मजदूरी कर रही मैडल विजेता खिलाडी की मदद को आगे आये अभय चौटाला, हर महीने देंगे इतने रूपये

Advertisement

------------- Advertisement -----------

रोहतक। लॉकडाउन में जो खिलाड़ी दिहाड़ी करने पर मजबूर थी अब उसकी मदद को अनेक हाथ आगे आए हैं, जिससे खिलाड़ी की आंखें फिर से चमक उठी हैं। आत्मविश्वास से लबरेज वुशू खिलाड़ी का कहना है कि अब दिहाड़ी नहीं बल्कि देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है। यहां हम बात कर रहे हैं इंद्रगढ़ गांव की अंतराष्ट्रीय वुशू खिलाड़ी शिक्षा की।

56 किलोग्राम में खेलने वाली शिक्षा का सपना न केवल एशियन गेम्स बल्कि वर्ल्ड चैंपियनशिप में देश को सोना दिलाना है। बकौल शिक्षा वह एमडीयू, पीयू चंडीगढ में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी खेल चुकी है। वहीं, झारखंड, रांची, शिलांग, असम, मणिपुर, इंफाल, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश व छतीसगढ़ आदि राज्यों में राष्ट्रीय स्तर पर वुशू खेली है। इतना ही नहीं यह होनहार खिलाड़ी 24 बार स्टेट खेल कर गोल्ड जीत चुकी है, लेकिन उसे सरकारी नौकरी में अभी तक तवज्जो नहीं मिली है।

Advertisement

सोशल मीडिया पर हुई वायरल

दरअसल, लॉकडाउन में शिक्षा परिवार के साथ गांव में ही रह रही है। तीन भाई और दो बहनों में शिक्षा सबसे छोटी है। बाकी सभी शादीशुदा हैं। शिक्षा  व पिता प्यारे लाल के साथ गांव में रहती है। पिता बीमार रहते हैं। ऐसे में उनकी मां ही मजदूरी कर घर का खर्च चला रही है। महंगाई के दौर में गुजारा करना आसान नहीं है। अंतराष्ट्रीय खिलाड़ी ने मजदूरी करने से भी गुरेज नहीं किया। उनकी मजदूरी करते हुए तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो अनेक लोग मदद करने आगे आए।

खिलाड़ी की मदद को ये आए आगे

शिक्षा के मुताबिक मीडिया में आने के बाद अनेक लोग मदद को आगे आए हैं। जिनमें इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला ने हर माह दस हजार रुपये देने का वादा किया। उनकी राशि खाते में आ चुकी है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय धानक समाज संगठन की ओर से संस्थापक संदीप खटक, आरएम लडवाल, होशियार सिंह व सूरज देशराज आदि भी मदद को आगे आएं। वहीं, निजी अकादमी संचालक परिमल कुमार ने उनको नि:शुल्क कोचिंग देने का वादा किया है, जबकि सोनीपत से हर्ष छिकारा ने भी उनकी आर्थिक मदद की है।

2012 में की थी शुरुआत

शिक्षा ने वर्ष 2012 में वुशू की शुरुआत की थी। उन्होंने कोच प्रमोद कटारिया से इस खेल का ककहरा सीखा है। तब से लेकर अब तक 2 बार आल इंडिया, 7 नेशनल और 24 बार स्टेट खेलने वाली खिलाड़ी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा है। महारानी किशोरी जाट कन्या महाविद्यालय रोहतक से बीएससी स्पोटर्स साइंस की अंतिम वर्ष की छात्रा शिक्षा का कहना है कि मदद मिलने से उनके हौसलों को जैसे पंख लग गए हैं और अब वर्ल्ड चैंपियनशिप में देश को सोना जीतना की उनका लक्ष्य है।

Advertisement