मत्स्य पालकों के लिए अच्छी खबर, देश में पहली बार हैचरी में चीतल मछली की ब्रीडिंग, ये है खूबी

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करनाल । चीतल मछली का उत्पादन अब हैचरी में भी संभव होगा। मत्स्य पालक पद्मश्री सुलतान सिंह चार साल से इस प्रयोग में रत थे, जिन्हें अंतत: सफलता मिल गई। नदियों में पाई जाने वाली इस मछली की देशभर में खासी मांग है। मत्स्य पालन के क्षेत्र में इस बड़ी सफलता से उद्यमियों की आमदनी बढ़ेगी, वहीं रोजगार के अनेक अवसर सृजित होंगे।

सुलतान सिंह का दावा है कि यह देश में पहली बार हुआ है जब इस मछली की ब्रीडिंग की गई है। सुलतान चार साल पहले बांग्लादेश से 30 हजार बीज लाए थे। ब्रीडिंग के लिए उन्होंने बेहद खास तकनीक आजमाई, जिसके तहत हैचरी में बाकायदा कृत्रिम वर्षा कराई। इसमें टूटी नाव और टायरों तक का इस्तेमाल किया गया। टायर लगाकर गड्ढे तैयार किए गए। अब चीतल के स्वस्थ अंडे तैयार हैं।

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सुलतान सिंह ने बताया कि बुटाना स्थित हैचरी में उन्होंने करीब 25 फीट गहरे और ऑक्सीजनयुक्त मीठे पानी में इन्हें तैयार किया। सौ बीज का ब्रूडर तैयार करने में कामयाबी मिली। फिर ब्रीडिंग पूल के रूप में टूटी कश्ती में टैंक बनाए गए। ब्रीडिंग पूल में पंपिग सिस्टम और फव्वारों की मदद से कृत्रिम वर्षा की गई। उन्होंने बताया, ब्रीडिंग में एक मादा और दो नर मछलियों का इस्तेमाल किया।

सामान्य मछली के अंडे 10-12 घंटे में तैयार हो जाते हैं, लेकिन चीतल के अंडे सात-आठ दिन का समय लेते हैं। अंडों से करीब 15 एमएम की मछलियां निकलेंगी। इससे इन्हें सात से दस दिन तक भोजन की जरूरत नहीं होती। फिर इन्हें मांसाहार के बजाय दूध, सरसों खल, अंडे का पीला भाग और अन्य फिश फीड के रूप में पौष्टिक आहार खिलाया जाएगा।

सुलतान की पहचान

मत्स्य पालक पद्मश्री सुलतान सिंह ने करीब तीस साल पहले 500 रुपये में पट्टे पर तालाब लेकर मछली पालन शुरू किया था। पहली बार 25 हजार रुपये खर्च करके उन्हें डेढ़ लाख रुपये की बचत हुई थी। मछली पालन में गहन प्रशिक्षण देकर वह 20 हजार से ज्यादा लोगों की जिंदगी में बदलाव ला चुके हैं।

चीतल की खूबी

चीतल मछली बहते हुए पानी या नदियों में ही पैदा होती है। होलसेल में इसके दाम 600 से एक हजार रुपये प्रति किलो तक है। यह प्राकृतिक माहौल में ही पलती है। बेहतरीन स्वाद और पौष्टिक तत्वों से भरपूर होने के कारण दुनियाभर में इसकी ज्यादा मांग रहती है। मांसाहारी चीतल इतनी गुस्सैल है कि पकड़ में आने पर यह जाल तक काट देती है या खुद को घोंट लेती है। इसे जंगली खाना ही पसंद है।

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