Doctors Prescription Mandatory for Cough Syrups : केंद्र सरकार ने दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए सिरप आधारित दवाओं की बिक्री के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब कफ सिरप समेत किसी भी प्रकार की सिरप आधारित दवा बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के नहीं खरीदी जा सकेगी।
Written by Kajal Panchal • Published on : 16 June 2026
IBN24 News Network : सरकार ने ड्रग्स (पांचवां संशोधन) नियम, 2026 के तहत यह बदलाव लागू किया है। नई अधिसूचना के अनुसार सिरप को उन दवाओं की सूची से हटा दिया गया है जिन्हें अब तक कुछ विशेष नियमों में छूट प्राप्त थी। अधिसूचना के राजपत्र में प्रकाशित होते ही यह नियम प्रभावी हो गया है।
क्यों लिया गया यह फैसला ?
पिछले कुछ वर्षों में कफ सिरप और अन्य लिक्विड दवाओं की गुणवत्ता को लेकर कई गंभीर सवाल उठे थे। कुछ देशों में भारतीय निर्मित दूषित कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत के मामले सामने आए थे, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दवा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
सरकार का कहना है कि नए नियम से सिरप आधारित दवाओं की बिक्री, निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण पर निगरानी मजबूत होगी। साथ ही निर्माता और विक्रेताओं को लाइसेंसिंग तथा क्वालिटी कंट्रोल से जुड़े सख्त मानकों का पालन करना होगा।
ड्रग्स रूल्स 1945 में क्या बदलाव हुआ ?
केंद्र सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची-K (Schedule K) में संशोधन किया है।
यह वह सूची है जिसमें शामिल दवाओं को कुछ नियामकीय प्रावधानों से छूट दी गई थी। अब इस सूची से “Syrup” शब्द हटा दिया गया है। इसका सीधा मतलब है कि सिरप आधारित दवाएं अब पहले की तरह आसानी से बिना चिकित्सकीय सलाह के उपलब्ध नहीं होंगी।
आम लोगों से मांगे गए थे सुझाव
यह बदलाव ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 12 और 33 के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए किया गया है।
दवा सुरक्षा को लेकर पहले भी हुए बड़े बदलाव
दवा सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से लगातार सख्ती बरत रही है।
2023-24 में उठाए गए प्रमुख कदम
- कफ सिरप के निर्यात से पहले सरकारी लैब में गुणवत्ता परीक्षण अनिवार्य किया गया।
- दवा निर्माण इकाइयों के लिए संशोधित GMP (Good Manufacturing Practices) मानक लागू किए गए।
- गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन करने वाली कई दवा कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
- राज्यों और केंद्र के ड्रग कंट्रोल विभागों के संयुक्त निरीक्षण बढ़ाए गए।
- कई दवा निर्माण इकाइयों के लाइसेंस निलंबित किए गए।
विशेषज्ञों ने क्यों बताया जरूरी ?
दवा विशेषज्ञों के अनुसार सिरप आधारित दवाओं में तरल मिश्रण, फ्लेवरिंग एजेंट और कई प्रकार के रसायनों का उपयोग किया जाता है। ऐसे में निर्माण, पैकेजिंग या भंडारण में छोटी सी लापरवाही भी दवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रिस्क्रिप्शन आधारित बिक्री से दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगेगी और मरीजों को सही चिकित्सा परामर्श के बाद ही दवा मिल सकेगी।
छिंदवाड़ा हादसे के बाद बढ़ी सख्ती
आम लोगों पर क्या होगा असर ?
नए नियम लागू होने के बाद अब मरीजों को कफ सिरप या अन्य सिरप आधारित दवाएं खरीदने के लिए डॉक्टर का वैध प्रिस्क्रिप्शन दिखाना होगा। मेडिकल स्टोर संचालकों को भी रिकॉर्ड रखने और बिक्री से संबंधित नियमों का पालन करना होगा।
सरकार का मानना है कि यह कदम दवा सुरक्षा, गुणवत्ता नियंत्रण और मरीजों के स्वास्थ्य हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
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