हरियाणा सरकार ने हर DC को DM बनाने सम्बन्धी नोटिफिकेशन जारी की

चंडीगढ – वर्षो से हम सब यही पढ़ते और सुनते आए हैं कि हर ज़िले का डी.सी. (उपायुक्त) अपने ज़िले का कलेक्टर और डी.एम.,(ज़िलाधीश) भी होता है. परन्तु  कानूनी तौर पर ऐसा नहीं है अर्थात डी.सी. अपने ज़िले का पदेन (अपने पद के कारण) ही डी.एम. नहीं होता है।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि अक्तूबर, 2017 में जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक  संवैधानिक बेंच के निर्णय-अजैब सिंह बनाम गुरबचन सिंह (फरवरी, 1965) का अध्ययन किया,  तो उन्हें  स्पष्ट हुआ कि राज्य सरकार द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता (सी.आर.पी.सी.) ,1973 की धारा 20 (1) के तहत आदेश/नोटिफिकेशन जारी होने के पश्चात ही डी.सी. अपने ज़िले के डी.एम. के तौर पर कानूनी रूप पर से कार्य कर सकता है और अगर इसके बगैर वह ऐसा करता है तो डी.एम. के तौर पर उसके द्वारा पारित आदेशो एवं की गयी कार्यवाही की कोई कानूनी मान्यता एवं वैधता नहीं होगी. ज्ञात रहे कि सी.आर.पी.सी. की धारा 144 में कर्फ्यू और लॉकडाउन संबंधी सभी आदेश और निर्देश भी डी.सी. द्वारा जिलाधीश के तौर पर ही जारी किए जाते हैं।

हेमंत ने बताया कि जब उन्हें हरियाणा सरकार द्वारा  राज्य के हर उपायुक्त को वैधानिक एवं आधिकारिक तौर पर अर्थात सी.आर.पी.सी. की  धारा 20(1) में अपने सम्बंधित ज़िले के ज़िलाधीश के रूप में पदांकित करने सम्बंधित  जारी आदेश या अधिसूचना नहीं प्राप्त हुई तो आज से अढ़ाई  वर्ष पूर्व दिसम्बर, 2017 में उन्होंने इस मुद्दे पर सर्वप्रथम एक आर.टी.आई. हरियाणा सरकार के न्याय-प्रशासन विभाग में दायर कर हरियाणा में डी.सी. को डी.एम. के रूप में पदांकित करने सम्बन्धी  नोटिफिकेशन की कॉपी की मांग की जिसे उक्त विभाग ने  जनवरी, 2018 में प्रदेश के सभी 22 जिलो के उपायुक्तों  को भेज उन सभी को उक्त सूचना याचिकाकर्ता को  उपलब्ध करवाने एवं इस बारे में विभाग को भी सूचित  करने को कहा. इसी के साथ हेमंत ने एक और आर.टी.आई. मुख्य सचिव कार्यालय के कार्मिक विभाग में भी दायर की जिसमे उन्हें जनवरी 2018 में सीधा जवाब दे दिया गया कि उनके रिकॉर्ड में ऐसी कोई नोटिफिकेशन  उपलब्थ नहीं है.

जब अप्रैल, 2018 तक राज्य के सभी उपायुक्तों से उक्त अधिसूचना की प्रति प्राप्त नहीं हुई, तो हेमंत ने एक और आर.टी.आई. न्याय प्रशासन विभाग में अप्रैल, 2018 में दायर की जिसमे उन्होंने फरवरी, 1965 के सुप्रीम कोर्ट के उक्त निर्णय का हवाला भी दिया जिसके जवाब में विभाग  ने आज से ठीक दो वर्ष पहले 14 मई, 2018 को अंतरिम जवाब में यह सूचित किया गया कि यह मामला राज्य सरकार के पास विचाराधीन है और निर्णय होते ही उन्हें सूचना प्रदान कर दी जायेगी. तब से बीते दो वर्षो से  जब जब उन्होंने इस बारे में पूछताछ की, तो बताया गया कि यह मामला गृह सचिव के अधीन न्याय प्रशासन विभाग और मुख्य सचिव के कार्मिक विभाग के मध्य लटका रहा कि ऐसी नोटिफिकेशन दोनों में से कौन जारी करेगा।

बहरहाल बीती 11 मई 2020 को हरियाणा सरकार के न्याय-प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजय वर्धन, आईएएस द्वारा एक गजट नोटिफिकेशन जारी कर सी.आर.पी.सी. की धारा 20(1) में प्रदेश में हर ज़िले के डिप्टी कमिश्नर (उपायुक्त ) के पद पर तैनात अधिकारियों को सी.आर.पी.सी. 1973 की धारा 20(1) में कार्यकारी मजिस्ट्रेट एवं अपने सम्बंधित ज़िले का जिला मजिस्ट्रेट (ज़िलाधीश) नियुक्त किया है जब तक वह अपने ज़िले का उपायुक्त  रहेगा.

हालांकि हेमंत का मानना है कि चूँकि ताज़ा नोटिफिकेशन बीती 12 मई को हरियाणा सरकार के गजट (राजपत्र ) में प्रकाशित हुई है इसलिए यह उसी दिन से प्रभावी होगी अर्थात 12 मई से पहले हरियाणा में हर ज़िले में तैनात उपायुक्तों द्वारा अपने ज़िले के जिलाधीशों के तौर पर जो भी कार्यवाही की गयी हैं  एवं जो भी आदेश एवं निर्देश पारित किये गए हैं , उन्हें कानूनी मान्यता देने की भी आवश्यकता होगी.

ज्ञात रहे कि हेमंत की ही आर.टी.आई. एवं अन्य  प्रयासों के कारण ही 18 जून, 2018 को पंजाब के राज्यपाल, जो  यू.टी. चंडीगढ़ के प्रशासक भी है, ने चंडीगढ़ के डी.सी. को डी.एम. पदांकित करने के लिए गजट अधिसूचना जारी की थी जिसे उसी वर्ष 18 दिसंबर 2018 को संशोधित रूप में पुन: जारी किया गया. पड़ोसी राज्य पंजाब ने हालाकि आज से साढ़े छः वर्ष पहले जनवरी, 2014 में ऐसी नोटिफिकेशन जारी की थी, जिसे पॉवर नोटिफिकेशन के नाम से जाना जाता है.

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