हरियाणा अखाड़ा हत्याकांड का आरोपी बोला- सबको मैंने अकेले ही मारा, बच्चे को गोद में लेकर गोली मारी

रोहतक। जाट कॉलेज के अखाड़े में शुक्रवार को पांच नेशनल खिलाड़ियों तथा एक बच्चे की हत्या के आरोपी सुखविंद्र से रिमांड के दौरान एसआईटी ने जिम्नेजियम हाल के रेस्ट रूम में क्राइम सीन रि-क्रिएट करवाया। इस दौरान आरोपी के पैर कांप रहे थे। इस दौरान पुलिस का कड़ा सुरक्षा पहरा भी रहा। वहीं आराेपी सुखविंद्र पुलिस के सामने अपने बयान बदल रहा है। पुलिस आराेपी के दिए बयानाें पर यकीन नहीं कर पा रही है। इस कारण मामले में अब कड़ियां जुड़ नहीं पा रही है।

सीन ऑफ क्राइम रिक्रेएट कर आरोपी सुखविंदर बेधड़क होकर बोला- किसे कैसे कमरे में बुलाया और गोलियां मारीं। जैसे ही उसने मासूम सरताज को नीचे से गोद में उठाकर लाने और कमरे में ले जाकर गोली मारने की बात कही तो पुलिसकर्मियों के भी आंसू छलक आए।

आखिर उस मासूम ने उसका क्या बिगाड़ा था जो उस पर गोलियां बरसा दीं। यही नहीं मासूम सरताज के चाचा प्रमोज कहते हैं उनकी बेटी भी उसके साथ खेल रही थी, उसे भी कमरे में ले जाने की कोशिश की लेकिन वह नहीं गई थी। वह मेरी बेटी प्रांशी को भी मारना चाहता था। प्रैक्टिस के दौरान म्यूजिक तेज था इसलिए एक-एक करके चली गोलियों की आवाज दब गई।

सूत्रों के अनुसार आरोपी ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि पहले कोच प्रदीप मलिक को रेस्ट रूम में बुलाया। इसके बाद कोच मनोज मलिक, कोच सतीश दलाल, कोच साक्षी और खिलाड़ी पूजा को बारी-बारी से आवाज देकर बुलाया। आरोपी आवाज देकर रूम में आकर दरवाजे के पीछे एक कोने में छिप जाता।

जैसे ही कमरे के अंदर खिलाड़ी एंट्री करते तो आरोपी पीछे से सिर में गन सटाकर गोली मार देता। इस तरह एक के बाद एक खिलाड़ी को कमरे के अंदर बुलाकर जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया। सभी की हत्या करने के बाद आरोपी नीचे गया।

हॉल के बाहर सरताज अपनी चचेरी बहन के साथ खेल रहा था। सरताज को गोद में उठाकर ऊपर रेस्ट रूम में ले गया। वहां पर सरताज को गोली मारने के बाद दरवाजे पर ताला लगाकर फरार हो गया। यहां से 800 मीटर दूर एमकेजेके कॉलेज के गेट पर कोच अमरजीत को गोली मारी गई। इस दौरान जाट कॉलेज अखाड़ा स्थल पर डीएसपी नरेंद्र कादयान, डीएसपी विनोद कुमार, महिला डीएसपी सुशीला, सीआईए समेत पुलिस की पांच गाड़ियों के काफिले में आरोपी सुखविंद्र को घटनास्थल पर लेकर पहुंचे।

सीन ऑफ क्राइम पर आरोपी सुखविंदर को दिन के समय ले जाने और शहर में लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बरकरार बनाए रखने की पुलिस के सामने कड़ी चुनौती थी। इसी चुनौती को आसानी से हल करने के लिए पुलिस की अलग अलग टीमों की 7 गाड़ियां आरोपी को मौके पर ले जाने के लिए गठित की।

जिसमें डीएसपी नरेंद्र कादयान, डीएसपी विनोद कुमार, डीएसपी महिला सुशीला, अपराध शाखा, थाना पुलिस सहित अन्य पुलिस टीम थी। यह कुल मिलाकर 70 सदस्यीय टीम थी। इसके अलावा वारदात स्थल पर भी पुलिस का कड़ा पहरा था।

