हरियाणा में नए जिले, उपमंडल, तहसील बनाने का रास्ता साफ, नई नोटिफिकेशन जारी

चंडीगढ़: आगामी तीन महीनों तक हरियाणा में नए जिले सब-डिवीजन (उप-मंडल), तहसील, उप-तहसील, ब्लॉक (खंड), पंचायत समिति, ग्राम पंचायत आदि घोषित करने का एवं उनका पुनर्गठन करने अर्थात उनकी वर्तमान प्रशासनिक सीमाओं में परिवर्तन करने का रास्ता साफ हो गया है। बीते मंगलवार 29 सितम्बर को प्रदेश के तत्कालीन वित्तायुक्त एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव, राजस्व विभाग विजय वर्धन  (अब प्रदेश के मुख्य सचिव)  द्वारा जनगणना नियमावली, 1990 के नियम 8(4)  के अंतर्गत जारी एक गजट नोटिफिकेशन से 31 दिसंबर 2020 के बाद सेंसस-2021 (जनगणना) का कार्य पूर्ण हो जाने तक प्रदेश के सभी जिलों, तहसीलों आदि की प्रशासनिक सीमाओं का परिवर्तन नहीं होगा।

लिखने योग्य है कि इसी वर्ष 6 जनवरी 2020 को राजस्व विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव, धनपत सिंह द्वारा उपरोक्त कानूनी प्रावधान में ही जारी एक अन्य गजट नोटिफिकेशन में  1 जनवरी 2020 से 31 मार्च 2021 के मध्य की समय अवधि में प्रदेश के सभी जिलों तहसीलों, आदि की प्रशासनिक सीमाओं को ज्यों का त्यों कायम रखने का उल्लेख किया गया था। ज्ञात रहे कि 6 जनवरी की अधिसूचना को सुपरसीड (अधिक्रमण) कर रही 29 सितम्बर की ताजा नोटिफिकेशन जारी की गई है।

बहरहाल, इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि गत माह 2 सितम्बर को हरियाणा के राजस्व विभाग द्वारा एक और नोटिफिकेशन जारी कर 10 अप्रैल 2020 को प्रदेश सरकार के तीन मंत्रियों- उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, शिक्षा मंत्री कंवर पाल एवं सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल की सदस्यता वाली गठित एक कमेटी का कार्यकाल 9 जुलाई 2020 से छ: माह के लिए बढ़ा दिया गया है।

उक्त कमेटी प्रदेश की सब-डिवीजनों (उपमंडलों), तहसीलों, सब-तहसीलों, ब्लॉकों (खंडों), पंचायतों और पंचायत समितियों के पुर्नगठन के विषय से सम्बंधित है। इस कमेटी का  मुख्यालय चंडीगढ़ में है एवं यह अपने कार्यों के निर्वहन में प्रदेश विधानसभा के कुछ सदस्यों (विधायकों) को भी अपने साथ सम्बद्ध कर सकती है। इस कमेटी को अपनी सिफारिशें/रिपोर्ट देने के लिए मूल रूप से तीन माह का समय दिया गया था जिसे गत माह जनवरी, 2021 तक बढ़ाया गया है।

कोरोना-वायरस संक्रमण के दृष्टिगत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा छह माह पूर्व 25 मार्च से  21 दिनों के लिए देश में सम्पूर्ण लॉकडाउन घोषित किया गया, जिसे पहले बढ़ाकर 3 मई,  फिर 17 मई और इसके उपरांत 31 मई तक कर दिया गया। हालांकि 1 जून से चरणबद्ध ढंग से हर माह केंद्र सरकार द्वारा अनलॉक की प्रक्रिया भी जारी है। बीती 25 मार्च को ही केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सेन्सस (जनगणना)-2021 के पहले चरण, जो अप्रैल 2020 से सितम्बर 2020 तक चलना था, जिस दौरान हाउस-लिस्टिंग और हाउसिंग सेन्सस एवं नेशनल पापुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) को अपडेट करने की कवायद होनी थी, उसे आगामी आदेशों तक स्थगित कर दिया गया था।

हेमंत ने बताया कि जब जनगणना 2021 का कार्य, जो हालांकि कोरोना-वायरस कारण आरम्भ नहीं हो पाया, के फ़लस्वरूप हरियाणा सरकार द्वारा इस वर्ष जनवरी में जारी नोटिफिकेशन से प्रदेश के जिलों, तहसीलों, गांवों आदि की प्रशासनिक सीमाओं पर 15 महीनों के लिए अर्थात 31 मार्च 2021 तक प्रतिषेध लगा दिया गया था, तो अब नौ महीनों बाद ही उस अधिसूचना को सुपरसीड कर नई नोटिफिकेशन जारी कर तीन महीनों के उपरान्त अर्थात 31 दिसंबर 2020 से पुन: वैसा प्रतिबन्ध लगाने का तात्पर्य यही निकलता है कि प्रदेश सरकार आगामी तीन माह में प्रदेश के वर्तमान जिलों, उपमंडलों, तहसीलों, ब्लॉकों, पंचायतों आदि का पुनर्गठन कर सकती है। प्रदेश के अगले पंचायती आम चुनाव आगामी वर्ष जनवरी-फरवरी, 2021 में ही करवाए जाने हैं, जिनसे पूर्व वर्तमान ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों, जिला परिषदों की सीमाओं में परिवर्तन हो सकता है।

लिखने योग्य है कि खट्टर सरकार के पिछले कार्यकाल के दौरान भी प्रदेश के तत्कालीन कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ (वर्तमान में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष) की अध्यक्षता में एक पुनर्गठन कमेटी बनाई गई थी, जिसकी रिपोर्ट पर चरखी दादरी को प्रदेश का 22 वां जिला बनाया गया। इसके अलावा नई सब-डिवीजनों के रूप में अम्बाला जिले में अम्बाला कैंट, तत्कालीन  भिवानी और बाद में चरखी दादरी जिले में बाढड़ा और चरखी दादरी, फरीदाबाद जिले में बड़कल, हिसार जिले में नारनौंद, झज्जर जिले में बादली, जींद जिले में उचाना, करनाल में घरौंदा, नूहं (मेवात) जिले में पुन्हाना और यमुनानगर जिले में रादौर शामिल थी। इसके अलावा दस नई तहसीलें और तीन नई सब-तहसीलें भी बनाई गई। इसके बाद वर्ष 2017 में नूंह जिले में तावड़ू और 2018 में कुरुक्षेत्र जिले में लाडवा को सब-डिवीजन बनाया गया।

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