यहां मुर्दों को नहीं मिलता कंधा! आधुनिक भारत को शर्मसार करने वाली तस्वीरें

श्‍मशान घाट (Ccremation Ground) का रास्‍ता इतना खराब है कि मौत के बाद संबंधित व्‍यक्ति के परिजन उन्‍हें कंधा भी नहीं दे पाते हैं. कई बार इसकी‍ शिकायत की गई है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है.

भिवानी के गांव प्रेमनगर की तस्वीरें आधुनिक भारत को शर्मसार कर देंगी. सत्ता, सिस्टम और समाज को हिला कर रख देंगी. सोचने पर मजबूर कर देंगी कि क्या आज के आधुनिक भारत और नंबर वन कहलाने वाले हरियाणा के गांवों में ऐसे हालात भी हैं. लोग इतने मजबूर की मुर्दे तक को कंधा ना दे पाएं. देखिये भिवानी से दिल दहला देनी वाली और शर्मशार कर देने वाली ये तस्वीरें.ये नजारा किसी तालाब या खेतों में जलभराव का नहीं है. ना ही किसी नदी या नाले का है जिसे लोग पार कर रहे हों. ये नजारा है बवानीखेङा कस्बे के पास गांव प्रेमनगर के श्‍मशान घाट के रास्ते का. यहां कई दिनों से पानी भरा हुआ है और ये हालात हर साल महीनों तक रहते हैं. हर कोई चाहता है कि उसकी औलाद बुढापे में उसका सहारा बने और जब उसकी मौत हो तो उसकी औलाद व चाहने वाले उसे कंधा दें, लेकिन यहां लोग चाह कर भी अपनों की मौत पर उन्हे कंधा नही दे पा रहे

अपनों को कंधा ना दे पाने का कारण है श्‍मशान घाट को जाने वाले ये कच्चा और पानी से भरा रास्ता. बीती रात यहां 62 वर्षिय हवा सिंह की मौत हो गई. सुबह हवा सिंह के शव को श्‍मशाम घाट ले जाने का ये नजारा आपको सोचने पर मजबूर कर रहा होगा

आधुनिक भारत और नंबर वन कहलाने वाले हरियाणा के गांव का ये हाल देख आप सत्ता, सिस्टम व समाज पर सवाल जरूर करेंगें. सवाल यहां के लोग भी करते हैं. सरपंच से, अपने विधायक से और डीसी से. पर लोगों का आरोप है कि उनकी सुनने वाला कोई नहीं.

लोगों की माने तो यहां अक्सर मुर्दे गिरने या उनके अंतिम संस्कार में जाने वाले लोगों को गिरने व चोट लगने का डर बना रहता है. कई बार टेक्ट्रर जिसमें मुर्दे को ले जाया जाता है, उसके धंसने का भी डर रहता है.

पूर्व सरपंच संदीप कुमार ने बताया कि श्‍मशान घाट के रास्ते में जलभराव के चलते लोग मुर्दे को कंधा तक नहीं दे पाते. शायद अनुसूचित जाति के श्‍मशान घाट होने के चलते सरपंच, विधायक या डीसी तक समाधान करने में रुची नहीं लेते.वहीं मृतक हवा सिंह के भतीजे दर्शन सिंह और चचेरे भाई जगपाल ने बताया कि किसी की मौत होने पर मुर्दे को श्‍मशान घाट तक ले जाने के लिए ट्रैक्टर किराये पर लाना पड़ता है. ट्रैक्टर ना मिलने तक मुर्दे को घर पर ही रखना पड़ता है. पर वो चाह कर भी मुर्दे को कंधा नहीं दे पाते. इनका आरोप है कि इस बारे में सरपंच से लेकर डीसी व विधायक तक को अवगत करवाया गया लेकिन किसी ने कोई समाधान नहीं किया.

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