एफएसएल एक्सपर्ट डॉ. सरोज दहिया मलिक और एसआईटी ने आरोपी से पूरे घटनाक्रम का हर पहलू समझा और नए साक्ष्य भी जुटाए, जोकि अब तक पुलिस के पास भी नहीं थे। इस पूरे क्राइम सीन को समझते समय पुलिस ने घटनाक्रम की वीडियोग्राफी भी करवाई, ताकि बाद में सुखविंद्र किसी तरह की बात से मुकर ना सके। मौका स्थल की ओर जाने वाले मुख्य गेट पर बाहरी व्यक्तियों पर रोक लगा दी गई।

सरताज के चाचा प्रमोज ने बताया कि वारदात की शाम उसके चाचा का लड़का टोनी, मामा का लड़का विशाल उसकी पांच साल की बेटी भी वहीं प्रैक्टिस कर रहे थे। प्रमोज के अनुसार वारदात के बाद टोनी ने बताया कि सुखविंदर एक-एक करके सभी को माफी मांगने के नाम पर ऊपर कमरे में ले जाता रहा और गोलियों से भूनता रहा। आखिर में वह सरताज और प्रियांशी को लेने आया। सरताज को कहा कि उसकी मम्मी बुला रही है।

प्रियांशी को भी ले जाना चाहता था, लेकिन प्रियांशी ने चाचा के साथ प्रैक्टिस करने की बात कही और जाने से इंकार कर दिया। इसके बाद उसने ऊपर कमरे में ले जाकर सरताज को भी गोली मार दी।

गोली चलने जैसी आवाज तो उन्हें सुनाई दी थी, लेकिन प्रैक्टिस के समय म्यूजिक तेज आवाज में था तो अंदाजा लगाया गया कि किसी की शादी में पटाखे बज रहे होंगे। इसका रत्ती भर भी अंदाजा किसी को नहीं था कि सुखविंदर ने ऊपर कमरे में पांच लोगों को मार दिया है। उसका अंतिम संस्कार गांव सरगथला में ही किया गया।

बीते चार दिन से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे सरताज की मौत की खबर के बाद काफी पहलवान पीजीआई के शवगृह पहुंच गए। बच्चे की मौत को लेकर हर किसी में आक्रोश बना हुआ था। शव गृह में हर किसी की जुबान पर एक ही बात थी कि बड़ों से दुश्मनी थी तो कोई बात नहीं, लेकिन बच्चे ने इस हैवान का क्या बिगाड़ा था।

पुलिस सुरक्षा में ही सरताज का शव उसके पैतृक गांव में ले जाया गया है। वहीं पर सरताज के शव को दफनाया गया। मनोज मलिक के भाई प्रमोज का कहना है कि आरोपी सुखविंद्र हत्या की 5 वारदातों को अंजाम देने के बाद दिल्ली पहुंचा। इस मामले में मिलीभगत हो सकती है। ऐसे में वे एसपी राहुल शर्मा से मिलकर मामले की आगामी कार्रवाई के बारे में जानकारी लेंगे।

प्रमोज के मुताबिक वारदात के बाद सुखविंदर कमरा लॉक करके वहां से भाग गया। मनोज, साक्षी, सतीश, प्रदीप, पूजा और सरताज नहीं आए तो उन्होंने सुखविंदर को फोन मिलाया। उससे पूछा कि भाई मनोज कहां है तो सुखविंदर ने जवाब दिया कि देख लो वहीं पड़े होंगे। वे ऊपर कमरे में गए तो पूजा और साक्षी का शव कमरे से बाहर पड़ा था।

कमरे से सरताज की घुटी हुई आवाज आई ते कमरा खोला गया। अंदर का दिल दहला देने वाला दृश्य देखकर हाथ पैर कांप गए। तीन लोगों के शव कमरे में पड़े हुए थे। मनोज के मामा का लड़का विशाल सरताज को कपड़े में लपेटकर अस्पताल लेकर आया।

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