उपायुक्त निशांत यादव ने की किसानों से पराली न जलाने की अपील! सेंटर से कृषि यंत्र लेकर खेत मे ही करें समायोजित

इंडिया ब्रेकिंग/करनाल रिपोर्टर (ब्यूरो) करनाल 27 सितम्बर, खरीफ की मुख्य फसल धान कटाई सीजन के चलते उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने रविवार को जिला के किसानो के लिए एक अपील जारी कर कहा है कि वे फसल कटाई के बाद खेतो में बची पराली या अवशेषों को ना जलाएं, पर्यावरण तथा नई पीढ़ी को सुरक्षित व स्वस्थ बनाने के लिए यह अति जरूरी है।

उन्होंने बताया कि पराली जलाने से वातारण धुएं से भर जाता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत के साथ-साथ हवा जहरीली हो जाती है। खेतो में आग से हवा में प्रदूषण के छोटे-छोटे कणों से पी.एम. 2.5 का स्तर काफी बढ़ जाता है, इससे सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ, दमा और कैंसर जैसी बीमारियां हो रही हैं। उन्होंने इसके दुष्परिणामों को लेकर कहा कि प्रदूषण से प्रकृति के मौसम में बदलाव आ जाता है, जिससे बारिश में कमी आना स्वभाविक है। दूसरी ओर मिट्टी में पाए जाने वाले मित्र कीड़ों की कमी से जमीन की उर्वरा शक्ति क्षीण हो जाती है और इसकी ऊपरी सहत बंजर हो जाती है। परिणामस्वरूप किसान को अगली फसल लेने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, जिससे खाद, बीज व दवाईयों का खर्चा बढ़ जाता है।

उपायुक्त ने कहा कि फसल अवशेषों को न जलाकर उसके कई उपाय किए जा सकते हैं, जिनमें पराली को मशीन से काटकर पशुओं का चारा बनाना, गत्ता मिल में बेचकर धन कमाना, कम्पोस्टिंग करके जैविक खाद बनाना और जीरो टिलेज मशीन से गेहूँ की सीधी बिजाई करना शामिल है। इससे पराली कुछ ही समय में स्वत: नष्ट हो जाती है, जो एक बेहतर जैविक खाद है। इससे राष्ट्रीय कृषि नीति का पालन भी सुनिश्चित होता है।

किसानो के हित में सरकार ने लिए हैं कई फैसले- इस बारे उपायुक्त ने बताया कि करनाल प्रदेश में धान उत्पादक का एक प्रमुख जिला है, इसे धान का कटोरा भी कहा जाता है। पिछले दो-तीन वर्षों से सरकार किसानो के लिए एफ.पी.ओ. और कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने पर काफी जोर दे रही है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष और इस वर्ष में करनाल जिला में ऐसे 419 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित हो चुके हैं।

कृषि बैंक कहे जाने वाले सी.एस.सी. में बेलर, सुपर सीडर, जीरोटिल सीड ड्रिल, चोपर, मल्चर, रोटरी स्लेशर, श्रब मास्टर, रिवर्सिबल बोर्ड प्लो, क्रॉप रीपर तथा हैपी सीडर जैसे 1200 कृषि यंत्र उपलब्ध रहेंगे। सरकार की ओर से इन यंत्रो की खरीद पर 50 प्रतिशत का अनुदान भी दिया जा रहा है। इसके तहत जिला में व्यक्तिगत केटेगरी में करीब 8 करोड़ और सी.एच.सी. में 10 लाख रूपये की सब्सिडी किसानो को दी जाएगी। इन उपायों से छोटे व सीमांत किसानों की फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी तक पहुंच होगी।

किसानो को जागरूक करने के लिए लगाए जा रहे कैम्प- इस बारे उपायुक्त ने बताया कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा जिला के सभी खण्डों में कैम्प लगाए जा रहे हैं, अगले एक पखवाड़े तक इस तरह के कैम्प जारी रहेंगे। किसानो से अपील है कि वे इन कैम्पो में जाकर वहां मौजूद कृषि विशेषज्ञों से फसल अवशेष ना जलाने, उन्हें खेतो में ही समायोजित करने तथा उन्नत खेती के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रयेाग करने की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि जिला के अनेक प्रगतिशील किसान फसल अवशेषों का न जलाकर आधुनिक कृषि यंत्रो से इन सीटू को अपना रहे हैं, दूसरे किसान भी इनका अनुसरण करें।

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण व सर्वोच्च न्यायालय के आदेशो की पालना को लेकर- उपायुक्त ने बताया कि फसल अवशेषों को जलाने से रोकने के लिए जिला में गांव स्तर पर सम्बंधित पटवारी, सरपंच और एडीओ को मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दी गई है। इसी प्रकार खण्ड़ स्तर पर सम्बंधित बीडीपीओ, कानूनगो व खण्ड़ कृषि अधिकारी जिम्मेदार होंगे। जबकि सब डिवीजन लेवल पर सम्बंधित एस.डी.एम. व तहसीलदार मॉनिटरिंग करेंगे।

इसके अतिरिक्त जिला स्तर पर उप कृषि निदेशक व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी जिम्मेवार रहेंगे। उन्होंने कहा कि जो किसान पराली जलाता हुआ पाया गया, तो पर्यावरण के नुकसान की भरपाई के लिए वह स्वयं उत्तरदायी होगा। ऐसी स्थिति में हालांकि प्रति एकड़ व घटना के हिसाब से जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है, लेकिन प्रशासन चाहता है कि देश के अन्नदाता किसान को कोई जुर्माना ना लगाया जाए, बल्कि उन्हें आई.ई.सी. गतिविधियों से जागरूक किया जाए।

Advertisement