सोशल मीडिया ग्रुप्स पर हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, इन ग्रुप्स का मेंबर होना भी अपराध

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चंडीगढ़ । सोशल मीडिया पर अश्लीलता को नियंत्रित करने की दिशा में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अश्लील सामग्री प्रसारित होने वाले ग्रुप में शामिल सभी लोग इस अपराध में शामिल हो जाते हैं। एक नाबालिग लड़की के यौन उत्पीडऩ मामले में आरोपित जसविंदर सिंह की जमानत याचिका पर अपने फैसले में जस्टिस सुवीर सहगल ने कहा कि पीडिता की आपत्तिजनक वीडियो अपलोड होने वाले ग्रुप में याचिकाकर्ता की मौजूदगी उसकी अपराध में संलिप्तता साबित करती है।

गौरतलब है कि रोपड़ थाने में पीडि़ता के बयान पर दर्ज की गई इस एफआइआर में कहा गया है कि 13 वर्षीय पीडि़ता जब ट्यूशन पढऩे के लिए एक महिला के घर जाती थी तो उसे वहां शराब व सिगरेट पीने व नशीले इंजेक्शन लेने के लिए बाध्य किया गया। महिला ने उसकी अश्लील वीडियो बनाई व ब्लैकमेल करके उससे पैसे व गहने मंगवाने शुरू कर दिए। आरोपित महिला ने नाबालिग की वीडियो सोशल मीडिया ग्रुप पर अपलोड कर दी, जिसमें जसविंदर सिंह भी था।

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इस मामले में पुलिस ने धारा 354 (मर्यादा भंग करना) व 354-ए (मर्यादा भंग करना व जबरदस्ती करना) के तहत मामला दर्ज किया था। बाद में इसमें धारा 384 (जबरदस्ती वसूली) व 120बी (आपराधिक साजिश) भी जोड़ दी गई।

आरोपित ने पीडि़ता का जीवन तबाह किया, इसलिए जमानत नहीं

जसविंदर सिंह को अग्रिम जमानत का लाभ देने से इन्कार करते हुए जस्टिस सुवीर सहगल ने कहा कि आरोपितों के व्यवहार से पीडि़ता ने लंबे समय तक मानसिक तनाव झेला है। आरोपित पीडि़ता को धमकाता था, जिससे वो इतना डर गई कि उसने तीन साल तक अपनी पीड़ा अभिभावकों को भी नहीं बताई। याचिकाकर्ता एक यौन अपराधी है। उसकी वजह से लड़की का जीवन तबाह हुआ है।

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