दिल्ली एयरपोर्ट से 18 Km दूर अस्पताल में था हार्ट ट्रांसप्लांट, 17 मिनट में पहुंचाया गया ‘दिल’

ट्रांसप्लांट सर्जरी आसान काम नहीं है, ख़ास कर जब डोनर किसी दूसरी जगह पर हो और रिसीवर किसी दूसरी जगह. किसी भी ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए उस अंग को टाइम पर पहुंचाना सबसे बड़ा काम होता है क्योंकि अगर टाइम निकल गया तो वो अंग किसी काम का नहीं रहता. कई केसे में इस कारण लोगों की मृत्यु भी हो जाती है.

जयपुर में एक 16 साल के लड़का का रोड एक्सीडेंट हुआ और डॉक्टर्स ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया. ‘ब्रेन डेड’ यानी व्यक्ति के बाकी अंग तो काम करते हैं लेकिन दिमाग नहीं. इस बच्चे के परिवार वालों ने अपने बेटे के अंग दान का फ़ैसला लिया और उसका दिल, दिल्ली स्थित एक हॉस्पिटल में एक 45 वर्षीय शख्स को लगाने के लिए चुना गया.

दिल्ली में चल रही इस हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए दिल का टाइम पर आना बेहद ज़रूरी था, वरना ट्रांसप्लांट नहीं हो पाता. लेकिन इस ‘दिल’ को न केवल टाइम से जयपुर से दिल्ली लाया गया बल्कि सिर्फ़ 17 मिनटों में दिल्ली एयरपोर्ट से अस्पताल पहुंचाया गया.


दिल्ली जैसे शहरों में एम्बुलेंस को रास्ता देने को लेकर जागरूकता भले ही है लेकिन भीड़-भाड़ और ट्रैफ़िक की वजह से कई बार एम्बुलेंस भी ट्रेफ़िक में फंस जाती है, नतीजन मरीज़ टाइम पर अस्पताल नहीं पहुंच पाता. इस केस में जिस तरह से अधिकारियों ने काम किया, वो काबिले-तारीफ़ है.

जयपुर के उस 16 साल के लड़के का दिल पहले चार्टर्ड प्लेन से दिल्ली एयरपोर्ट लाया गया, फिर एयरपोर्ट से साउथ दिल्ली के मैक्स अस्पताल के 18 किलोमीटर के रास्ते को ग्रीन कॉरिडोर में तब्दील किया गया. और सिर्फ़ 17 मिनटों में ऑर्गन को मरीज़ तक पहुंचा दिया गया.

यह करना बिलकुल भी आसान नहीं था, क्योंकि जिस वक़्त ऑर्गन को लाया गया, उस समय एयरपोर्ट से साउथ दिल्ली की तरफ़ बहुत ट्रेफ़िक रहता है, साथ ही दिवाली के कारण लोग ख़रीदारी करने घरों से बाहर भी निकल रहे हैं. इन चुनौतियों के बावजूद अधिकारियों ने तत्परता दिखा कर ऑर्गन को समय पर पहुंचा दिया.

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