सरकार की बढ़ी मुश्किलें ? अब किसान आंदोलन के साथ शुरू होगा ये दूसरा आंदोलन, चेतावनी…….

रोहतक। हरियाणा में एक तरफ किसान अपनी मांगो को लेकर 46 दिनों से आंदोलन कर रहे है। लगातार किसानों और सरकार के बीच बातचीत भी हो रही है उसके बाद भी कोई हल निकलता नहीं दिखाई दे रहा है। तो वहीं दूसरी तरफ एक बार फिर सरकार की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही है। जहा एक तरफ अभी सरकार किसानों के विरोध का सामना कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ अब हरियाणा के अध्यापको ने आंदोलन करने का संकेत दे दिया है।

बताना लाजमी है कि हरियाणा विद्यालय के अध्यापक संघ के आह्वान पर अध्यापक 13-14 जनवरी को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 व तीनों कृषि कानूनों की अपने-अपने विद्यालयों व घरों में प्रतियां फूंक कर लोहड़ी व मकर सक्रांति का त्योहार मनाएंगे। यह घोषणा हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के राज्य कन्वेंशन में की गई। कन्वेंशन की अध्यक्षता करते हुए संघ के राज्य प्रधान सीएन भारती ने घोषणा करते हुए कहा कि यदि बातचीत द्वारा हरियाणा सरकार व शिक्षा विभाग के मुद्दों का सकारात्मक हल नहीं निकालते तो आंदोलन शुरू किया जाएगा। जिसके तहत 27 जनवरी से 28 फरवरी तक संघ खंड स्तरीय प्रदर्शन करेगा।

मार्च में जिला स्तरीय प्रदर्शन करते हुए अप्रैल में राज्य स्तरीय रैली की जाएगी। जिसकी तैयारी के लिए 17 से 20 जनवरी तक सभी 22 जिलों में अध्यापक कार्यकर्ताओं की बैठकें की जाएगी। तो वहीं दूसरी तरफ अध्यापक संघ के संगठन सचिव धर्मेंद्र ढांडा व कोषाध्यक्ष राजेंद्र बाटू ने कहा कि प्रशिक्षण प्रदान करने के सरकारी संस्थानों में दाखिले पूर्ण पर बंद कर दिए हैं। जबकि प्राइवेट संस्थानों की बाढ़ आ चुकी है। मॉडल संस्कृति स्कूलों के नाम पर शिक्षा अधिकार अधिनियम का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हरियाणा शिक्षा बोर्ड को भी समाप्त किया जा रहा है।

कार्यक्रम में राज्य सचिव सतबीर गोयत व अलका सिवाच ने कहा कि स्कूल मुखिया के 50 प्रतिशत से अधिक पद वर्षों से रिक्त पड़े हुए हैं। सभी वर्गों की पदोन्नति सूचियां लंबे समय से लंबित हैं । बतादें कि राज्य प्रधान सीएन भारती ने कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार उदारीकरण, वैश्वीकरण व निजीकरण की नीतियों को तीव्र गति से आगे बढ़ाते हुए श्रम कानूनों में संशोधन, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं तीन कृषि कानून बनाकर देश को चंद पूंजीपतियों के हवाले कर रही है।

जनता के विरोध को अस्वीकार करते हुए पूंजी पतियों के साथ खड़ी है। उन्होंने बताया कि सरकार ने देश के तमाम सार्वजनिक उपक्रमों जैसे रेल, हवाई अड्डे, शिक्षण संस्थाएं, कोयला व बिजली आदि को बेचकर देश में बेकारी व बेरोजगारी को विभत्स रूप प्रदान करने का काम किया है। 15 मार्च से खंड स्तरीय सम्मेलन एवं चुनाव होंगे। इनमें भी शिक्षा नीति का विरोध किया जाएगा।

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