 से 30 नवंबर तक 185 लोगों ने आवेदन किया। इनमें से 94 आईडी अप्रूव्ड हुई, जिनमें से 8 प्रॉपर्टी आईडी अवैध ढंग से जनरेट की गई। दिसंबर में 211 टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी के आवेदन दिए गए। इनमें से 154 आईडी अप्रूव हुई, जिनमें से 152 आईडी फर्जी ढंग से बनी। जनवरी में 105 आवेदन आए, जिनमें से 49 आईडी अप्रूव्ड हुई।

इस नंबर से हुई 60% टेंपरेरी आईडी क्रिएट

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार 60 प्रतिशत फर्जी टेंपरेरी आईडी मोबाइल नंबर 9999999990 से जनरेट हुई है। लेकिन इस नंबर न कॉल जा रही है और न मैसेज पहुंच रहा है। इसके अलावा कई अन्य नंबरों से का प्रयोग हुआ है। कोई भी आवेदक टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी बनाने के लिए अप्लाई करता है तो उसका ओटीपी नंबर निगम के उन अधिकारियों के मोबाइल पर पहुंचना होता है।

जिनकी यूजर आईडी टेंपरेरी आईडी को आेके करने के लिए बनाई गई है, लेकिन अधिकारियों के मोबाइल पर ओटीपी आए बैगर ही अवैध ढंग से बनाई गई टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी अप्रूव्ड हो गई। खास बात यह है कि मोबाइल पर ओटीपी आने पर ही यूजर भी लॉगिन कर सकता है। ऐसे में यह एक बड़ा साइबर घोटाला सामने आ रहा है।

20 सितंबर से पहले की टेंपरेरी आईडी की भी होगी जांच

प्रदेश सरकार की ओर से किसी मकान-प्लाॅट इत्यादि का क्रय-विक्रय करने के लिए रजिस्ट्री कराने से पहले नगर निगम से नो ड्यूज सर्टिफिकेट लेने और डीटीपी से एनओसी लेने की शर्त लगाई है। इनके बिना तहसील में रजिस्ट्री नहीं होती है, लेकिन जिन लोगों के पास प्रॉपर्टी आईडी नहीं थी, उनको प्रॉपर्टी के क्रय-विक्रय में अड़चन आने लगी है।

इसके कारण सरकार ने लोगों को टेंपरेरी आईडी खुद जनरेट करने और अपना ड्यूज नगर निगम को अदा करके नो ड्यूज सर्टिफिकेट (एनडीसी) लेने का ऑप्शन दिया। 20 नवंबर तक लोगों ने खुद ही आईडी जनरेट की, लेकिन 21 नवंबर से सरकार ने इससे नगर निगम के अधिकारियों को भी इन्वॉल्व कर दिया।

इसके बाद कोई भी टेंपरेरी आईडी का ऑनलाइन आवेदन नगर निगम के अधिकारियों के माध्यम से अप्रूव्ड होने लगा। अधिकारी भी अपनी यूजर आईडी को ओटीपी डालकर खोलते थे, लेकिन साइबर शातिराें ने साइट अथवा अधिकारियों की यूजर आईडी को ही हैक कर धड़ाधड़ 209 टेंपरेरी आईडी बना डाली। अब नगर निगम ने 20 नवंबर से पहले बनी टेंपरेरी आईडी का डाटा भी पंचकूला मुख्यालय से मंगवाया है।

21 नवंबर से 31 जनवरी तक जनरेट हुई टेंपरेरी प्रॉपर्टी आईडी की जांच की है। जिनमें 209 आईडी फर्जी ढंग से बनाई मिली हैं। मामले में सिविल लाइन थाने में एफआईआर दर्ज करा दी गई। पुलिस जांच के बाद मामले को सही से खुलासा हो सकेगा।

गगनदीप सिंह, ज्वाइंट कमिश्नर, नगर निगम करनाल।

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