आडवाणी समेत सभी 32 आरोपी बाबरी विध्वंस केस में बरी, जानिए 1528 से 2020 तक की कहानी

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में भाजपा के सीनियर लीडर लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत 32 लोगों को सीबीआई की विशेष अदालत ने बरी कर दिया है. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सिर्फ तस्वीरों से कुछ साबित नहीं होता है. भीड़ वहां पर अचानक से आई और भीड़ ने ही ढांचे को गिरा दिया.

कोर्ट ने ये भी कहा कि जिन 32 लोगों का नाम इस केस में शामिल किया गया, उन्होंने भीड़ को काबू करने की कोशिश की. अब जब बाबरी के ढांचे के गिराए जाने के 28 साल बाद इस केस का फैसला आ चुका है, तब जानना सामयिक रहेगा कि आखिर इस केस में कब-कब क्या हुआ और क्या है इस केस की पूरी Timeline.

  • 1528 : मुगल बादशाह बाबर के सेनापति मीर बकी ने अपने राजा के आदेश पर बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया था.
  • 1885 : महंत रघुबीर दास ने फैजाबाद जिला अदालत में याचिका दायर कर बाबरी मस्जिद ढांचे के बाहर शामियाना तानने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने याचिका खारिज किया.
  • 1949 : विवादित ढांचे के बाहर केंद्रीय गुंबद के अंदर रामलला की मूर्तियां लगाई गईं.
  • 1950 : रामलला की मूर्तियों की पूजा का अधिकार हासिल करने के लिए गोपाल सिमला विशारद ने फैजाबाद जिला अदालत में याचिका दायर की.
  • 1950 : परमहंस रामचंद्र दास ने पूजा जारी रखने और मूर्तियां रखने के लिए याचिका दायर की.
  • 1959 : निर्मोही अखाड़ा ने जमीन पर अधिकार दिए जाने के लिए याचिका दायर की.
  • 1981: उत्तर प्रदेश सुन्नी केंद्रीय वक्फ बोर्ड ने स्थल पर अधिकार के लिए याचिका दायर की.
  • 1986 : स्थानीय अदालत ने सरकार को हिंदू श्रद्धालुओं के लिए स्थान खोलने का आदेश दिया.
  • 1986: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने विवादित ढांचे के लिए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया.
  • 1989: तात्ककालिक प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने विश्व हिंदू परिषद को मंदिर के शिलान्यास कार्यक्रम की अनुमति दी
  • 1990 : बाबरी मस्जिद गिराने की पहली कोशिश नाकाम रही, राज्य और केंद्र सरकार इसे रोकने में कामयाब रही
  • 1992: बाबरी मस्जिद को कारसेवकों ने गिरा दिया. इस मामले में 2 FIR (197/1992, 198/1992) दर्ज हुईं.
  • FIR 197/1992 हजारों कारसेवकों के खिलाफ दर्ज की गई थी. उन पर चोरी डकैती और हिंसा जैसे आरोप लगाए गए थे
  • FIR 198/1992 में आडवाणी, जोशी और उमा समेत अन्य पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप के तहत मामला दर्ज हुआ था.
  • इसी साल बाबरी मस्जिद गिराए जाने के 10 दिन बाद मामले की जांच के लिए लिब्राहन कमीशन की नियुक्ति की गई
  • 1996: 9 अन्य अभियुक्तों के खिलाफ पूरक चार्जशीट फाइल की.
  • 1997: जज ने सभी अभियुक्तों को आरोप निर्धारण के लिए तलब किया.
  • 2003: रायबरेली की स्पेशल कोर्ट ने आडवाणी समेत आठ लोगों के खिलाफ भड़काऊ भाषण का मुकदमा बहाल करने को कहा.
  • 2005: आडवाणी समेत आठ लोगों पर रायबरेली कोर्ट में मुकदमा बहाल हो गया.
  • 2010: लखनऊ कोर्ट ने जीवित बचे अभियुक्तों को तलब कर उनके खिलाफ आरोप निर्धारित किए और 17 साल बाद ट्रायल शुरू हुआ
  • 2011: सुप्रीम कोर्ट में अपील करके मांग की है कि आडवाणी समेत अन्य अभियुक्तों के खिलाफ विवादित ढांचा  गिराने के षड्यंत्र एवं अन्य धाराओं में मुकदमा चलाया जाए
  • 2017: सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सीबीआई की विशेष  अदालत में स्थानांतरित कर दिया. इसी साल इस मामले में अभियोजन की कार्यवाही शुरू हुई
  • 13 मार्च, 2020: सीबीआई की गवाही की प्रक्रिया व बचाव पक्ष की जिरह भी पूरी, 351 वाह व 600 दस्तावेजी साक्ष्य सौंपे.
  • 04 जून, 2020: अभियुक्तों का सीआरपीसी की धारा 313 के तहत बयान दर्ज होना शुरू
  • 2020: 32 में  31 अभियुक्तों के  सीआरपीसी की धारा 313 के तहत बयान दर्ज होने की कार्यवाही पूरी. जबकि  एक अभियुक्त ओम प्रकाश पांडेय फरार घोषित हुए.
  • 18 अगस्त, 2020: सीबीआई ने 400 पन्नों की लिखित बहस दाखिल की. बहस की प्रति बचाव पक्ष को भी मुहैया कराई गई.
  • 26 अगस्त, 2020: बचाव पक्ष  को लिखित बहस दाखिल करने का अंतिम मौका दिया गया.
  • 31 अगस्त, 2020: सभी अभियुक्तों की ओर से लिखित बहस दाखिल हई, बहस की प्रति अभियोजन को भी मुहैया कराई गई.
  • 01 सितंबर, 2020: को दोनों पक्षों  की मौखिक बहस भी पूरी.
  • 16 सितंबर, 2020: अदालत ने 30 सितंबर को अपना फैसला सुनाने का आदेश  जारी किया.
  • 30 सिंतबर, 2002: सीबीआई की विशेष अदालत ने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार समेत सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया.

