जॉनसन बेबी पाउडर में कैंसर के तत्व पाए जाने के मामले में कंपनी को लगा तगड़ा झटका

जॉनसन एंड जॉनसन के बेबी पाउडर में कैंसर के तत्व होने के मामले में कंपनी के खिलाफ कई केस दर्ज हो चुके हैं। अब इन केस का निपटारा करने के लिए जॉनसन एंड जॉनसन ने बड़ी रकम अदा करने का फैसला लिया है। दरअसल ‘डेली मेल’ में छपी खबर के अनुसार इस मामले में कंपनी पर अब तक लगभग 19,000 से अधिक मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, जो दावा करते हैं कि कंपनी के  में उपलब्ध ‘एस्बेस्टस’के कारण कई लोगों को कैंसर हुआ है।

हालांकि कंपनी ने जवाब में जॉनसन एंड जॉनसन पाउडर में एसबेस्टस होने के दावे को खारिज किया था। कंपनी ने एक बयान में कहा है, ‘कुछ मामलों में हम मुकदमों को निपटाने के लिए तैयार हैं। हालांकि यह कोई ‘दायित्व’ नहीं है। कंपनी अपने उत्पादों की सुरक्षा के लिए अपनाए जा रहे उपायों में कोई बदलाव नहीं कर रही।

गौरतलब है कि मई में जॉनसन एंड जॉनसन ने कहा था कि वह अमेरिका और कनाडा में अपने प्रोडक्ट्स को बेचना बंद कर देगी। क्योंकि उनके उत्पाद के बारे में ‘गलत सूचना’ फैलाई जा रही है जिस कारण मांग में गिरावट आई है। दरअसल जॉनसन एंड जॉनसन बेबी पाउडर में कैंसर के तत्व होने के मामले में दर्ज 1000 केसों के निपटारे में 10 करोड़ रुपए से अधिक हर्जाना भरेगी। बता दें कि कंपनी ने महामारी के कारण हुए एक परीक्षण के दौरान समझौता वार्ता आयोजित की।

समझौते में लैनियर लॉ फर्म, सीमन्स हैनली कॉनरॉय और साइमन ग्रीनस्टोन पैनाटियर के मामले शामिल थे। मार्क लैनियर ने जॉनसन एंड जॉनसन के खिलाफ 2018 में  4.7 बिलियन डॉलर हर्जाने का का केस जीता था, कंपनी ने इस मामले में दोबारा अपील की थी। इस मुकदमे में लैनियर ने तर्क दिया था कि जॉनसन एंड जॉनसन के अधिकारियों को पता था कि आंतरिक परीक्षण में एस्बेस्टस पाया गया है। लेकिन इसे 40 से अधिक वर्षों तक सार्वजनिक नहीं किया गया।

वहीं कंपनी ने सिमंस हैनली द्वारा किए गए 75 से अधिक केस भी निपटाए. सेंट लुइस, मिसौरी में एक तीसरे फैसले में 22 वादियों को कुल 4.69 बिलियन डॉलर का हर्जाना देना पड़ा। हालांकि जॉनसन एंड जॉनसन 2018 में एक जांच रिपोर्ट के बाद बेबी पाउडर को लेकर जांच का सामना कर रही है। इस जांच रिपोर्ट में पाया गया था कि कंपनी दशकों से जानती थी कि उसके उत्पाद में एस्बेस्टस है। इसका सबसे पुराना उल्लेख 1957 और 1958 के दस्तावेजों में मिला है।

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