चीनी जासूसी के मामले में सरकार ने उठाया ये बड़ा कदम, एक महीने में होगा खुलासा

नई दिल्ली: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के दस हजार से अधिक प्रमुख लोगों की चीन की ओर से जासूसी कराए जाने के मामले में केंद्र सरकार की ओर से बड़ा कदम उठाया गया है। सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी से एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है। देश के एक प्रमुख अंग्रेजी दैनिक में पिछले दिनों में इस मामले का खुलासा किया था जिससे हड़कंप मच गया था।

30 दिनों में रिपोर्ट देगी विशेषज्ञ कमेटी

जानकार सूत्रों ने बताया कि  लीक मामले को लेकर सरकार काफी गंभीर है। सरकार ने इस संबंध में रिपोर्टों का अध्ययन करने, उनका मूल्यांकन करने और कानून के उल्लंघन का पता लगाने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है और इस समिति से 30 दिनों में रिपोर्ट देने को कहा गया है। सूत्रों के मुताबिक सरकार की ओर से इस बात पर चिंता जताई गई है कि विदेशी सोर्स बिना किसी सहमति के देश के नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा तक अपनी पहुंच बना रहे हैं।

राजदूत को बुलाकर जताया था विरोध

देश की प्रमुख हस्तियों की जासूसी के मामले को विदेश मंत्रालय की ओर से चीनी राजदूत के सामने भी उठाया गया था मगर इस मामले में चीन की सरकार ने अपना पल्ला झाड़ लिया। चीन की ओर से विदेश मंत्रालय को स्पष्ट किया गया है कि जेनहुआ निजी कंपनी है और कंपनी की ओर से भी अपनी स्थिति स्पष्ट की जा चुकी है।

चीनी कंपनी के निशाने पर कई प्रमुख हस्तियां

उल्लेखनीय है कि देश के प्रमुख अंग्रेजी दैनिक ने पिछले दिनों अपनी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया था कि चीन की सरकार और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ी एक टेक्नालॉजी कंपनी जेनहुआ ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित देश की कई अन्य प्रमुख हस्तियों की जासूसी की है।

अखबार की ओर से यह भी खुलासा किया गया था कि जिन लोगों के जासूसी की जा रही है उनमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके परिवार के सदस्य, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, अशोक गहलोत,कैप्टन अमरिंदर सिंह, उद्धव ठाकरे, नवीन पटनायक, शिवराज सिंह चौहान, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, रेल मंत्री पीयूष गोयल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत, सेना के 15 पूर्व प्रमुख, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोवड़े, सीएजी जीसी मुर्मू सहित कई अन्य प्रमुख हस्तियां शामिल हैं।

कांग्रेस ने उठाया था राज्यसभा में मामला

इस मामले के खुलासे के बाद संसद में कांग्रेस की ओर से सरकार की घेराबंदी की गई थी। कांग्रेसी सांसदों ने सदन में जोरशोर से यह मामला उठाते हुए कहा था कि सरकार को चीन की डिजिटल आक्रामकता से निपटने के लिए मजबूती से कदम उठाना चाहिए। कांग्रेस के दो सांसदों केसी वेणुगोपाल और राजीव सातव ने शून्यकाल के दौरान यह मामला राज्यसभा में उठाया था।

कांग्रेस की ओर से मामला उठाए जाने के बाद राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने संसदीय कार्य मंत्री को इस मामले पर ध्यान देना और संबंधित मंत्री को इसकी जानकारी देने का निर्देश दिया था।

इस तरह जानकारी जुटाती है चीनी कंपनी

चीन की टेक्नोलॉजी कंपनी जेनहुआ सरकार, कारोबार, प्रौद्योगिकी, मीडिया और सिविल सोसाइटी से जुड़े प्रमुख लोगों को अपना लक्ष्य बनाती है। चीनी इंटेलिजेंस, मिलिट्री और सिक्योरिटी एजेंसियों के साथ काम करने का दावा करने वाली यह कंपनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अन्य डिजिटल माध्यमों से डाटा जुटाती है।

कंपनी की ओर से लक्ष्य बनाए गए लोगों और संस्थाओं के बारे में जानकारी जुटाने के लिए दोस्तों और संबंधियों पर भी नजर रखी जाती है। कंपनी इस बात पर खास नजर रखती है कि किसने क्या पोस्ट की है, उस पर किसने लाइक किया और यदि कमेंट किया तो उसमें क्या लिखा। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए यह भी जानकारी इकट्ठा की जाती है कि कौन कहां जा रहा है।

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