स्मार्ट सिटी करनाल में सफाई तंत्र को मिली मजबूती, 40 टिप्परों की खेप में से नए टिप्परों की अराईवल हुई शुरू

इंडिया ब्रेकिंग/करनाल रिपोर्टर (ब्यूरो) करनाल 24 सितम्बर, शहर में सोर्स सैग्रीगेशन को शत प्रतिशत कामयाब करने के लिए अब घर-घर से गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग एकत्र करना आसान होगा। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत नगर निगम को 40 टिप्परों की खेप में से नए टिप्परों की अराईवल शुरू हो गई है। इसे लेकर फिलहाल 7 नए टिप्पर पहुंच गए हैं, 10 इसी सप्ताह और 10 अगले सप्ताह आने की उम्मीद है। इन उपायों से गीला और सूखा कूड़ा अब सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट तक पहुंचाने और उसे प्रोसेसिंग में लेना बेहद कारगर रहेगा।

नए टिप्परों की खासियत- नए टिप्पर पहले से अलग हैं। खास बात यह है कि इनमें गीले और सूखे के लिए अलग-अलग पार्टिशन का प्रोविजन किया गया है। इसके लिए बनाए गए बॉक्स दोनो और से खोले जा सकेंगे। यही नहीं पीछे की साईड में माईक्रो सैग्रीगेशन का भी प्रोविजन किया गया है, जिसमें हैजर्ड्स यानि हानिकारक वेस्ट और बेकार नेपकिन जैसे पदार्थों का डाला जा सकेगा।

घर-घर से कूड़ा एकत्र करने वाले सफाईकर्ताओं का काम भी आसान होगा। वाहन पर जी.पी.एस. सिस्टम के अलावा गलियों में हाऊसहोल्ड को इतला करने के लिए उद्घोषणा सुनाने बाबत छोटे होर्न लगाए गए हैं। जैसे ही टिप्पर गली में पहुंचेगा, गृहणियों को घर से कूड़ा लेकर आने की सूचना मिल जाएगी। जी.पी.एस. सिस्टम से वाहनो की लोकेशन मालूम हो सकेगी, जिससे इनकी कारगुजारी का पता लगेगा।

क्या कहते हैं निगम आयुक्त- शहर की सफाई के लिए पहले से ही मौजूद संसाधनो में 40 नए टिप्पर शामिल हो जाने से दोहरा फायदा होगा। प्रतिदन घर-घर से निकलने वाला कचरा ड्राई और वेट में मिलेगा। इसकी प्रोसेसिंग को लेकर प्लांट में जो समस्या पेश आ रही थी, वह अब स्वत: ही समाप्त हो जाएगी। कूड़ा निस्तारण के लिए स्वच्छ भारत मिशन के कम्पोनेंट में जो नियम बनाए गए हैं, उनका पालन होगा। स्वच्छ सर्वेक्षण में ओर ज्यादा नम्बर मिलेंगे, दूसरा फायदा यह है कि इससे सफाई तंत्र ओर मजबूत होगा।

निगमायुक्त की हाऊस होल्ड से अपील- इस बारे निगमायुक्त निशांत कुमार यादव का कहना है कि नगर निगम ने गीले और सूखे कूड़े को अलग-अलग एकत्र करने के लिए हर तरह के तरीके अख्तयार किए हैं, लेकिन यदि गृहणियां अपने-अपने घरो में एक ही डस्टबिन में गीले और सूखे कचरे को इकठ्ठा करेंगी, उससे सोर्स सैग्रीगेशन प्रभावित होगा। कूड़ा एकत्र करने वाले को गीला और सूखा दोनो अलग-अलग छांटकर टिप्पर में डालने होंगे, इससे टाईम ज्यादा लगेगा और हर घर तक समय में पहुंचने में देरी होगी।

इन सब बातों को देखते गृहणियों का कर्तव्य सबसे महत्वपूर्ण रहेगा। नगर निगम ने पहले ही शहर के करीब 85 हजार हाऊस होल्ड को नीले व हरे रंग के डस्टबिन वितरित किए थे। गृहणियां किसी एक की बजाए दोनो का प्रयोग करें, भले ही कूड़े की मात्रा थोड़ी हो या ज्यादा। उन्होंने कहा कि हर साल देश में स्वच्छ शहरो के होने वाले सर्वेक्षण में टॉप रहने वाले शहरों में नागरिकों का व्यवहार यही बताता है कि वे सोर्स सैग्रीगेशन को लेकर कितने जागरूक हैं और एक स्वच्छता प्रहरी की भूमिका अदा कर रहे हैं।

अब है करनाल की बारी- आयुक्त ने बताया कि देश के टॉप 5 या 10 स्वच्छ शहरो की सूची में शामिल होने के लिए अब करनाल की बारी है। नगर निगम की ओर से किसी भी तरह की कोर-कसर नहीं रखी जा रही, लेकिन नागरिकों की सहभागिता के बिना किसी भी मिशन को शत प्रतिशत सफल नहीं बनाया जा सकता। अब समय आ गया है कि हमारा शहर भी इंदौर की राह पर चले, ऐसा करने से करनाल देश के स्वच्छ शहरो में सिरमौर बन सकता है, इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

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