बाबरी विध्वंस: किस-किस को कोर्ट ने बरी किया:

लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, महंत नृत्य गोपाल दास, डॉ. राम विलास वेदांती, चंपत राय, महंत धर्मदास, सतीश प्रधान, पवन कुमार पांडेय, लल्लू सिंह, प्रकाश शर्मा, विजय बहादुर सिंह, संतोष दुबे, गांधी यादव, रामजी गुप्ता, ब्रज भूषण शरण सिंह, कमलेश त्रिपाठी, रामचंद्र खत्री, जय भगवान गोयल, ओम प्रकाश पांडेय, अमर नाथ गोयल, जयभान सिंह पवैया, महाराज स्वामी साक्षी, विनय कुमार राय, नवीन भाई शुक्ला, आरएन श्रीवास्तव, आचार्य धर्मेंद्र देव, सुधीर कक्कड़ और धर्मेंद्र गुर्जर.

बाबरी विध्वंस: कोर्ट ने अपने फैसले में क्या-क्या कहा?

सीबीआई द्वारा लगाए गए आरोपों के खिलाफ ठोस सबूत नहीं है.

कुछ अराजक तत्वों द्वारा इस कार्य को अंजाम दिया था.

फोटो, वीडियो, फोटोकॉपी में छेड़छाड़ हुई, ये सही साक्ष्य नहीं.

सिर्फ तस्वीरों के आधार पर ही किसी को दोषी नहीं बनाया जा सकता.

आरोपी बनाए गए लोगों ने बाबरी के ढांचे को बचाने की कोशिश की

भीड़ ने मौके पर अचानक से पहुंचकर ढांचा को गिरा दिया

ये घटना पूर्व नियोजित नहीं थी, इसे रोकने का प्रयास किया गया

वीएचपी के प्रमुख रहे अशोक सिंघल के खिलाफ भी कोई सबूत नहीं हैं

गौरतलब हो कि अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को ढहाए गए विवादित ढांचे के इस केस के फैसले का लोगों कों दशकों से इंतजार था. इस मामले में कुल 49 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी. इनमें से 17 का निधन हो चुका है. इसी क्रम में अब सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया है.

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