आज से सस्ते में सोना खरीदने का मौका, टैक्स छूट से लेकर डिस्कांउट तक, ये रही पूरी जानकारी

नई दिल्ली. सावरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) का 10वां ट्रांच आज से खुल रहा है. नये कैलेंडर ईयर में यह पहला मौका होगा, जब लोगों को कम दाम में अपनी सहूलियत के हिसाब से सोना खरीदने का मौका मिल रहा है. आज यानी 11 जनवरी से शुरू हो रहा सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सब्सक्रिप्शन (Gold Bond Subscription Date) 15 जनवरी तक के लिए खुला रहेगा. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने SGB के 10वें ट्रांच के लिए भाव 5,104 रुपये प्रति ग्राम तय किया है. इसके साथ ही ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन और डिजिटल पेमेंट पर ग्राहकों को प्रति ग्राम 50 रुपये की स्पेशल छूट मिलेगी. जानकारों का मानना है कि गोल्ड में निवेश करने का सबसे बेहतर तरीका एसजीबी ही है.

गोल्ड बॉन्ड पर सालाना 2.5 फीसदी का ब्याज मिलेगा. निवेशकों को गोल्ड बॉन्ड के बदले लोन लेने की भी सुविधा है. पूंजी और ब्याज दोनों की सरकारी (सॉवरेन) गारंटी मिलती है. इंडिविजुअल को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स नहीं देना होगा. कर्ज लेने के लिए गोल्ड बॉन्ड का इस्तेमाल कोलेट्रल के रूप में किया जा सकता है. इसके अलावा गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने पर टीडीएस (TDS) भी नहीं कटता है. इस स्कीम के तहत न्यूनतम 1 ग्राम सोने में निवेश किया जा सकता है.

क्या है मैच्योरिटी की शर्तें?

गोल्ड बॉन्ड्स की मैच्योरी अवधि 8 साल की होती है. हालांकि, निवेश के पांचवें साल के बाद ​इससे बाहर निकला जा सकता है. मैच्योरिटी पर मिलने वाले गोल्ड का भाव तत्कालीन भाव के आधार पर ही होता है. अगर आप भी इसमें निवेश करना चाहते हैं तो सबसे पहले इन बातों को जान लेना चाहिए.

एक साल में अधिकतम कितना निवेश कर सकते हैं?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम में एक वित्तीय वर्ष में एक व्यक्ति अधिकतम 400 ग्राम सोने के बॉन्ड खरीद सकता है. वहीं न्यूनतम निवेश एक ग्राम का होना जरूरी है.इस स्कीम में निवेश करने पर आप टैक्स बचा सकते हैं. बॉन्ड को ट्रस्टी व्यक्तियों, HUF, ट्रस्ट, विश्वविद्यालयों और धर्मार्थ संस्थानों को बिक्री के लिए प्रतिबंधित किया जाएगा.

आरबीआई ने गोल्ड बॉन्ड के तहत सोने का भाव इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा पब्लिश की जाने वाली औसत क्लोजिंग प्राइस के आधार पर तय की है. यह 999 शुद्धता वाले सोने के लिए है.

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम को नवंबर 2015 में लॉन्च किया गया था. देश में फिजिकल गोल्ड की मांग को कम करने और लोगों को गोल्ड के जरिए घरेलू बचत और वित्तीय बचत के लिए शुरू किया था.

गोल्ड बॉन्ड को स्मॉल फाइनेंस बैंकों या पेमेंट बैंकों, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन आफ इंडिया, पोस्ट ऑफिस, व NSE और BSE के जरिए निवेश किया जा सकता है.

जानकारों का मानना है कि नॉन-फिजिकल गोल्ड में निवेश करने के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड एक प्रभावी तरीका है. अगर गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने वाला मैच्योरिटी तक रुकता है तो उन्हें इसके कई फायदे मिलते हैं.

गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने की सबसे खास बात है कि इसके स्टोरेज की चिंता नहीं करनी होती है. इसे डीमैट में रखने पर कोई जीएसटी भी देय नहीं होता है.

अगर गोल्ड बॉन्ड के मैच्योरिटी पर कोई कैपिटल गेन्स बनता है तो इसपर छूट मिलेगी. गोल्ड बॉन्ड पर मिलने वाली यह एक एक्सक्लुसिव लाभ है.

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