Haryana Animal Vaccination Crisis : हरियाणा में पशुओं के टीकाकरण अभियान के बीच संसाधनों की भारी कमी सामने आई है। पशुपालन विभाग द्वारा लाखों पशुओं के वैक्सीनेशन का लक्ष्य तय किया गया है, लेकिन नीडल और सीरिंज की उपलब्धता बेहद कम होने के कारण पूरा अभियान संकट में पड़ता नजर आ रहा है। स्थिति यह है कि जहां करीब 4 लाख पशुओं को टीका लगाया जाना है, वहीं विभाग के पास केवल 80 हजार नीडल और 80 हजार सीरिंज ही उपलब्ध हैं।
Written by Kajal Panchal • Published on : 1 June 2026
IBN24 News Network : विशेषज्ञों और पशु स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि इतनी बड़ी कमी के बीच सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीनेशन करना बड़ी चुनौती बन गया है। साथ ही एक ही नीडल या सीरिंज के बार-बार इस्तेमाल से संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है।
4 लाख पशुओं के लिए चाहिए 4 लाख नीडल-सीरिंज
पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार सिरसा जिले में लगभग 4.72 लाख पशु हैं, जिनमें गाय और भैंस शामिल हैं। इनमें से करीब 4 लाख पशुओं को मुंहखुर और गलघोंटू जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए वैक्सीनेट किया जाना है।
नियमों के अनुसार प्रत्येक पशु के लिए अलग नीडल और सीरिंज का इस्तेमाल होना चाहिए। ऐसे में 4 लाख पशुओं के वैक्सीनेशन के लिए कम से कम 4 लाख नीडल और 4 लाख सीरिंज की आवश्यकता है।
लेकिन विभाग द्वारा अब तक केवल 80 हजार नीडल और 80 हजार सीरिंज ही उपलब्ध करवाई गई हैं।
3.20 लाख नीडल और सीरिंज की कमी
यदि उपलब्ध संसाधनों और लक्ष्य की तुलना करें तो विभाग के सामने भारी कमी की स्थिति है।
- जरूरत: 4 लाख नीडल और 4 लाख सीरिंज
- उपलब्ध: 80 हजार नीडल और 80 हजार सीरिंज
- कमी: 3.20 लाख नीडल और 3.20 लाख सीरिंज
यानी कुल आवश्यकता का केवल 20 प्रतिशत सामान ही फील्ड में पहुंच पाया है, जबकि 80 प्रतिशत संसाधनों की कमी बनी हुई है।
गांवों में बेहद कम पहुंच रही सामग्री
फील्ड में तैनात वीएलडीए और पशु चिकित्सकों के अनुसार कई गांवों में 1000 पशुओं के मुकाबले केवल 30 से 40 नीडल और 30 से 40 सीरिंज ही पहुंचाई गई हैं।
ऐसे में वैक्सीनेशन अभियान को सुचारू रूप से चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। कई पशु स्वास्थ्य कर्मियों को अपने स्तर पर नीडल और सीरिंज खरीदने तक की नौबत आ गई है।
बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा
नीडल और सीरिंज की कमी के कारण सबसे बड़ी चिंता संक्रमण फैलने के खतरे को लेकर है।
पशु स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि यदि किसी एक पशु में इस्तेमाल की गई नीडल या सीरिंज को दूसरे पशु में लगाया जाता है तो संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ सकती है। खासकर मुंहखुर और अन्य संक्रामक बीमारियों के मामलों में यह स्थिति गंभीर साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार वैक्सीनेशन अभियान में एक ही नीडल का बार-बार इस्तेमाल करना सुरक्षित प्रक्रिया नहीं माना जाता।
वैक्सीनेशन अभियान पर पड़ा असर
नीडल और सीरिंज की कमी को लेकर फील्ड स्टाफ में भी नाराजगी देखने को मिली है। सूत्रों के अनुसार वीएलडीए और उनकी यूनियन ने शुरुआत में इसका विरोध किया था और कुछ दिनों तक वैक्सीनेशन प्रक्रिया भी प्रभावित रही।
हालांकि विभाग लगातार अभियान पूरा करने का दबाव बना रहा है।
अतिरिक्त बजट की मांग भेजी गई
सिरसा के डिप्टी डायरेक्टर (डीडी) सुखविंद्र सिंह के अनुसार विभाग ने शुरुआत में 40-40 हजार नीडल और सीरिंज खरीदी थीं। बाद में इतनी ही संख्या में दोबारा सामग्री उपलब्ध करवाई गई।
उन्होंने बताया कि अतिरिक्त खरीद के लिए एक लाख रुपये के बजट की मांग भेजी गई है। बजट स्वीकृत होने के बाद नई नीडल और सीरिंज खरीदकर फील्ड में उपलब्ध करवाई जाएंगी।
लोकल खरीद की दी गई अनुमति
विभाग ने सभी पशु चिकित्सकों (VS) और वीएलडीए को निर्देश दिए हैं कि यदि उनके क्षेत्र में नीडल और सीरिंज की कमी हो तो वे स्थानीय स्तर पर खरीद कर सकते हैं। बजट जारी होने के बाद विभाग उनकी राशि वापस करेगा।
पशुपालकों की बढ़ी चिंता
मुंहखुर और गलघोंटू जैसी बीमारियां पशुओं के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती हैं। ऐसे में समय पर और सुरक्षित टीकाकरण जरूरी है।
लेकिन नीडल और सीरिंज की भारी कमी ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। यदि जल्द पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए तो लाखों पशुओं के स्वास्थ्य पर इसका असर पड़ सकता है।
क्या समय पर पूरा हो पाएगा अभियान ?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब 4 लाख पशुओं के वैक्सीनेशन के लिए केवल 80 हजार नीडल और सीरिंज उपलब्ध हैं, तो क्या विभाग तय समय में सुरक्षित तरीके से टीकाकरण अभियान पूरा कर पाएगा?
अब सभी की नजर विभाग द्वारा भेजी गई अतिरिक्त बजट मांग और नई खरीद प्रक्रिया पर टिकी हुई है।
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