दादा गौतम पर गर्म हुए दुष्यंत और अजय चौटाला, जानिए क्या कहा

चंडीगढ़ । जननायक जनता पार्टी के बागी विधायक दादा रामकुमार गौतम पर अब उपमुख्‍यमंत्री दुष्‍यंत चौटाला और पार्टी के संरक्षक अजय सिंह चौटाला के तेवर तल्‍ख हो गए हैं। चौटाला पिता-पुत्र ने दादा गौतम को उनके अंदाज में ही जवाब दिया है। इसके साथ ही यह संकेत दिए कि गौतम ने बयानबाजी बंद ने की तो उनको बड़ा झटका मिल सकता है। दूसरी ओर पूरे मामले में पूर्व मुख्‍यमंत्री और इनेलों अध्‍यक्ष ओमप्रकाश चाैटाला ने दुष्‍यंत और अजय पर हमला किया है। बड़े चौटाला ने कहा कि जब ये अपने असली दादा के नहीं हुए तो नकली की क्‍या बिसात है।

अपने ठेठ हरियाणवी अंदाज में जजपा संयोजक दुष्यंत चौटाला को भला-बुरा कहने वाले विधायक रामकुमार गौतम पर अब पार्टी ने अपने तेवर कड़े दिए हैं। मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज रामकुमार गौतम कई बार दुष्यंत चौटाला पर खुले हमले कर चुके हैं। एक बार तो उन्होंने यहां तक कह दिया था कि मुख्यमंत्री के बिस्तर के आसपास सांप है। दुष्यंत चौटाला के विरुद्ध तल्ख टिप्पणियों को लेकर गौतम का वीडियो भी वायरल हो चुका है। वह बार-बार दुष्यंत को यह कहते रहे कि सौदा ही कीमे नी यानी उनकी राजनीतिक हैसियत नहीं है। अब पार्टी उन्हें इसका जवाब देने की तैयारी में है।

लंबा इंतजार करने के बाद भी गौतम ने जब व्यक्तिगत हमले बंद नहीं किए तो पिता-पुत्र यानी अजय सिंह चौटाला और दुष्यंत चौटाला  ने उनकी परवाह करनी छोड़ दी। अजय  चौटाला ने तो यहां तक कह दिया कि मीडिया में बोलने से मंत्री पद नहीं मिला करते। अजय चौटाला के इस बयान के बाकी विधायकों के लिए कई मतलब हैं।

दादा गौतम के जरिये पिता-पुत्रों ने बाकी जजपा विधायकों को भी दिखाया आईना

इनेलो से अलग होकर अस्तित्व में आई जननायक जनता पार्टी ने 2019 के विधानसभा चुनाव में उम्मीद से कहीं अच्छा प्रदर्शन किया था। चुनाव में जजपा के दस विधायक जीतकर आए। इनमें खुद दुष्यंत चौटाला और उनकी माता नैना चौटाला भी शामिल हैं। बाकी आठ विधायकों में रामकुमार गौतम, अनूप सिंह धानक, रामकरण काला, ईश्वर सिंह, देवेंद्र सिंह बबली, अमरजीत ढांडा, जोगी राम सिहाग और रामनिवास ने चुनाव जीता।

भाजपा के साथ गठबंधन के बाद जजपा कोटे से दुष्यंत चौटाला डिप्टी सीएम और अनूप धानक राज्य मंत्री बनाए गए। तब रामकुमार गौतम, ईश्वर सिंह, रामकरण काला और देवेंद्र बबली को भी मंत्री बनने की उम्मीद थी, जो पूरी नहीं हो पाई। तब से ही जजपा में अंदरूनी तौर पर विरोध के स्वर फूटने लगे थे।

इसकी शुरुआत नारनौंद के विधायक रामकुमार गौतम ने की। गौतम ने कुल चार चुनाव लड़े, दो जीते और दो हारे। 2005 में पहला चुनाव उन्होंने भाजपा के टिकट पर जीता था। यह हलका कैप्टन अभिमन्यु का विधानसभा क्षेत्र है। गौतम की एक के बाद एक तल्ख टिप्पणियों के बाद ऐसी खबरें आई कि आधा दर्जन जजपा विधायक नाराज हैं, लेकिन राजनीति के जानकार लोग बताते हैं कि न तो जजपा उनके विरुद्ध किसी तरह की कार्रवाई कर सकती और न ही यह विधायक जजपा का दामन छोड़ सकते। दोनों ही एक दूसरे से सास-बहू की तरह बंधे हुए हैं।

रामकुमार गौतम के बेटे रजत गौतम हरियाणा सरकार में डिप्टी एडवोकेट जनरल हैं। गौतम की नाराजगी के बाद यह बात भी सामने आई कि उन्हें पहले किसी अहम बोर्ड का चेयरमैन बनाया जाएगा, लेकिन गौतम चाहते थे कि उन्हें मंत्री पद मिले। ऐसा नहीं होने पर उनकी अजय सिंह, दुष्यंत और जजपा के प्रति कड़क टिप्पणियां जमकर वायरल होने लगी, जिसके बाद जजपा ने गौतम की अनदेखी शुरू कर राजनीतिक गलियारों में यह संदेश देने की कोशिश की है कि बाकी विधायक भी मर्यादा के दायरे से बाहर न जायें।

मीडिया में बोलने से मंत्री पद नहीं मिलते’

”गौतम हमारे सम्मानित विधायक हैं। मीडिया में बोलने से किसी को मंत्री पद नहीं मिला करते। मंत्रिमंडल में एक निश्चित मात्रा में मंत्री बनते हैं। उन्हें बढ़ाया नहीं जा सकता। यदि कोई नाराज होकर मंत्री पद की मांग मीडिया में करने लगे तो उस पर कैसे विचार किया जा सकता है। फिर हर कोई मंत्री पद मांगने लगेगा।

जजपा में पहले कार्यकर्ता का सम्मान होगा’

”गौतम हमारी पार्टी की वजह से ही विधायक बने हैं। उन्हें मंत्री पद की लालसा नहीं पालनी चाहिए। कार्यकर्ताओं और लोगों ने वोट देकर उनको विधायक बनाया। हमने अनूप धानक को उनका हक देते हुए संगठन के आदमी के नाते मंत्री बनाने की प्राथमिकता दी। धानक ने बुरे समय में अपनी विधायकी छोड़कर बलिदान दिया था।

-दुष्यंत सिंह चौटाला, संयोजक एवं डिप्टी सीएम, जजपा हरियाणा।

‘यह असली दादा के नहीं, नकली की क्या बिसात’

‘यह वो लोग हैं, जो अपने असली दादा को भूलकर गौतम को दादा कहने लगे। यह जब अपने असली दादा के ही नहीं हुए तो नकली दादा के कैसे हो सकते हैं। हमने कई बार कोशिश की थी कि परिवार में राजनीतिक बिखराव न हो। मगर अजय सिंह और उनका बेटा दुष्यंत अड़े रहे। आज हरियाणा में इनेलो की सरकार होती। दुष्यंत ही डिप्टी सीएम होते।

Advertisement