डॉक्टरी की पढ़ाई में शामिल किया गया महामारी प्रबन्धन का कोर्स, जानिए कोर्स की खास बातें

मेडिकल के छात्र अब अपने एमबीबीएस (MBBS) के दौरान महामारी प्रबंधन और इसके सामाजिक, कानूनी और अन्य पहलुओं के बारे में भी अध्ययन करेंगे। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) के स्थान पर बना बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (BoG) पाठ्यक्रम में इसका नया चैप्टर जोड़ रहा है।

कोरोना महामारी की वजह से पैदा हुए हालात के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। नवोदित मेडिकल छात्रों को प्रशिक्षित करने के लिए विशेषज्ञों और शिक्षाविदों के एक समूह ने ‘महामारी प्रबंधन मॉड्यूल’ के नाम से विस्तृत दस्तावेज तैयार किया है।

मेडिकल छात्रों को महामारी के दौरान संक्रमण नियंत्रण, रोग प्रबंधन, महामारी प्रबंधन, अनुसंधान, संवाद और गहन देखभाल के बारे में पढ़ाया जाएगा। बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन डॉ. वीके पॉल ने दस्तावेज की प्रस्तावना में कहा है कि मेडिकल की स्नातक शिक्षा पर संशोधित नियम और योग्यता आधारित स्नातक पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। साथ ही इसके कार्यान्वयन के लिए विस्तृत दिशानिर्देश भी तैयार किए गए हैं।

दस्तावेज में कहा गया है कि महामारी के दौरान मेडिकल स्नातक के लिए निर्धारित सभी पांच भूमिकाओं (चिकित्सक, स्वास्थ्य टीम के नेता व सदस्य, कम्युनिकेटर, पेशवर, आजीवन सीखने वाला) के निर्वहन की अपेक्षा की जाती है।

इस बीच खबर है कि कोरोना महामारी की वजह से एमबीबीएस की परीक्षा पर संकट आ गया है। देरी को लेकर आयुष विश्वविद्यालय ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को कक्षाएं संचालित करने के लिए कहा है, ताकि प्रायोगिक परीक्षाएं कराकर समय पर लिखित परीक्षा ली जा सके। छत्तीसगढ़ में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष मुख्य परीक्षा मार्च 2020 तक लेनी थी, जो अब तक नहीं हुई है। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में प्रायोगिक कक्षाएं लंबित होने से छात्रों को प्रायोगिक प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है। चिकित्सा विज्ञान में प्रायोगिक प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण स्थान है। बिना प्रायोगिक प्रशिक्षण के पढ़ाई अधूरी है।

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