कोरोना के चलते रेलवे का बड़ा फैसला

कोरोना से बचाव के लिए रेलवे ने ट्रेनों के एसी कोच से कंबल हटा दिए हैं। अब मांगने पर ही कंबल मिलेंगे। प्रथम श्रेणी कोच की खिड़कियों से पर्दे भी हटा दिए गए। कोच अटेंडेंट को सैनेटाइजर भी दिया जा रहा है। यात्रियों को चादर और तकिया पहले की तरह मिलती रहेगी। वातानुकूलित कोच का तापमान भी 25 डिग्री सेल्सियस रखा जाएगा।

रविवार को कैंट रेलवे स्टेशन पर बेगमपुरा, महाकाल एक्सप्रेस सहित अन्य कई ट्रेनों में कंबल नहीं दिए गए। उत्तर रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी दीपक कुमार ने बताया कि अगले आदेश तक यही व्यवस्था रहेगी। कोच अटेंडेंट को साफ-सुथरे कंबल रखने के निर्देश दिए गए हैं। यात्रियों की मांग पर कोच अटेंडेंट कंबल उपलब्ध कराएंगे। कैंट रेलवे स्टेशन से वातानुकूलित कोच वाली लगभग 80 ट्रेनें रोजाना गुजरती हैं।

महाकाल एक्सप्रेस में बेडशीट की कमी

वाराणसी से इंदौर के बीच चलने वाली काशी महाकाल एक्सप्रेस में बेडशीट की कमी है। काशी से लखनऊ, लखनऊ से कानपुर और झांसी से भोपाल के बीच अधिकतर यात्रियों के चढ़ने और उतरने के दौरान चादर व तकिया खत्म हो जा रहे हैं। चादर और तकिया के लिए रोजाना किचकिच हो रही है। बेडशीट उपलब्ध कराने वाली कंपनी ने सात अप्रैल से पहले बेडरोल उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई है। आईआरसीटीसी अधिकारियों के अनुसार, जल्द ही कमी दूर कर दी जाएगी।

पांच दिन में 798 यात्रियों ने निरस्त की यात्रा

पहले 10 से 20 टिकट निरस्त होते थे, मगर कोरोना के डर के कारण इनकी संख्या बढ़कर 200 से 300 हो गई है। कैंट रेलवे स्टेशन के पीआरएस इंचार्ज के अनुसार, 10 मार्च से 14 मार्च के बीच 798 यात्रियों ने अपने टिकट निरस्त कराए। 10 मार्च को 43, 11 मार्च को 106, 12 मार्च को 140, 13 मार्च को 323 और 14 मार्च को 186 यात्रियों ने यात्रा निरस्त कर दी।

यात्री सोनी बरनवाल ने बताया कि कोरोना से बचाव के लिए ट्रेनों में साफ-सफाई होना बहुत जरूरी है। कंबल हटाने का निर्णय अच्छा है। रूपेश कुमार ने कहा कि कंबल व पर्दे हटाना ठीक है। मगर, चादर और तकिया भी साफ-सुथरे मिलने चाहिए। डॉ. आशुतोष मिश्रा बताते हैं कि चादर व तकिया भी ठीक ढंग से धुले होने चाहिए, सिर्फ कंबल हटाने से कोई फायदा नहीं है।

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