हरियाणा के पीने वाले सावधान, विदेशी ब्रांड की बोतलों में मिल रही है मिलावटी शराब

अंबाला। हरियाणा शराब घोटाले और जहरीली शराब कांड को लेकर जांच में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। शराब माफिया और घोटालेबाज नए तरीकाें से लोगाें की जान से खिलवाड़ कर रहे थे। जांच में खुलासा हुआ है कि घोटालेबाज विदेशी ब्रांड की शराब के बाेतलों में मिलावटी शराब भरकर सप्‍लाई करते थे।

पानीपत, सोनीपत और फरीदाबाद में जहरीली शराब पीकर 47 लोगों की मौत की जांच में विदेशी ब्रांड की खाली बोतलों में मिलावटी शराब तस्करी का पर्दाफाश हुआ है।

विशेष जांच दल (एसआइटी) ने जब दूसरे राज्यों की पुलिस से पत्राचार किया तो इसका खुलासा हुआ। हरियाणा से दूसरे राज्य में इस तरह की शराब भेजी गई, जिसकी पुष्टि दिल्ली  पुलिस ने की। होटलों और रेस्टोरेंटों में भी विदेशी शराब परोसने से राज्य सरकार को भारी राजस्व मिलता है।

 मार्च 2017 में आबकारी एवं कराधान विभाग के आयुक्त ने दो अधिकारियों की टीम गठित कर विदेशी शराब कितनी आई और कितनी बिकी, का रिकॉर्ड खंगालने के आदेश दिए थे। तीन साल तक यह मामला अफसरों की फाइलों में ही दबा रहा, जिसके चलते 10 जून 2020 को फिर से रिमाइंडर देकर जांच के आदेश दिए।

सूत्रों के मुताबिक एसआइटी ने विदेशी शराब को लेकर भी आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों से कुछ बिंदुओं पर जवाब मांगा था, लेकिन आरोप है कि सहयोग नहीं किया गया। यह भी बताया जा रहा है कि एसआइटी ने आबकारी और पुलिस विभाग के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। अप्रैल 2019 से लेकर नवंबर 2020 तक का रिकॉर्ड आबकारी विभाग से लिया गया है। इसलिए इस कार्यकाल में रहे कनिष्ठ से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों पर कानूनी तलवार लटकी है।

आबकारी विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2016-17 में विदेशी शराब से 12 करोड़ 80 लाख 67 हजार 111 रुपये, वर्ष 2017-18 में 2 करोड़ 69 लाख 3 हजार 787 रुपये, वर्ष 2018-19 में 5 करोड़ 30 लाख, 40 हजार 918 रुपये, वर्ष 2019-20 में 43 करोड़ 51 लाख 95 हजार 443 रुपये तथा वर्ष 2020-21 में अब तक 25 करोड़ 47 लाख 45 हजार 76 रुपये राजस्व मिला है।

वर्ष 2017-18 व 2018- 19 में आबकारी विभाग की पॉलिसी में असेस्मेंट फीस नहीं लगती थी, जिस कारण आय घटी थी। वर्ष 2020-21 में विदेशी शराब का निर्धारित कोटा 1.60 लाख पेटी और बीयर 1.12 लाख पेटी, वाइन 48 हजार पेटी है।

शराब फैक्ट्रियों से पहले एक ही परमिट पर दो से तीन गाडिय़ां निकल जाती थीं, जबकि सरकार को एक ही गाड़ी का राजस्व मिलता था। यह शराब हरियाणा सहित गुजरात, दिल्ली, बिहार, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में बेची जाती थी। विभाग के आंकड़े बयां कर रहे हैं कि कभी निर्धारित कोटे से अतिरिक्त कोटा नहीं उठा।

फैक्ट्री से एक पेटी देसी शराब पर 363 रुपये के करीब एक्साइज ड्यूटी और वैट टीसीएस परमिट फीस लगती है 135 रुपये अतिरिक्त उत्पादन शुल्क मिलता है यानि 498 रुपये सरकार को एक पेटी पर राजस्व आता है, लेकिन आमतौर पर दो नंबर की शराब की पेटी 300 से 350 रुपये में मिल जाती है।

इसी प्रकार अंग्रेजी शराब की बोतल पर 1300 रुपये से लेकर 4345 रुपये एक पेटी पर राज्य सरकार को राजस्व आता है। यदि दूसरे राज्यों में शराब तस्करी की जा रही है तो प्रत्येक पेटी से आने वाला राजस्व जीरो रहता है।

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