एक और खतरनाक वायरस बनाने में जुटा चीन, साथी है पाकिस्तान !

नई दिल्ली: कोराना वायरस ने पूरी दुनिया को बड़ा झटका दिया है। लाखों लोगों की मौत हो चुकी है। उद्योग धंधे ठप होने से बेरोजगारी चरम पर है।  अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ती जा रही है। अभी भी प्रतिदिन हजारों लोग कोरोना के शिकार बन रहे हैं।  उधर चीन और पाकिस्तान एक नए तरह का वायरस तैयार करने में जुट गए हैं।

पाकिस्तान की धरती पर साजिश का केन्द्र

नए वायरस प्रोजेक्ट में चीन के उसी ‘वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी'(wuhan institute of virology) का नाम आ रहा है।  जहां से कोरोना वायरस फैला था।  लेकिन इस बार इस बदनाम लेबोरेट्री के वैज्ञानिकों ने पाकिस्तान की जमीन को साजिश का अड्डा बनाया है।

इस साजिश का खुलासा ऑस्ट्रेलिया की एक वेबसाइट The Klaxon ने किया है।  जिसके खोजी पत्रकार और एडिटर एंथोनी क्लान की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी और पाकिस्तानी सेना की Defence Science and Technology Organisation (DESTO) के बीच गुप्त रूप से तीन वर्ष का करार हुआ है।

ये करार जून या जुलाई 2020 में हुआ।  पाकिस्तान की सरकार ने वहां की सेना और वुहान लैब के बीच समझौते की पुष्टि की है और यह स्वीकार किया है कि यह कार्य पाकिस्तान की धरती पर हो रहा है।

ऐसी खबर है कि कोरोना फैलाने के लिए बदनाम वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के वैज्ञानिकों की एक टीम पाकिस्तानी वैज्ञानिकों को खतरनाक विषाणुओं के इस्तेमाल और नियंत्रण की ट्रेनिंग दे रहे हैं।  भारत के लिए यह खतरनाक स्थिति है।  क्योंकि पाकिस्तान के लिए भारत घोषित रुप से शत्रु नंबर एक है।  उसके किसी भी हथियार कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के खिलाफ ही होता है।

मासूम पाकिस्तानी नागरिकों का उपयोग

खबरों के मुताबिक वायरस टेक्नोलॉजी पर पाकिस्तान और चीन की यह विध्वंसक रिसर्च साल 2015 से चल रही है।  इसके तहत वेस्ट नील वायरस, मर्स-कोरोनावायरस, क्रीमिया-कॉन्गो हेमोरेजिक फीवर वायरस, थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम वायरस और चिकनगुनिया जैसे खतरनाक रोगों के वायरस पर रिसर्च किया जा रहा है।

मानव जीवन के लिए बेहद घातक इस प्रयोग के लिए पाकिस्तान के मासूम नागरिकों पर प्रयोग किया जा रहा है।  जिन्हें इस बारे में कुछ पता ही नहीं है।  वायरस पर शोध के लिए हजारों पाकिस्तानी पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के खून के नमूने इकट्ठा किए गए हैं।  जिसमें मुख्य रूप से पाकिस्तान के वो  अशिक्षित ग्रामीण शामिल हैं।  जो शहरों से दूर देहाती इलाकों में पशुओं के साथ रहते हैं।

चीन पाकिस्तान की इस गंभीर साजिश का खुलासा उस स्टडी पेपर से हुआ।  जिसमें चीनी और पाकिस्तानी वैज्ञानिकों द्वारा किए गए पांच अध्ययनों के परिणामों छापा गया था।  इस पेपर में इस स्टडी का उद्देश्य ‘zoonotic pathogens’ का पता लगाना बताया गया है।  यह रिसर्च दिसंबर 2017 से मार्च 2020 तक की गई।

खतरे में पाकिस्तानियों की जान

पाकिस्तान में चीन के भारी हित छिपे हुए हैं।  क्योंकि पाकिस्तान के रास्ते से चीन की महत्वकांक्षी सीपैक रोड परियोजना गुजरती है।  वायरस परियोजना के लिए भी पैसा इसी रोड के फंड से जुटाया गया है।  इसके लिए ‘International Cooperation on Key Technologies of Biosafety along the China-Pakistan Economic Corridor’ के तहत पैसे इकट्ठे किए गए हैं। लेकिन इस प्रयोग के कारण पाकिस्तानी नागरिकों का जान को भारी खतरा है।

क्योंकि दुनिया जानती है कि वुहान की लेबोरेट्री में बना कोरोना वायरस महज एक गलती के कारण वहां के स्थानीय मीट मार्केट तक पहुंच गया।  जिसके बाद इसने उस शहर की आधी से ज्यादा आबादी को खत्म कर दिया।

ऐसे में पाकिस्तान जैसे अविकसित देश में जहां जैविक रूप से संवेदनशील सामग्री के बेहतर रखरखाव के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है।  वहां किसी तरह का हादसा हो गया तो पाकिस्तानी नागरिक खुद को कैसे बचाएंगे।

कोरोना वायरस के लिए चीनियों ने भारत में की थी सैंपलिंग

दुनिया में जब कोरोना वायरस फैल गया था।  तब यह सामने आया था कि कोरोना वायरस तैयार करने के लिए चीन के वायरोलॉजी वैज्ञानिकों ने भारतीय राज्य नागालैण्ड की जमीन का इस्तेमाल किया था।  जिसके लिए भारत और अमेरिका दोनों के वैज्ञानिकों को धोखे में रखा गया था।

