पिता ने की बेटे की पिटाई तो बेटे ने पिता को जान से मारने के लिए इस टी.वी. सीरियल से लिया आइडिया

मथुरा।  मोबाइल और इंटरनेट सस्ता होने के बाद हमारी जिंदगी में इनकी उपयोगिता बढ़ी जरूर है, लेकिन बच्चों के हाथ में इनका होना कितना खतरनाक हो सकता है, ये जानने के लिए मथुरा से आई ये खबर हर मां-बाप के लिए पढ़नी बेहद जरूरी है। खासकर अगर घर में बच्चे ‘क्राइम पेट्रोल’ और ‘सावधान इंडिया’ जैसे शोज के शौकीन हैं, तो उनकी पसंद को लत नहीं बनने दें क्योंकि मथुरा में एक नाबालिग ने अपने ही पिता की बेरहमी से हत्या कर दी और उसे इसका आइडिया मिला क्राइम पेट्रोल से।

उत्‍तर प्रदेश के मथुरा से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां 17  साल के एक किशोर ने अपने ही पिता की हत्‍या कर दी और फिर साक्ष्‍य मिटाने के लिए मां के साथ मिलकर उनका शव ठिकाने लगा दिया। घटना से जुड़े साक्ष्‍यों को छ‍िपाने के लिए उसने टीवी सीरियल ‘क्राइम पेट्रोल’ से क्‍लू लिया था। घटना के करीब 5 महीने बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।  मृतक की पहचान 42  वर्षीय मनोज मिश्र के तौर पर की गई है, जो इस्‍कॉन मंदिर से जुड़े हुए थे। पुलिस ने इस मामले में  आरोपी बेटे को गिरफ्तार किया, जो 12वीं का छात्र है। उसके मोबाइल फोन की जब जांच की गई तो पुलिस ने पाया कि उसने टीवी शो ‘क्राइम पेट्रोल’ सीरीज को 100 बार से अधिक बार देखा था।

घटना 2-3 मई रात की है। हत्या से पहले मनोज मिश्रा ने अपने बेटे और बेटी को डंडे से मारा था।  इसी बात से गुस्सा होकर नाबालिग ने अपने पिता के सर पर पूरी ताकत से लोहे की रॉड दे मारी।  उसके गिरने के बाद बेटे ने कपड़े से पिता का चेहरा ढककर दोनों हाथों से उसका गला घोंट दिया, ताकि फिंगर प्रिंट्स न आ सकें। इसके बाद शव को छिपाने के लिए बेटे ने मां की मदद ली। देर रात करीब 2-3 बजे मां की मदद से उसने शव को स्कूटी से ले जाकर एक खाली प्लॉट में एसिड और पेट्रोल डालकर जला दिया। घटना को आत्महत्या दिखाने के लिए मृतक पिता की चप्पल, चश्मा, माला और बीड बैग को जले हुए शव के पास ही फेंक दिया गया जबकि लोहे की रॉड को दूर ले जाकर फेंक दिया। इसके अलावा जो भी चीजें इस पूरे कांड में इस्तेमाल हुईं, उन्हें जला दिया गया।


पुलिस को 3 मई को आंशिक रूप से जला हुआ शव मिला था। लगभग तीन सप्ताह तक इसकी पहचान नहीं हो सकी, क्‍योंकि किसी भी पुलिस स्टेशन में किसी व्यक्ति की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई थी। मृतक के परिवार ने बाद में इस्कॉन के अधिकारियों के दबाव में 27 मई को एक गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई, क्योंकि मनोज मिश्रा इस्‍कॉन में डोनेशन कलेक्टर के रूप में काम करते थे। उनके कुछ सहयोगियों ने चश्‍मे से मनोज मिश्र के शव की पहचान कर ली। इस्कॉन में पीड़ित के सहयोगियों ने कहा कि उन्हें मनोज की लंबे समय से अनुपस्थित रहने पर इसलिए संदेह नहीं हुआ, क्‍योंकि वह अक्‍सर भगवद गीता का प्रचार करने के लिए यात्रा पर होते थे।

मनोज के बेटे पर शक कैसे हुआ, इस बारे में मथुरा के पुलिस अधीक्षक  उदय शंकर सिंह ने कहा कि पुलिस जब भी मनोज के बेटे को पूछताछ के लिए बुलाती थी, वह बचने की कोशिश करता और उल्‍टा पुलिस से ही सवाल करता था कि आखिर वे किन प्रावधानों के तहत उससे पूछताछ की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि पुलिस ने उसके मोबाइल फोन की जांच की तो उन्हें पता चला कि वह क्राइम पेट्रोल सीरीज 100 बार से अधिक बार देख चुका है। कई बार पूछताछ के बाद आखिरकार वह टूट गया और उसने अपना अपराध कबूल कर लिया।

पुलिस ने आरोपी की 39 वर्षीय मां को भी गिरफ्तार किया है। उन पर हत्या और सबूत नष्ट करने के मामले दर्ज किए गए हैं। आरोपी की 11 वर्षीया बहन को दादा-दादी को सौंप दिया गया है।

Advertisement