भारत-अमेरिका व्यापार: जानिए बाइडन के राष्ट्रपति बनने से कैसा रहेगा दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध

नई दिल्ली. अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए जो बाइडन (Joe Biden) की जीत भारत-अमेरिका के बीच व्यापार डील (Indo-US Trade Deal) में बाधा बन सकती है. लगभग कई महीनों तक विचार विमर्श के बाद दोनों देशों के बीच सालाना 13 अरब डॉलर के लिमिटेड ट्रेड डील (Limited Trade Deal) पर सहमति बनी थी, लेकिन बाइडन के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद इसमें देरी होने की संभावना है. एक मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि नया प्रशासन इस मामले को व्यापक रूप से रिव्यू करने के बाद ही आगे के लिए हरी झंडी देने पर​ निर्णय करेगा. हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि बाइडन प्रशासन अधिक व्यावहारिक होगा और उसे देशों के साथ व्यापारिक संबंध को अमेरिकी व्यापार घाटा (American Trade Deficit) के दृष्टिकोण से नहीं देखेगा.

इसी साल सितंबर में, भारत के वाणिज्य एवं औद्योगिक मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने कहा था कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट ला​इथिजर (Robert Lighthizer) के साथ एक सहमति बनी है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव (USA Presidential Election) से पहले लिमिटेड ट्रेड डील को अंतिम रूप दे दिया जाएगा. इस लिमिटेड ट्रेड डील को दोनों देशों के बीच बड़े मुक्त व्यापार सह​मति का शुरुआती दौर माना जा रहा था.

ओबामा की नीतियों को आगे बढ़ाएंगे ट्रंप


एनलिस्ट्स का मानना है कि बाराक ओबामा के कार्यकाल में उपराष्ट्रपति रह चुके जो बाइडन ओबामा (Barack Obama) की नीतियों को ही आगे बढ़ाने का काम करेंगे. हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि ‘अमेरिका फर्स्ट’ नी​ति के तहत डोनाल्ड ट्रंप संरक्षणवाद उपाय को बहुत आगे बढ़ा चुके हैं. ऐसे में बाइडन के लिए इसे पूरी तरह से खारिज कर ओबामा की नीतियों को अपनाना और इसके साथ आगे बढ़ना आसान नहीं होगा.

बाइडन की वी​जा पॉलिसी उदार होने की उम्मीद

जानकार बता रहें कि बाइडन के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद अमेरिका की नीतियों में अचानक किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती है. फिर भी, ट्रंप की तुलना में बाइडन की वीजा नीतियां (Visa Policy) अधिक उदार होंगी और इससे भारत के आईटी इंडस्ट्री को मदद मिल सकती है. जून में ही ट्रंप प्रशासन ने नॉन-इमिग्रेंट वीजा (Ban on Non-immigrant Visa) जारी करने पर प्रतिबंध लगा दिया था. यह प्रतिबंध इस साल 31 दिसंबर तक लागू है.

ईरान से अमेरिका के संबंध पर होगी नजर

साथ ही, बाइडन ईरान के साथ ओबामा काल के न्यूक्लियर डील को भी रिस्टोर कर सकते हैं. संभावना है कि ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध को भी अमेरिका वापस ले ले. इस कदम से भारत के लिए ईरान से तेल और चावल व्यापार का रास्ता साफ हो जाएगा. ईरान से व्यापार करने की सूरत में भारत को अमेरिकी प्रतिबंध का कोई खतरा नहीं मंडराएगा.

आयात-निर्यात के मोर्चे पर कई फैसले संभव

लिमिटेड ट्रेड डील की बात करें तो भारत को जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफरेंसेज (GSP – General Systeme of Preferences) के तहत आयात शुल्क लाभ की उम्मीद थी. ट्रंप ने 2018 में इसे खत्म कर दिया था. इस ट्रेड डील के तहत भारत भी हार्ली डेविडसन (Harley Davidson) जैसी हाई-एंड बाइक्स पर टैरिफ घटाने वाला था. इसके अलावा कृषि उत्पादों के लिए बड़ा बाजार उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था होती. साथ ही भारत कई अन्य टैरिफ उपायों में राहत देने को तैयार था.

अगर भारत से आयात किए जाने वाले स्टील पर 25 फीसदी और एल्युमिनियम पर 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ को अमेरिका वापस लेता तो इसके बदले भारत भी बादाम, सेब और अखरोट समेत 29 अमेरिकी उत्पादों पर अतिरिक्त ड्यूटी घटाता.

​कम हुआ ट्रेड सरप्लस

पिछले कुछ सालों में अमेरिका के साथ भारत के ट्रेड सरप्लस में सिकुड़न देखने को मिली है. इसका एक कारण यह भी है कि भारत ऑयल व गैस का आयात अमेरिका से भी करने लगा है. अमेरिकी सरकार के आंकड़ों के अनुसार, साल 2016 में ट्रेड सरप्लस 24.3 अरब डॉलर से घटकर 2019 में 23.3 अरब डॉलर पर आ गया है.

भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2020 में अमेरिका से कुल 35.7 अरब डॉलर का आयात हुआ है. हालांकि, कुल मर्चेंडाइज आयात 7.8 फीसदी घटा भी है. भारत में अमेरिका से 8.3 अरब डॉलर के खनिज ईंधन व इससे जुड़े आइटम्स, 6.2 अरब डॉलर की जेम्स व ज्वेलरी और 4.7 अरब डॉलर कीमत के कैपिटल गुड्स आयात किया है. भारत से अमेरिका में कुल निर्यात 53 अरब डॉलर का है. पिछले साल की तुलना में यह 1.3 फीसदी बढ़ा है. 9.3 अरब डॉलर के जेम्स व ज्वेलरी, 6.3 अरब डॉलर के फार्मास्युटिकल्स और 4.2 अरब डॉलर के ग्रार्मेंट्स का निर्यात हुआ है.

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