नागालैंड में गुप्त रिसर्च

कोरोना वायरस के लिए चीन के वैज्ञानिकों ने उत्तर पूर्वी राज्य नागालैंड में किफिरे जिले के मिमी गांव में गुप्त रिसर्च किया था।

यहां के 18 से 50 साल के 85 लोगों पर परीक्षण किया गया।  नागालैंड के इस गांव में बेहद गोपनीय तरीके से ये शोध किया गया।  जिसका उद्देश्य ये बताया गया कि क्या इंसानों का इम्यून भी वायरस से लड़ने में चमगादड़ों जितना विकसित किया जा सकता है।

इस वजह से चुना गया नागालैंड का मिमी गांव

दरअसल नागालैंड का मिमी गांव चीन की सीमा के काफी नजदीक है।  इस इलाके के जंगलों में ऐसे आदिवासी रहते हैं जो चमगादड़ों का शिकार करते हैं और उसका भोजन के रूप में इस्तेमाल भी करते हैं।  ऐसा माना जाता है इन आदिवासियों का इम्यून सिस्टम भी चमगादड़ों की तरह ही वायरस ले लड़ने के लिए काफी मजबूत है।

लिहाजा चीन ने मिमी गांव में रिसर्च करने की ठानी।  इसके लिए उसने अमेरिका और भारत के कुछ वैज्ञानिकों को ये कहकर साथ लिया कि इस शोध से खतरनाक वायरस का मुकाबला करने की तकनीक विकसित की जा सकती है।

नागालैंड के मिमी गांव इलाके में सैकड़ों की संख्या में चमगादड़ आते हैं और अब तक की वैज्ञानिक शोध से ये साबित हो चुका है कि चमगादड़ खुद बिना प्रभावित हुए इबोला, सार्स या कोरोना के वायरस को अपने शरीर में लंबे समय तक रख सकते हैं। ।  इसलिए दावा किया जाता है कि इस शोध का मकसद इंसान के इम्यून को चमगादड़ों जितना विकसित करना था। ।

अमेरिका से कराई फंडिंग

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक चीन ने इस काम के लिए बेहद शातिर प्लान तैयार किया।  किसी को शक ना हो इसलिए उसने इस रिसर्च में अमेरिका और सिंगापुर के वैज्ञानिकों को भी शामिल कर लिया।

यही नहीं इस काम में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की डिफेन्स थ्रेट रिडक्शन एजेन्सी यानी DTRA के फंड का भी इस्तेमाल किया गया।

दावा है कि इस गोपनीय शोध-अभियान में अमेरिका के यूनिफॉर्म्ड सर्विसेज़ युनिवर्सिटी ऑफ द हेल्थ साइंसेज़ और सिंगापुर के ‘ड्यूक नेशनल युनिवर्सिटी के वैज्ञानिक शामिल थे।  कुछ भारतीय संस्थाओं का नाम भी इस कड़ी में लिया जा रहा है।  लेकिन इनके बारे में विस्तार से रिपोर्ट आनी अभी बाकी है।

इस शोध के परिणाम कई जगह छपे थे

इसी रिपोर्ट के आधार पर बिल गेट्स ने कहा था कि ऐसे वायरस से महामारी फैलने पर दुनिया में लाखों लोग मारे जा सकते हैं।

जाहिर है बिल गेट्स का इशारा कहीं न कहीं कोरोना जैसे वायरस की तरफ ही था जो अब पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।  इसकी वजह है चमगादड़ों के जरिये इंसानों पर होने वाले वो शोध जिसका एक हिस्सा नगालैंड के मिमी जैसे गांव में किए जाने के भी दावे हो रहे हैं।

पूरे मामले से इस तरह पर्दा उठा

बिल गेट्स की रिसर्च मैगजीन में ये शोध रिपोर्ट छपने के बाद भारत सरकार हरकत में आई।  इस शोध के लिए  भारत सरकार से इसकी कोई औपचारिक इजाजत नहीं ली गई थी।  ये रिसर्च साल 2017 में की गई थी।  जिसके बारे में खुलासा होने पर भारत सरकार ने संज्ञान लिया और जांच कराई।

ये जांच इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की पांच सदस्यों की टीम ने की थी।  जिसने यह पाया कि नागालैंड के मिमी गांव में सरकार की इजाजत के बिना गुप्त शोध परीक्षण का काम चल रहा था।

चोरी से चीन ने तैयार किया वायरस

एक वरिष्ठ पत्रकार ने दावा किया है कि अमेरिका के हावर्ड यूनिवर्सिटी से चुराये सैंपल्स और नगालैंड में किए गए शोध के आधार पर चीन की वुहान यूनिवर्सिटी में कोरोना वायरस डेवलप किया गया।

साथ ही ये भी दावा किया जा रहा है कि वहीं पर सैंपल की जार गिर कर टूट गई।  जिसके बाद ये वायरस इंसान की कैद से आजाद होकर पूरी दुनिया में फैल गया।

अब चीन फिर से पाकिस्तान के साथ मिलकर कोरोना जैसा ही घातक वायरस फैलाने की साजिश रच रहा है।  ऐसे में इसका अंजाम बेहद भयावह हो सकता है।

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