लॉकडाउन की वजह से हरियाणा की अर्थव्यवस्था को हुआ इतना नुकसान

चंडीगढ़ : देश में 25 मार्च से लागू लॉकडाउन के तीन चरणों में हरियाणा सरकार के राजस्व में करोड़ों का नुकसान हो गया। मार्च और अप्रैल में जहां सरकार के राजस्व में 7841 करोड़ रूपये का नुकसान तो हुआ, वहीं मई महीने में 5218 करोड़ का नुकसान होना संभावित है। राज्य के मौजूदा हालातों को मद्देनजर रखते हुए सरकार को मई में होने वाली राजस्व प्राप्ति से कोई खास उम्मीद नहीं है। ध्यान रहे कि राज्य सरकार की अर्थव्यवस्था और राजस्व प्राप्ति टैक्स रेवेन्यू व नॉन-टैक्स रेवेन्यू आय के बलबूते ही होती है।

राजस्व प्राप्ति के स्त्रोतों में इस प्रकार हुआ घाटा

टैक्स से राजस्व प्राप्ति के अंतर्गत अप्रैल में केन्द्रीय कर के हिस्से में 92 करोड़ का घाटा हुआ। इसी प्रकार मार्च में जीएसटी का घाटा 1183 करोड़ व अप्रैल में 1810 करोड़, एक्साइज ड्यूटी का घाटा मार्च में 252 करोड़ व अप्रैल में 564 करोड़, सेल टैक्स का घाटा मार्च में 75 करोड़ व अप्रैल में 194 करोड़, वाहन करों का घाटा मार्च में 104 करोड़ व अप्रैल 275 करोड़, स्टांप ड्यूटी का घाटा मार्च में 252 करोड़ व अप्रैल में 564 करोड़ और अन्य टैक्स का घाटा मार्च में 4 करोड़ व अप्रैल में 2 करोड़ रहा।

वहीं नॉन-टैक्स रेवेन्यू के तहत ईडीसी का घाटा मार्च में 83 करोड़ और अप्रैल में 199 करोड़, माइनिंग विभाग का घाटा मार्च में 5 करोड़ और अप्रैल में 70 करोड़, रोड ट्रांसपोर्ट से होने वाली आय का घाटा मार्च में 36 करोड़ और अप्रैल में 96 करोड़ रहा। जबकि अन्य नॉन-टैक्स रेवेन्यू का मार्च में घाटा 24 करोड़ और अप्रैल में 98 करोड़ रहा। मार्च महीने में हरियाणा को जीएसटी घाटे का पिछला बैलेंस 1337 करोड़ भी वहन करना पड़ा। कुल मिलाकर सरकार को रेवेन्यू में मार्च में 3699 करोड़ का शॉर्टफाल और अप्रैल में 4142 करोड़ का शॉर्टफाल झेलना पड़ा।

सरकार की उम्मीदों पर फिरा पानी

इस साल मई 2020 से सरकार को बड़ी उम्मीद थी, सरकार ने लक्ष्य 7200 करोड़ रखा था, जिसे घटाकर 1982 करोड़ रुपये करना पड़ा। पिछले साल मई 2019 में 6575 करोड़ का वास्तविक राजस्व प्राप्त हुआ था, परंतु अभी तक 675 करोड़ ही राजस्व प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल के अनुसार कम राजस्व आय के बावजूद सरकार लोगों की मदद के लिए प्रतिबद्ध है और अपने दायित्वों से पीछे नहीं हट रही है। गरीबों, प्रवासी मजदूरों व अन्य जरूरतमंदों की मदद में लगभग 500 करोड़ से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इसके तहत सरकार जहां गरीबों को मुफ्त राशन वितरित कर रही है। वहीं गरीब पेंशनधारियों को हर महीने उनकी पेंशन के अतिरिक्त 4 हज़ार और श्रमिकों को 4500 रुपये दिए गए हैं। प्रवासी मजदूरों को भी उनके घरों तक पहुंचाने का खर्च भी सरकार ने वहन किया है।

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