तेलंगाना के Green Hero जिन्हें लोग ‘पागल’ कहते थे, लगा दिए 1 करोड़ से ज्यादा पेड़

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इंसान ने जैसे-जैसे तरक्की की, उसने सबसे ज़्यादा नुकसान पृथ्वी को पहुंचाया, जंगल के जंगल साफ़ हो गए, मिट्टी को नुकसान पहुंचाया गया. हालांकि, कुछ लोग थे जिन्होंने इसका संज्ञान लिया और अपने ही दम पर धरती को वापस हरा बनाने की कोशिश में लगे हैं. ऐसा ही एक नाम है दारिपल्ली रामैया (Daripalli Ramaiyah). तेलंगाना के खम्माम ज़िले के रहने वाले दरिपल्ली रामैया को यहां के लोग ‘वनजीवी रामैया’ या तेलुगु में Chetla Ramaiah बुलाते हैं क्योंकि वो अब तक इस ज़िले में 1 करोड़ से ज़्यादा पेड़ लगा चुके हैं.

इस काम के लिए उन्हें भारत सरकार की तरफ़ से 2017 पद्मश्री सम्मान दिया गया. 1995 में उन्हें सेवा अवॉर्ड दिया गया था. जिस साल उन्हें ये अवॉर्ड मिला, उससे पहले तक लोग उन्हें पागल कहा करते थे, लेकिन इसके बाद उनके प्रति लोगों का रवैया बदल गया.

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72 साल के रामैया जहां भी जाते हैं, अपनी पॉकेट में बीज ज़रूर रखते हैं. पिछले 50 साल से जंगल संरक्षण का काम कर रहे रामैया ने पेड़ लगाने की शुरुआत एक प्लांटेशन ड्राइव में की. यहां वो अपनी पत्नी के साथ गए थे और फिर जो सिलसिला शुरू हुआ, वो आज तक नहीं रुका है. उनकी पत्नी जन्ममा के साथ वो अब तक छांव देने वाले और फलों के पेड़ लगा चुके हैं.

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पेड़ों को और करीब से जानने और उनके बारे में समझने के लिए रमैया ने कई किताबें भी पढ़ीं, जबकि वो ज़्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं. शायद ये पेड़ों के संरक्षण के प्रति उनका जूनून ही था, जो वो उनके लिए इस हद तक चले गए. उन्हें जहां-कहीं भी थोड़ी बहुत जगह दिखती है, वो पेड़ लगा देते हैं. पॉकेट में बीज लेकर चलना उनकी आदत में शुमार हो चुका है. वो अपनी साइकिल में भी पौधे लगा कर रखते हैं.

इतने साल जो उन्होंने मेहनत की, उसका एक नतीजा ये रहा किजहां कभी पहले दलदल हुआ करते थे, वहां अब हरे-भरे जंगल बन चुके हैं. उन्हें मदद के लिए जो थोड़ा-बहुत मदद लोगों से मिलती है, उसे वो बीज ख़रीद लेते हैं और ऐसे करते-करते एक बढ़िया नर्सरी बना चुके हैं. यहां उगाये पौधों को वो फ़्री में लोगों को देते हैं ताकि वो पौधरोपण कर सकें.

जो काम दरिपल्ली रामैया कर रहे हैं, वो आसान नहीं है. न ही हर कोई उसे कर सकता है. उम्र के इस पड़ाव पर न उनका जज़्बा कम हुआ, न ही इच्छाशक्ति. उनके जैसे कुछ और भी ग्रीन हीरोज़ भी हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के पृथ्वी की सेवा में लगे हुए हैं.

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