इस जाने माने विश्वविद्यालय ने इतने असिस्टेंट प्रोफेसर को नौकरी से हटाया

भोपाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रम मंत्रालय के आदेशों को दरकिनार करते हुए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) ने लॉकडाउन के दौरान ही संविदा सहायक प्राध्यापकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है| 8 सालों से काम कर रहे संविदा सहायक प्राध्यापकों की सेवाओं को विश्वविद्यालय प्रबंधन ने समाप्त कर दिया है| कोरोना काल के इस संकट के दौर में बाहर का रास्ता दिखाए जाने से नाराज संविदा सहायक प्राध्यापकों ने ट्विटर पर कैंपेन की शुरुआत की है|

85 संविदा सहायक प्राध्यापकों को किया बाहर

राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में यूआईटी शाखा में कार्यरत 85 संविदा सहायक प्राध्यापक पिछले 8 सालों से छात्र-छात्राओं को पढ़ाने का काम कर रहे हैं| लॉक डाउन के दौरान 15 मई को अचानक से आदेश जारी किया गया, जिसमें 85 संविदा सहायक प्राध्यापकों को एक महीने का ब्रेक देने की बात कही गई है| विश्वविद्यालय प्रबंधन ने कहा है कि अभी एक महीने कोई काम नहीं होने के चलते आप सभी को ब्रेक किया जा रहा है| 16 जून से आप सभी को रखने की अनुशंसा की जाएगी| बाहर का रास्ता दिखाए जाने से संविदा सहायक प्राध्यापक बेहद नाराज है और अभियान के जरिए विश्वविद्यालय प्रबंधन से वापसी को लेकर आंदोलन की शुरुआत की है|

ट्विटर पर की कैंपेन की शुरुआत

प्रांतीय तकनीकी अतिथि एवं संविदा प्राध्यापक कल्याण संघ के जिला अध्यक्ष आशीष भट्ट का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि लॉक डाउन के दौरान किसी की नौकरी नहीं जाएगी| आरजीपीवी प्रबंधन ने पीएम मोदी और श्रम मंत्रालय के कानूनों का उल्लंघन करके लॉक डाउन के इस दौर में संविदा सहायक प्राध्यापकों को नौकरी से बाहर कर दिया है| सहायक प्राध्यापकों ने विरोध में ट्विटर पर एक कैंपेन की शुरुआत की है, जिसमें पीएम मोदी को भी ट्विटर के जरिए लॉक डाउन के बीच में आरजीपीवी में कार्यरत संविदा प्राध्यापकों को बाहर करने की बात पहुंचाई जा रही है| संविदा सहायक प्राध्यापको ने काली पट्टी और काला मास्क पहनकर विरोध में अभियान की शुरुआत की है|

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छात्रों का नहीं हुआ है कोर्स पूरा

ऑनलाइन क्लासेज के बीच हटाया गया प्राध्यापकों कोयूआईटी में कार्यरत संविदा सहायक अध्यापकों का कहना है कि छात्र-छात्राओं का कोर्स भी पूरा नहीं हुआ है और लॉक डाउन के बीच में ऑनलाइन क्लासेज के माध्यम से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पूरी करवा रहे हैं| एक महीने के ब्रेक की जरूरत ही नहीं है, क्योंकि इस दौरान ऑनलाइन क्लासेस के जरिए छात्र छात्राओं की आने वाले सेमेस्टर का कोर्स पूरा करवाने की कोशिश की जा रही है| अब तक कोर्स भी पूरा नहीं हो सका है, उसके पहले ही आधी-अधूरी पढ़ाई बीच में छोड़ते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अजीबोगरीब आदेश पारित कर बाहर का रास्ता दिखा दिया है|

इन अध्यापकों को बाहर करने पर लगी रोक

यूआईटी के बाहर किए गए संविदा सहायक प्राध्यापकों के विरोध के बाद अब 55 दूसरे विभाग के प्राध्यापकों की हटाने के आदेश पर फिलहाल रोक लग गई है| 85 प्राध्यापकों के साथ 55 और दूसरे विभाग के संविदा प्राध्यापकों को बाहर किए जाने की तैयारी थी| लेकिन बढ़ते हुए विरोध के चलते विश्वविद्यालय प्रबंधन ने फिलहाल आदेश पर रोक लगा दी है|

बहाली ना होने तक जारी रहेगा आंदोलन

संविदा सहायक प्राध्यापकों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इस हालात में नौकरी से बाहर कर हमारे साथ अन्याय किया है| अन्याय के विरोध में और बहाली ना होने तक टि्वटर के जरिए विश्वविद्यालय प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा|

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