अमेरिका में रह रहे भारतीयों के लिए खुशखबरी ! ट्रम्प द्वारा लगाया गया ये बैन कोर्ट ने हटाया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चुनावी अभियान के दौरान झटके पर झटके लग रहे हैं। अब कैलिफोर्निया के डिस्ट्रिक्ट जज जेफ्री व्हाइट ने एच-1बी वीजा पर लगाए बैन पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने अपने संवैधानिक अधिकारों को पार कर लिया है।

व्यापारिक संगठनों ने दाखिल की थी याचिका

एच-1बी वीजा पर लगे बैन को हटाने के लिए व्यापारिक संगठनों ने डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स और डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्युरिटी के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। यह याचिका कंपनियों के राष्ट्रीय संगठन नेशनल एसोसिएशन ऑफ मैन्युफैक्चरर्स, यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स, नेशनल रिटेल फेडरेशन और टेकनेट ने दाखिल की थी। नेशनल एसोसिएशन ऑफ मैन्युफैक्चरर्स ने कहा कि कोर्ट के फैसले के बाद वीजा प्रतिबंधों पर तुरंत रोक लग गई है।

जून में लगाया गया था बैन

इसी साल जून में ट्रम्प प्रशासन ने एच-1बी वीजा समेत अन्य विदेश वीजा पर अस्थायी रोक लगा दी थी। इस रोक का असर एच-2बी, जे और एल वीजा पर पड़ा था। यह रोक इस साल के अंत तक के लिए लगाई गई थी। ट्रम्प ने कहा था कि इस कदम से अमेरिकियों को रोजगार के ज्यादा मौके मिलेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि फरवरी से मई के बीच अमेरिका में बेरोजगारी चार गुना तक बढ़ गई है। लिहाजा, उन्हें सख्त कदम उठाने पड़ रहे हैं।

क्या होता है एच-1बी वीजा

एच-1बी वीजा नॉन इमीग्रेंट या गैर प्रवासी वीजा है। अमेरिकी कंपनियां दूसरे देशों के टेक्निकल एक्सपर्ट्स हायर करती हैं। फिर यह कंपनियां सरकार से हायर किए गए इम्पलॉइज के लिए एच-1बी वीजा मांगती हैं। ज्यादातर कर्मचारी भारत या चीन के होते हैं। अगर किसी एच-1बी वीजाधारक की कंपनी ने उसके साथ कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर लिया है, तो वीजा स्टेटस बनाए रखने के लिए उसे 60 दिनों में नई कंपनी में जॉब तलाशना होता है। यूएस सिटीजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) के मुताबिक, एच-1बी वीजा से सबसे ज्यादा फायदा भारतीय नागरिकों को ही होता है।

वीजा का प्रकार और किन्हें मिलता है

एच-1बी: अमेरिका में काम करने वाले विदेशी कामगारों को।

एल-1: उन विदेशियों को जिनका अमेरिका स्थित कंपनियों में ट्रांसफर होता है।

एच-4: एच-1बी वीजाधारकों के साथ रहने वाले पति-पत्नियों को।

जे-1: सांस्कृतिक, शिक्षा के एक्सचेंज प्रोग्राम के इमिग्रेशन के लिए।

एच-2: नॉन-एग्रीकल्चर इंडस्ट्री में काम पर आने वाले कामगारों के लिए।

बड़ी कंपनियों ने भी किया था ट्रम्प प्रशासन के फैसले का विरोध

एच-1बी वीजा पर अमेरिकी सरकार के फैसले पर गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने निराशा जाहिर की थी। उन्होंने कहा था- प्रवासियों ने अमेरिका को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाने में मदद की, देश को तकनीक में अव्वल बनाया। इन्हीं लोगों की वजह से गूगल इस जगह पहुंचा। हम इन लोगों को समर्थन करते रहेंगे। टेस्ला के सीईओ एलन मस्क और माइक्रोसॉफ्ट के प्रेसिडेंट ब्रेड स्मिथ ने भी इस फैसले का विरोध किया था। मस्क ने कहा था- यह देश को वर्ल्ड टैलेंट से अलग करने का वक्त नहीं है। प्रवासियों ने हमारी मदद उस दौर में की थी जब हमें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी।

एच-1बी वीजा में भारतीयों की 70 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी

मौजूदा लॉटरी सिस्टम के जरिए सालाना 85 हजार नए एच-1बी वीजा जारी किए जाते हैं। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने संसद में बताया था कि पिछले 5 साल में जारी किए एच-1बी वीजा में 70 फीसदी से ज्यादा भारतीयों को मिले हैं। 2015 में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लोगों की तादाद ने 10 लाख का आंकड़ा पार कर लिया था। इन लोगों से भारत को भारी रेमिटंस का फायदा मिलता है। अमेरिकी सियासी गलियारों से लेकर व्हाइट हाउस की टीम में भी आज कई भारतीय-अमेरिकी हैं।

टिकटॉक और वीचैट पर बैन पर भी लग चुकी है रोक

ट्रम्प प्रशासन को कोर्ट की ओर से लगातार झटके लग रहे हैं। इससे पहले कोलंबिया के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज कार्ल निकोलस टिकटॉक को गूगल और ऐपल के एप स्टोर से हटाने के फैसले पर रोक लगा चुके हैं। वहीं, सैन फ्रांसिस्को की कोर्ट के जज लॉरेल बीलर चीन के मैसेजिंग ऐप वीचैट पर बैन के फैसले पर अस्थायी रोक लगा चुके हैं।

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