जम्मू से कन्याकुमारी तक इंजीनियर ने पूरी की पदयात्रा, वापस घर लौटने पर हुआ जोरदार स्वागत

फरीदाबाद : देश में पर्यावरण संरक्षण का संदेश लेकर जम्मू से कन्याकुमारी तक पदयात्रा करने वाले इंजीनियर अरूण मित्तल का फरीदाबाद पहुंचने पर उनके सहयोगियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। मित्तल ने पिछले वर्ष सितंबर माह में जम्मू स्थित सतवारी चौक के सरकारी स्कूल में एक पौधारोपण कर अपनी यात्रा शुरू की।

अरूण मित्तल ने बताया कि जम्मू से कन्या कुमारी तक उन्होंने 4860 किलोमीटर की यात्रा तय की जिसमें 12 राज्य, जम्मू, हिमाचल, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक तथा तमिलनाडू में कई जगहों पर युवाओं, सामाजिक संस्थाओं, सरकारी स्कूलों तथा कालेजों में छात्र-छात्राओं को पर्यावरण के लिए जागरूक करने हेतू गोष्ठियों का भी आयोजन किया।

उन्होंने कहा कि अब हमें समय के साथ बदलना होगा। दिन प्रतिदिन मानव द्वारा प्राकृतिक साधनों का दोहन किया जा रहा है, जिसके कारण पर्यावरण की समस्या उत्पन्न हो रही है। आए दिन वनों को काटा जा रहा है, हरियाली को समाप्त कर कंकरीटों के जंगल बनाए जा रहे हैं। प्रकृति को यदि संतुलन बिगाडने का प्रयास किया गया तो आने वाली पीढियां बडे संकट से गुजर सकती है। मित्तल ने बताया कि मन में एक जनून था कि वे देश में घूमकर पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करे।

जम्मू से कन्याकुमारी तक इंजीनियर ने पूरी की पदयात्रा, वापस घर लौटने पर जोरदार स्वागतपर्यावरण प्रेमी अरूण मित्तल ने बताया कि यह यात्रा कई स्थानों पर सुगम तो कही चुनौतीपूर्ण रही। अपने शरीर पर 15 किलो का बैग थामे वह एक दिन में लगभग 25 किलोमीटर पैदल यात्रा करते रहे। इस दौरान उन्होंने 500 से अधिक पौधे भी लगाए। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान कई सामाजिक संगठनों से उन्हें सहयोग तो मिला लेकिन वीरान और भयावहरास्तों पर उन्हें कई परेशानियों और चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने बताया कि लॉकडाउन शुरू होने पर तमिलनाडू के राशिपुरम में अपनी यात्रा स्थगित कर वहीं रूकना पड़ा, क्योंकि रास्ते में उन्हें खाने और पीने की वस्तुओं का अभाव हो गया, इस दौरान वह 10 दिन तक केवल पानी और अपने साथ लाए गए सूखे खाने पर निर्भर रहे। लेकिन हार नहीं मानी। मध्यप्रदेश और गुजरात के बीच गिर जंगल में उन्हें जंगली जानवरों का भी सामना करना पड़ा। रेगिस्तान के रेत और पहाड़ी से होते हुए उन्होंने अपनी यात्रा जारी रखी और 5 जून 2020 को कन्याकुमारी के विवेकानंद आश्रम में एक पौधा लगाकर यात्रा को विराम दिया।

एक प्रश्र के उत्तर में मित्तल ने बताया कि यात्रा के दौरान वह कई जिला अधिकारियों, राजनेताओं जिनमें कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस. येदुरप्पा, कांग्रेस के दिग्विजय सिंह से भी मिले और उनका मार्गदर्शन लिया।

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