Haryana Criminal Database : हरियाणा पुलिस ने संगठित अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क पर लगाम लगाने के लिए एक नई हाईटेक रणनीति अपनाई है। राज्यभर के 10,892 जघन्य अपराधियों की डिजिटल कुंडली तैयार की गई है, जिसमें उनके आपराधिक इतिहास से लेकर वर्तमान गतिविधियों और संपर्कों तक की पूरी जानकारी दर्ज की गई है। पुलिस का दावा है कि इस डेटा-आधारित निगरानी प्रणाली की मदद से अपराध होने से पहले ही संभावित खतरों की पहचान कर कार्रवाई करना आसान होगा।
Written by Kajal Panchal • Published on : 3 June 2026
IBN24 News Network : यह जानकारी पुलिस महानिदेशक (DGP) अजय सिंघल की अध्यक्षता में पंचकूला में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान सामने आई। बैठक में रोहतक, झज्जर, सोनीपत और फरीदाबाद में कार्यरत विशेष आरजेएसएफ (RJSF) यूनिट की उपलब्धियों और कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई।
अपराधियों का तैयार किया गया पूरा डिजिटल प्रोफाइल
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तैयार किए गए डेटाबेस में अपराधियों का आपराधिक रिकॉर्ड, सामाजिक पृष्ठभूमि, आपसी संपर्क, वर्तमान गतिविधियां और संभावित गैंग नेटवर्क की जानकारी शामिल की गई है।
अपराधियों को अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत कर उनका जोखिम स्तर भी तय किया गया है। इससे पुलिस को यह पता लगाने में मदद मिल रही है कि कौन दोबारा अपराध कर सकता है और किन लोगों के गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़ने की आशंका अधिक है।
सिर्फ अपराधी नहीं, संभावित गैंग सदस्य भी निगरानी में
हरियाणा पुलिस की यह पहल केवल सक्रिय अपराधियों तक सीमित नहीं है। आरजेएसएफ यूनिट ऐसे युवाओं और छोटे अपराधियों पर भी नजर रख रही है, जिन्हें गैंगस्टर गिरोह अपने नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश कर सकते हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपराध होने के बाद कार्रवाई करने की बजाय अपराध की संभावना को पहले ही खत्म करना अधिक प्रभावी रणनीति है।
रोहतक से शुरू हुआ था पायलट प्रोजेक्ट
यह मॉडल सबसे पहले रोहतक जिले में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया था। सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद इसे झज्जर, सोनीपत और फरीदाबाद तक विस्तारित किया गया।
अब हरियाणा पुलिस इस मॉडल को राज्य के अन्य जिलों में भी लागू करने की तैयारी कर रही है।
तकनीक और इंटेलिजेंस का संयुक्त इस्तेमाल
अपराधियों की निगरानी के लिए पुलिस आधुनिक तकनीक, फील्ड इंटेलिजेंस और मानव स्रोतों का संयुक्त उपयोग कर रही है। विशेष टीमें लगातार अपराधियों के पते, संपर्क और गतिविधियों की जानकारी जुटा रही हैं।
पुलिस का कहना है कि इस प्रणाली की मदद से कई मामलों के खुलासे और अपराध नियंत्रण में सफलता मिली है।
STF की बड़ी कार्रवाई, 3 साल में 941 गैंगस्टर गिरफ्तार
बैठक में हरियाणा स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की उपलब्धियों का भी ब्यौरा प्रस्तुत किया गया। आंकड़ों के अनुसार:
इस प्रकार पिछले तीन वर्षों में कुल 941 गैंगस्टर और उनके सहयोगियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
विदेशों से भी लाए गए वांछित गैंगस्टर
हरियाणा STF ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कार्रवाई तेज की है। अब तक 22 वांछित गैंगस्टरों को विदेशों से डिपोर्ट या प्रत्यर्पित कर भारत लाया जा चुका है।
सिर्फ वर्ष 2026 में ही 9 गैंगस्टरों की वापसी सुनिश्चित की गई है। इसके अलावा 14 अन्य वांछित अपराधी विभिन्न देशों में हिरासत में हैं और उन्हें भारत लाने की प्रक्रिया जारी है।
क्या अपराध होने से पहले लगेगी रोक ?
हरियाणा पुलिस का मानना है कि डिजिटल प्रोफाइलिंग, तकनीकी निगरानी और इंटेलिजेंस आधारित कार्रवाई की मदद से अपराधियों की गतिविधियों पर पहले से नजर रखी जा सकेगी। इससे न केवल सक्रिय अपराधियों पर दबाव बढ़ेगा, बल्कि गैंगस्टर नेटवर्क में नए लोगों की भर्ती को भी रोका जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल पूरे राज्य में प्रभावी ढंग से लागू हुआ, तो यह पारंपरिक पुलिसिंग से आगे बढ़कर “अपराध होने से पहले रोकथाम” की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। हालांकि इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पुलिस इस विशाल डेटा का उपयोग कितनी प्रभावी तरीके से कर पाती है।
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