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Haryana RTE Admissions Warning : मनमानी करने वाले निजी स्कूलों पर गिरेगी गाज, जानिए शिक्षा विभाग ने क्या सख्त चेतावनी की जारी

Haryana RTE Admissions Warning

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आरटीई दाखिलों में गड़बड़ी और अभिभावकों की शिकायतों के बाद हरियाणा शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों को सख्त चेतावनी दी है, जबकि प्रवेश प्रक्रिया की निगरानी के लिए विशेष ऑनलाइन पोर्टल किया गया शुरू

Haryana RTE Admissions Warning

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Written by Kajal Panchal • Published on : 6 May 2026

Haryana RTE Admissions Warning : हरियाणा में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत दाखिलों को लेकर सरकार ने निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कोई निजी स्कूल बिना वैध कारण के आरटीई के तहत बच्चों को प्रवेश देने से मना करता है, तो उसके खिलाफ मान्यता रद्द करने जैसी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

राज्य सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए हरियाणा के निजी स्कूलों में कुल 21,752 छात्रों को सीटें आवंटित की हैं। विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि 9 मई तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। हालांकि इसके बावजूद कई अभिभावकों ने शिकायत की है कि कुछ निजी स्कूल दाखिले में देरी कर रहे हैं या अनुचित कारणों का हवाला देकर प्रवेश देने से इनकार कर रहे हैं।

अभिभावकों की शिकायतों के बाद विभाग हुआ सख्त

शिक्षा विभाग के अनुसार, हेल्पलाइन नंबर, ईमेल और अन्य माध्यमों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं। शिकायतों में कहा गया है कि कई स्कूल आरटीई नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं और जानबूझकर दाखिले रोक रहे हैं।

Haryana RTE Admissions Warning

निदेशालय ने कहा कि ऐसे मामले आरटीई अधिनियम का उल्लंघन हैं और इन्हें बेहद गंभीरता से लिया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना दस्तावेजी और वैध कारण के किसी भी बच्चे का प्रवेश अस्वीकार करना कानून के खिलाफ माना जाएगा।

पारदर्शिता के लिए शुरू किया गया विशेष पोर्टल

आरटीई दाखिलों की निगरानी के लिए शिक्षा विभाग ने एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है। इस पोर्टल के जरिए हर आवंटित छात्र की स्थिति पर नजर रखी जाएगी।

Haryana RTE Admissions Warning

निजी स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रत्येक छात्र की प्रवेश स्थिति “स्वीकृत” या “अस्वीकृत” के रूप में पोर्टल पर अपडेट करें। यदि किसी छात्र का प्रवेश अस्वीकार किया जाता है, तो स्कूल को उसका उचित कारण भी दर्ज करना होगा। विभाग ने कहा है कि अस्वीकृति के कारण आरटीई नियमों और सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार होने चाहिए, न कि मनमाने ढंग से।

पड़ोस नियम बना विवाद की वजह

नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस के अध्यक्ष Kulbhushan Sharma ने कहा कि प्रवेश अस्वीकृति के पीछे सबसे बड़ा कारण पड़ोस (Neighbourhood) नियम है। उन्होंने बताया कि पहले विभाग ने 0-1 किलोमीटर और 1-3 किलोमीटर के दायरे में आने वाले छात्रों के लिए संयुक्त चयन प्रक्रिया लागू की थी। बाद में जारी स्पष्टीकरण में कहा गया कि 1-3 किलोमीटर के दायरे वाले छात्रों को प्रवेश देना स्कूलों के लिए स्वैच्छिक होगा। इस बदलाव के कारण कई अभिभावकों और स्कूलों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई। बड़ी संख्या में अभिभावकों ने पहले ही आवेदन कर दिए थे, जिसके बाद अब विवाद बढ़ता दिखाई दे रहा है।

आरटीई कानून क्या कहता है?

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