पानीपत में लाठीचार्ज के बाद हिली प्रदेश की राजनीति, गृहमंत्री विज ने SP करनाल को सौंपी जाँच

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बंझौल के 3 बच्चों की हत्या में न्याय की मांग को लेकर आए पीड़ित परिवारों और ग्रामीणों पर लाठीचार्ज करने वाली पुलिस के चौतरफा विरोध के बाद प्रदेश की राजनीति हिल गई है। सीएम मनोहरलाल और गृहमंत्री अनिल विज इस मामले में सक्रिय हो गए।

सीएम ने सांसद संजय भाटिया को कश्यप समुदाय के लोगों से बात करने के लिए भेजा और विज ने दो दिन में करनाल एसपी को रिपोर्ट तलब की है। रात करीब 10 बजे सांसद भाटिया ने रेस्ट हाउस में 5 सदस्यीय कमेटी के साथ बैठक की।

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सांसद ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि समाज के लोगों ने उन्हें शांति से बैठने के लिए कहा। उन्हें पुल के नीचे बैठना था। लेकिन पुलिस ने सड़क पर ही रोक दिया। इसके बाद बुरी तरह पीटा। महिलाओं पर लाठीचार्ज दुर्भाग्यपूर्ण है। समिति ने कुछ वीडियो भी दिए हैं। सांसद ने कहा कि मैं सीएम से बात करूंगा और उन्हें पूरे मामले की जानकारी दूंगा। सीएम आगे का फैसला करेंगे। समाज के लोग शनिवार को गृहमंत्री से मिलेंगे। उन्हें सुबह 10 बजे का समय दिया है।

सांसद के साथ बैठक में बोले

सांसद इंद्री से भाजपा विधायक रामकुमार कश्यप, घरौंडा से पूर्व विधायक रमेश कश्यप, हरियाणा कश्यप राजपूत समाज के प्रदेश अध्यक्ष जयभगवान, रिटायर्ड डीएसपी करताराम कश्यप, पानीपत से धर्मबीर कश्यप, नीरज कश्यप शामिल हुए।

कश्यप समाज की 3 मांगें

1 लाठीचार्ज के बाद जिन लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है, उन सभी पर एफआईआर रद्द हो सकती है और सभी को जेल से रिहा किया जाना चाहिए।

  1. पुलिस कर्मियों पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए क्योंकि इस पर मुकदमा चलाया गया है।
  2. डीएसपी संदीप और मॉडल टाउन एसएचओ सुनील कुमार को सस्पेंड करें, क्योंकि दोनों ने जानबूझकर योजना बनाई थी।

पुलिस के खिलाफ मामला दर्ज किया जा सकता है: एडवोकेट

वरिष्ठ अधिवक्ता केसी शर्मा ने बताया कि लाठी चार्ज के मामले में पुलिसकर्मियों पर हत्या के प्रयास, मारपीट, एससीएसटी एक्ट व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। लेकिन इसके दो पहलू हैं। पहले सरकार से मंजूरी मिलने के बाद ही पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। दूसरा, अगर पुलिस मासूमों को पीटती है तो सरकार से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है।

तीनों परिवारों की माली हालत ठीक नहीं

तीनों पीड़ित परिवारों की माली हालत ठीक नहीं है। उनके घरों की छतें उबड़-खाबड़ हैं। राजवंश और अरुण के मकान आगे-पीछे बने हैं, जबकि लक्ष्य का मकान 100 मीटर दूर है। तीनों परिवारों में कई परिवार, 50 से अधिक ग्रामीण घायल हुए हैं।

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