हरियाणा में हर थाने को खर्च के लिए मिलेगी ये ग्रांट

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चंडीगढ़ : हरियाणा में पुलिस थानों को हर महीने स्टेशनरी खरीदने और जांच खर्च के नाम पर अलग से ग्रांट जारी की जाएगी। गृह मंत्री अनिल विज के आदेशों पर गृह विभाग ने मसौदा तैयार कर लिया है। अब तक शिकायतकर्ताओं से ही शिकायत लिखने से पहले स्टेशनरी मंगवाने की परंपरा चली आ रही थी। हालांकि विभाग की ओर से पहले भी प्रति मुकद्दमा 300 रुपए की राशि स्टेशनरी के नाम पर थानों को मिलती थी, लेकिन बिल भेजने के बाद थानों तक पहुंचती थी।

गृह विभाग के मसौदे में शहरी, ग्रामीण, महिला और यातायात पुलिस थानों के लिए अलग-अलग राशि निर्धारित की गई है जिसे जांच खर्च का नाम दिया गया है। शहरी पुलिस थानों को 50 हजार, ग्रामीण पुलिस थानों को 25 हजार, महिला थानों को 30 हजार और यातायात पुलिस थानों को 25 हजार की राशि मिलेगी। यह राशि स्टेशनरी के अलावा अज्ञात डैड बाडी के लिए कफन खरीदने सहित अन्य जरूरी कार्यों में खर्च की जाएगी।

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दो दशक से चली आ रही थी थाना प्रभारियों की डिमांड

पुलिस महकमे को अत्याधुनिक करने के लिए भले ही अब तक असलहे, बेहतर इमारतें और गाडिय़ों की खरीद के नाम पर करोड़ों खर्च किए जा चुके हों, लेकिन दशकों पुरानी व्यवस्था बदली नहीं जा सकी थी। बताया गया कि थाना प्रभारी लंबे समय से राशि की डिमांड कर रहे थे, लेकिन किसी ने पूरा करने की जरूरत नहीं समझी थी। पुरानी परंपरा के तहत ही शिकायत लेकर आने वालों से जहां स्टेशनरी मंगवाए जाते थे तो वहीं समाजसेवियों के भरोसे अन्य खर्च चल रहे थे।

गाडिय़ों के बेगार की भी पहुंची हैं शिकायतें

गृह मंत्री के पास पहुंचे कई मामलों में से एक मामला आरोपियों को पकडऩे के लिए शिकायत पक्ष से गाडिय़ों की बेगार को लेकर भी है। बताया गया कि पैसों के लेन-देने के अधिकांश मामले में पुलिस शिकायत कर्ताओं की गाड़ी से ही आरोपियों को पकडऩे जाती है। उससे ही खाने-पाने के नाम पर पैसे खर्च कराए जाते हैं। इसके पीछे तर्क दिया जाता है कि थानों में सरकारी वाहनों की कमी है। त्वरित कार्रवाई चाहिए तो गाड़ी लेकर चलना पड़ेगा।

पुलिस कर्मियों को मिलेंगे जरूरी संसाधन : विज

गृह मंत्री विज ने कहा कि पुलिस महकमे को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस कर्मियों के जरूरी कार्यों के लिए अलग से बजट का प्रावधान किया जा रहा है। वर्षों से चली आ रही परंपरा को बंद कर जहां पुलिस थानों के लिए जांच खर्च के नाम पर राशि निर्धारित कर दी गई है। वहीं थानों और पुलिस चौकियों की इमारतें ठीक करने के अलावा खान-पान पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

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