धान का दुश्मन नहीं बल्कि मुझे भू-जल से प्यार है: सी.एम.

सिरसा: भूजल स्तर गिरने व कई जिले डार्क जोन में आने के कारण धान की खेती को कम करने व पानी बचाने के मकसद से शुरु की गई योजना को लेकर बेशक प्रदेश सरकार को योजना के प्रारुप को बदलना पड़ा मगर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर इस योजना का वास्तविक अर्थ किसानों को समझाने के लिए उनके बीच में जाते दिखाई दे रहे हैं। किसानों से व्यक्तिगत तौर पर मिलकर उनसे बातचीत करने की कड़ी में मंगलवार को सी.एम. मनोहर लाल खट्टर सिरसा के पंचायत भवन में किसानों से सीधा संवाद स्थापित किया।

खास बात यह रही कि इस सीधा संवाद कार्यक्रम के तहत सोशल डिस्टैंसिंग का भी विशेष तौर पर ध्यान रखा गया। इस कार्यक्रम के तहत सी.एम. खट्टर ने बड़े ही भावपूर्ण अंदाज में किसानों को साफ कहा कि ‘मैं धान का दुश्मन नहीं बल्कि मुझे पानी से प्यार हैं’ । मुख्यमंत्री के मुंह से भावनात्मक रुप से निकले इन शब्दों ने किसानों पर खासा प्रभाव छोड़ा। सी.एम. खट्टर ने कहा कि आने वाली पीढ़ी को विरासत में अगर पानी देना है, तो हमें आज संभलना होगा।

जल संरक्षण की दिशा में प्रदेश सरकार द्वारा गंभीरता से प्रयास किए जा रहे है और कई कारगर योजनाएं क्रियान्वित की गई है। इसी कड़ी में मेरा पानी-मेरी विरासत योजना का उद्देश्य किसानों को धान की बजाय दूसरी फसल लगाने के लिए प्रेरित करना है ताकि किसान फसल विविधिकरण की और अग्रसर होकर सरकार की जल बचाव मुहिम में अपना योगदान दें।

योजना को लेकर बने संशय को दूर करने की कोशिश

इस संवाद के दौरान मुख्यमंत्री खट्टर ने किसानों का संशय दूर करते हुए उनके सुझावों का स्वागत भी किया। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा किसानों पर योजना को थोपने की नहीं हैं, बल्कि भूमिगत पानी को बचाने की है, जिन क्षेत्रों में भूमिगत जल स्तर 40 मीटर से नीचे है, उन क्षेत्रों में किसानों से धान न लगाने का आह्वान किया जा रहा है, ताकि भविष्य में जल संकट उत्पन्न न हो और किसान की भूमि भी उपजाऊ बनी रहे। अब तक प्रदेश में योजना के तहत 55 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में धान की बजाय दूसरी फसल उगाने के लिए अपनी सहमति जताई है और जल बचाव मुहिम में किसान जुड़ रहे है।

उन्होंने कहा कि सिरसा जिला में अब तक मेरा पानी- मेरी विरासत योजना में 5573 किसानों ने धान की जगह दूसरी फसल उगाने के लिए सहमति जताई है। किसान धान की अतिरिक्त कोई भी फसल या बागवानी अपना कर सकते है। इसके लिए सरकार द्वारा 7 हजार रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इसमें 2 हजार रुपए रजिस्टेशन करने के साथ ही किसान को दिए जाएंगे और शेष 5 हजार रुपए की राशि फसल तैयार होने पर ही दी जाएगी। बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में जहां पर विविधिकरण के अंतर्गत वैकल्पिक फसल लगाना संभव नहीं है।

ऐसे किसान बासमती किस्म की सीधी बजाई कर सकते है। जो किसान फसल विविधिकरण करके कपास, मक्का व दलहन फसलों की बिजाई करेंगे। उन किसानों को फसलों की खरीद सरकार द्वारा निर्धारित मूल्यों पर की जाएगी। इसके अलावा जल बचाव मुहिम के तहत किसान टपका सिंचाई प्रणाली प्रयोग करें। किसानों को टपका सिंचाई विधि पर 85 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।

एस.वाई.एल. के मुद्दे पर हैं गंभीर

इस संवाद के तहत पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि सरकार द्वारा एस.वाई.एल. नहर व हांसी-बुटाना नहर में पानी लाने के गंभीर प्रयास किए जा रहे है। इसके अलावा उत्तराखंड में लखवार डैम व रेणुका बांध परियोजना सहित अन्य माध्यमों से पानी लाने की योजना प्रगति पर है। लेकिन फिलहाल हमें अपने पास उपलब्ध पानी के उचित इस्तेमाल की ओऱ ध्यान देना होगा। उन्होंने बताया कि प्रति किलोग्राम धान पैदा करने पर 4000 से 5000 लीटर पीनी खर्च होता है जो पानी की बर्बादी का एक बड़ा कारण है। पिछली सरकारों द्वारा इस ओर ध्यान न दिए जाने के कारण आज हालत यह हो गई है कि अनेक स्थानों पर भूमिगत जलस्तर 200 फूट से भी गहराई पर चला गया है। इसके अलावा प्रदेश में राइस-सूट योजना फिर से शुरु की जाएगी।

इसके तहत बरसाती मौसम में 20 एकड़ के किसान को नहर से स्पैशल मोगा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए आवेदन करने वाले सभी इच्छुक किसानों को इस योजना का लाभ दिया जाएगा। उन्होंने कृषि उपनिदेशक, बागवानी अधिकारी व अन्य संबंधित अधिकरियों को बाढ़ प्रभावित जमीन में डेमोस्ट्रेशन पार्क विकसित करवाने, नहरी पानी का समान वितरण सुनिश्चित करने तथा योजना के संबंध में अधिक से अधिक किसानों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला, सांसद सुनीता दुग्गल, जिला अध्यक्ष यतिंद्र सिंह एडवोकेट, पूर्व विधायक मक्खन लाल सिंगला, पूर्व चेयरमैन जगदीश चौपड़ा, वरिष्ठ नेता प्रदीप रातूसरिया, विजय वधवा, रमेश मेहता, ए.डी.सी. मनदीप कौर, एस.डी.एम. जयवीर यादव, सी.टी.एम. कुलभूषण बंसल, डी.डी.ए. बाबू लाल सहित अन्य अधिकारी व किसान उपस्थित थे।

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