हरियाणा में अब फसेंगी जीएसटी चोरी की बड़ी मछलियां, सरकार करने जा रही ये कार्रवाई

चंडीगढ़। हरियाणा में सौ करोड़ से ज्यादा जीएसटी घोटाले के मामले सामने आये हैं और उनसे करोड़ों की जीएसटी भी वसूल करने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। लेकिन प्रदेश में में अभी भी कईं बड़ी मछलियों पर शिकंजा कसा जाना बाकी है। मामले को लेकर प्रदेश के गृहमंत्री अनिल विज बेहद ही गंभीर है। जीएसटी घोटाले में आने वाले वक्त में अभी और भी गिरफ्तारियां व बड़ी मछलियों पर शिकंजा कसना बाकी है।

पूरे मामले में दो सौ से ज्यादा एफआईआर हुई थीं लेकिन मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ था। उक्त पूरे मामले को कुछ लोगों ने गृहमंत्री के सामने रखा था। विज पूरे मामले में उस वक्त हैरान रह गए थे जब बता लगा कि खुद मुख्यमंत्री कड़ी कार्रवाई के लिए साफ निर्देश लिखित में दे चुके थे लेकिन नतीता ढाक के तीन पात रहा था।

पुलिस और क्राइम ब्रांच के अफसरों द्वारा लगभग 90 गिरफ्तारी करने व कार्रवाई में तेजी लाने के बाद से आरोपितों में हड़कंप मचा हुआ है। यहां पर उल्लेखनीय है कि हरियाणा के सभी जिलों में जीएसटी रिफंड के नाम पर कईं जिलों में जमकर खेल हुआ था। जिनमें पानीपत सबसे टाप पर था। सिरसा, फतेहाबाद, अंबाला यमुनानगर अन्य कईं जिलों में सूबे के विभिन्न जिलों में 222 एफआईआआर दर्ज हुई थी।

बता दें कि राज्य में 2017 से लेकर 2020 तक सभी जिलों में दर्ज हुई एफआईआर पर गौर करें, तो पंचकूला में एक, गुरुग्राम में दस, फरीदाबाद में 24, अंबाला 21, यमुनानगर 9, कुरुक्षेत्र में 2, करनाल झज्जर, मेवात पलवल में कोई नहीं। कैथल में 3, पानीपत में सबसे ज्यादा 51 मामले दर्ज किए हैं, जबकि रोहतक में 10, सोनीपत में 9, भिवानी में 5, दादरी में 1, हिसार में 12, हांसी 4, जींद में दस मामले, सिरसा में 25 मामले, फतेहाबाद में 21, रेवाडी 3, नारनौल में एक केस दर्ज किया गया। इस तरह से कुल मिलार 222 केस दर्ज किए गए थे।

विज के आफिस की ओऱ से प्रदेश डीजीपी और डीजी क्राइम को तुरंत एक्शन के लिए लिखा था। चौकाने वाले बात यह थी कि अब से पहले 2017 के बाद से लेकर तीन साल में कोई प्रगति रिपोर्ट और गिरफ्तारी तक नहीं हो सकी है। जिसके कारण आरोपितों को इस बात का कतई अंदाज नहीं था कि पुलिस इतने समय के बाद में शिकंजा कसने का काम कर सकती है। अब इस कार्रवाई के बाद में इन लोगों में हड़कंप मया हुआ है।

गृहमंत्री अनिल विज ने पूछे जाने पर शुक्रवार को कहा कि जीएसटी रिफंड में करोडो़ं की हेराफेरी में एक भी आरोपित को बख्शा नहीं जाएगा। विज का कहना है कि कोई कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति क्यों नहीं हो, पूरे मामले में 222 एफआईआर विभिन्न थानों में दर्ज है।

जीएसटी फर्जी चालान बिल घोटाले में शामिल फर्जी फर्मों के 4 प्रमुख गिरोह और फर्मो पर कार्रवाई की गई थी। धोखाधड़ी के माध्यम से 464.12 करोड़ से अधिक की राशि का गोलमाल कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया। यहां पर यह भी याद रहे कि पुलिस ने 112 करोड़ से अधिक की रिकवरी कर जाली जीएसटी आइडंटिफिकेषन नंबरों का खुलासा कर लिया है। क्राइम ब्रांच की ओऱ से फिलहाल 72 पुलिस मामले दर्ज हुए हैं, जिसमें 89 अभियुक्तों को गिरफ्तारी हो चुकी है।

इस फर्जीवाड़ॉे में फर्जी ई-वे बिल (कंसाइनमेंट ट्रांसपोर्ट करने के लिए जीएसटी से संबंधित चालान) के माध्यम से माल की वास्तविक आपूर्ति के बिना कई फर्मों और कंपनियों को फर्जी चालान जारी किए और जीएसटीआर-3 बी फार्म के माध्यम से जीएसटी पोर्टल पर फेक इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) किए। यह भी खुलासा हुआ कि फर्जी जीएसटी चालान, ई-वे बिल और जाली बैंक लेनदेन की मदद से इन गिरोह द्वारा करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की गई है।

डीजीपी और डीजी क्राइम मोहम्मद अकील और उनकी पूरी टीम को सराहना की है, साथ ही आने वाले वक्त में कार्रवाई जारी रखने की बात कही है। यादव ने कहा कि अपराध शाखा मधुबन (करनाल इकाई) पहले ही गोविंद और उसके सहयोगियों को 44.79 करोड़ रुपये के फर्जी चालान घोटाले के 21 मामलों में गिरफ्तार कर चुकी है। आरोपी ने अपने सहयोगियों सहित बिला काॅटन व अन्य माल सप्लाई के फर्जी चालान बिल और ई-वे बिल के आधार पर फर्जी आईटीसी क्लेम लिया। इस मामले में क्राइम ब्रांच करनाल यूनिट ने अब तक 37.55 करोड़ की वसूली की है।‎

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