किसानों का ऐलान, आंदोलन से नहीं हटेंगे बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं, और बढ़ाई जाएगी…

नई दिल्ली। किसान आंदोलन का आज 49वां दिन है, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी किसानों का आंदोलन जारी है।  दिल्ली के अलग अलग बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसान आज शाम को कृषि कानूनों की कॉपी जलाकर लोहड़ी मनाएंगे। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कानूनों के अमल पर रोक लगाते हुए चार सदस्यों की एक कमेटी बनाई थी।  सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद किसानों ने कहा कि वे किसी भी कमेटी के पास नहीं जाएंगे। किसानों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है।  उधर, हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने एक बार फिर किसानों से आंदोलन खत्म करने का आग्रह किया है।

बातचीत के लिए कमेटी बनाने की केंद्र सरकार की मांग किसान संगठन पहले ही ठुकरा चुके थे। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित चार सदस्यीय कमेटी में शामिल सदस्यों को नए कानूनों का हिमायती बताते हुए भाकियू ने आंदोलन और तेज करने का एलान किया है।

भाकियू के हरियाणा अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा है कि आंदोलन से बुजुर्ग, बच्चे व महिलाएं नहीं हटेंगे। इनकी तादाद पहले की तुलना में दो-तीन गुणा बढ़ाई जाएगी। कानून रद्द होने तक आंदोलन चलता ही रहेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन को और तेज करने के लिए दक्षिण से किसान पहुंच रहे हैं। रेल सेवा बाधित होने के बावजूद आंध्र प्रदेश, ओडिसा व पश्चिम बंगाल के किसान आ चुके हैं। बुधवार शाम तक केरल के किसान भी आ जाएंगे।

किसान संगठन आंदोलन को दो-तीन राज्यों तक सीमित बताने से भी खफा हैं। भाकियू प्रवक्ता राकेश बैंस ने कहा कि हरियाणा में किसानों को लामबंद करने के लिए जनजागरण अभियान चला रहे हैं। अब यह आंदोलन जनांदोलन बन चुका है। संयुक्त किसान मोर्चा के दीपक लांबा ने बताया कि केंद्र सरकार किसानों को अपने जाल में फंसाना चाहती है। किसान अब निरक्षर नहीं रहा, कानूनों में लिखी भाषा को बखूबी समझता है। उसे बरगला नहीं सकते। तीनों कानूनों को किसान पढ़कर अच्छी तरह समझ चुके हैं। आज के किसान के पास एमएससी बीएड के साथ बीटेक व बीएससी एग्रीकल्चर की डिग्री भी है।

हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने कहा कि कानून वैसे तो देशभर के लिए थे, मगर कुछ किसान विरोध तो कुछ पक्ष में थे। सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति को ध्यान में रखते हुए इन पर रोक लगाई है। अब न्यायालय के निर्णय अनुसार आगे का रास्ता निकलेगा। इन्हें कब लागू करना है, नहीं करना, कैसे लागू करना है। अब तो गेंद कोर्ट के पाले में चली गई है। किसानों को भी इंतजार करना चाहिए। कोर्ट जो फैसला करेगा उसके हिसाब से आगे सब कुछ होगा। वह कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। उनकी किसानों से अपील है कि वे अपने धरने को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त कर अपने-अपने घरों को जाएं।

किसान नेताओं ने कहा कि 26 जनवरी के दिन देशभर के किसान दिल्ली पहुंचकर शांतिपूर्ण तरीके से “किसान गणतंत्र परेड” आयोजित करे गणतंत्र का गौरव बढ़ाएंगे।  इसके साथ साथ अदानी अंबानी के उत्पादों का बहिष्कार करने और भाजपा के समर्थक दलों पर दबाव डालने के हमारे कार्यक्रम बदस्तूर जारी रहेंगे। तीनों किसान विरोधी कानूनों को रद्द करवाने और एमएसपी की कानूनी गारंटी हासिल करने के लिए किसानों का शांति पूर्वक एवं लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।

किसान नेताओं ने कहा कि वे 15 जनवरी को सरकार के साथ होने वाली बैठक में शामिल होंगे।  संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा घोषित आंदोलन के कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं है।  आज लोहड़ी पर तीनों कानूनों को जलाने का कार्यक्रम, 18 जनवरी को महिला किसान दिवस मनाने, 20 जनवरी को श्री गुरु गोविंद सिंह की याद में शपथ लेने और 23 जनवरी को आज़ाद हिंद किसान दिवस पर देश भर में राजभवन का घेराव करने का कार्यक्रम जारी रहेगा।

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