संकट से उबारेंगे किसान, हरियाणा में इतने फुट नीचे पहुंचा भू-जल

चंडीगढ़: हरियाणा में भू-जल स्तर रिकॉर्ड 81 मीटर (265.748 फुट) से नीचे चला गया ‌है| पिछले एक दशक में लगभग दो गुना संकट बढ़ा है| मुख्यमंत्री मनोहर लाल के मुताबिक 10 साल पहले यहां का भू-जल 40 से 50 मीटर नीचे मिला करता था| जाहिर है कि अत्यधिक दोहन से ऐसे हालात पैदा हुए हैं| माना जा रहा है कि सबसे ज्यादा पानी का दोहन यहां कृषि क्षेत्र में हुआ है| क्योंकि यह प्रदेश टॉप टेन धान उत्पादकों (Paddy producer state) में शामिल है| कृषि (Agriculture) वैज्ञानिकों के मुताबिक एक किलोग्राम चावल पैदा करने में 5000 लीटर तक पानी की जरूरत होती है| ऐसे में अब सरकार ने धान से तौबा करने की नीति बनाई है| जलसंकट से बचाने का दारोमदार अन्नदाता पर है|

जल संरक्षण के लिए यहां ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना बनाई है| कुछ किसान इसका विरोध भी कर रहे हैं कि क्योंकि उन्हें 7000 रुपये एकड़ की प्रोत्साहन राशि कम लग रही है| जल संकट (Water crisis) के लिहाज से डार्क जोन में शामिल क्षेत्रों में सरकार ने 1,00,000 हैक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल न बोने का फैसला लिया था|

कितने किसानों ने लिया भू-जल बचाने का संकल्प

अब तक 58,421 हैक्टेयर क्षेत्र में धान के स्थान पर अन्य वैकल्पिक फसलें उगाने के लिए किसान सहमत हुए हैं| लगभग 53,000 किसानों (Farmers) ने इसके लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है| मतलब साफ है कि किसान भी अब समझ गए हैं कि जमीन के साथ ही पानी की अपनी विरासत भावी पीढ़ी को देकर जाएं|

किसानों के लिए पानी कहां से आएगा?

भूजल रिचार्जिंग के लिए 1000 बोरवेलों का निर्माण होगा| रतिया,  इस्माइलाबाद और गुहला ब्लॉक में सबसे पहले इसे लागू किया जाएगा| एक बोरवेल पर लगभग 1.5 लाख रुपये खर्च आएगा| 90 प्रतिशत खर्च सरकार वहन करेगी और केवल 10 फीसदी रकम किसान को देनी होगी| बोरवेल बनाने के बाद इसे किसानों को सौंप दिया जाएगा|

कहां लागू है मेरा पानी-मेरी विरासत

प्रदेश के वो 8 ब्लॉक इसके लिए चयनित किए गए हैं जिनमें भूजल संकट ज्यादा है| इनमें रतिया, सीवान, गुहला, पीपली, शाहबाद, बबैन, ईस्माइलाबाद व सिरसा| इनमें धान की बिजाई होती है| इनमें किसानों को बागवानी अपनाने के लिए 30 हजार रुपये प्रति एकड़ अनुदान देने का इंतजाम किया गया है| हालांकि, प्रदेश में ज्यादा जल संकट वाले 19 ब्लॉक हैं| लेकिन इनमें से 11 ऐसे हैं जिसमें धान की फसल नहीं होती|

तीन ब्लॉक में विशेष छूट

रतिया, इस्माइलाबाद और गुहला ब्लॉक घग्गर नदी के पास पड़ते हैं| ये बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में आते है| इसलिए सरकार ने ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ में खुद रजिस्ट्रेशन करवाने वालों को विशेष छूट दी है| ऐसे किसानों के प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का प्रीमियम भी सरकार भरेगी|

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