हॉस्टल में एक रुम में एक विद्यार्थी का फार्मूला लागू, मैस का टाइम भी बड़ा

रोहतक. अनलॉक 1.0 में अब विश्वविद्यालयों में भी नया सत्र शुरु होने का समय आ गया है। इसके लिए अब एमडीयू की ओर से हॉस्टल में ठहरने वाले स्टूडेंट्स के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर यानि एसओपी तैयार की जा रही है। नए सत्र की एसओपी के ड्राफ्ट को पूरा करने से पहले इसकी एक रिहर्सल फाइनल ईयर स्टूडेंट्स के परीक्षा के जरिए ही पूरी कर ली जाएगी, ताकि आने वाली दिक्कतों को नए सत्र में दूर किया जा सके। नई एसओपी के तहत अब हॉस्टल में एक कमरे में दो स्टूडेंट्स नहीं रह पाएंगे, उनके बीच सोशल डिस्टेंसिंग की पालना को देखते हुए एक रूम-एक स्टूडेंट्स के कल्चर पर काम किया जा रहा है।

इसी तरह से पूरे हॉस्टल की व्यवस्था ही बदल जाएगी और भविष्य में कोरोना काल खत्म होने तक हॉस्टल की क्षमता भी घट सकती है। एमडीयू में लडकों के 10 व लड़कियों के 9 हॉस्टल हैं। इनमें 5300 के करीब विद्यार्थियों के रहने की क्षमता है।

फाइनल ईयर स्टूडेंट्स की परीक्षा पहली चुनौती : स्टूडेंट्स को हॉस्टल में भी आइसोलेशन की व्यवस्था देने के लिए एमडीयू ने इंतजाम करने शुरु कर दिए हैं। नई एसओपी के तहत बाथरूम व वॉशरूम का भी इस्तेमाल करने में अब बदलाव कर दिया जाएगा। हॉस्टल की तीन मंजिला इमारत में हर मंजिल पर 30 से 40 बाथरूम व वॉशरूम बनाए गए हैं। अब एक-एक मंजिल पर बने कमरों के हिसाब से आसानी से इनका प्रयोग किया जा सकेगा और समयानुसार सेनिटाइजेशन भी कर सकेंगे।

इससे पहले विवि के पास सबसे बड़ी चुनौती फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स की परीक्षा करवाना है, ताकि वे अपना आगामी कॅरियर शुरु कर सके। हालांकि पीजी के प्रीवियस व यूजी के प्रथम और द्वितीय वर्ष के स्टूडेंट्स की परीक्षा को लेकर गाइडलाइन आनी बाकी है, फिलहाल फाइनल ईयर की परीक्षा का रास्ता लगभग साफ हो गया है। फाइनल ईयर की परीक्षा देने आने वाले स्टूडेंट्स को हॉस्टल के कमरों में एक-एक ठहराया जाएगा और परीक्षा खत्म होते ही उन्हें घर भेज दिया जाएगा, यानि पांच परीक्षा में लगने वाले समय तक ही स्टूडेंट्स हॉस्टल में ठहरेंगे।

हॉस्टल में अभी 17 विदेशी छात्र ठहरे : हालांकि एमडीयू में अभी भी 17 विदेशी छात्रों को सुरक्षित रखा गया है। विवि में 48 स्टूडेंट्स को हॉस्टल में ठहराया गया था, इनमें से 31 अपने देश लौट चुके हैं। अब यहां पर बचे हुए 17 स्टूडेंट्स को भी एक-एक कमरे में ही एक स्टूडेंट को ठहराया गया है। इसके लिए दिन में दो बार स्टूडेंट्स की थर्मल स्कैनिंग की जाती है। इसके अलावा उनसे वार्डन बार-बार हाल चाल जानते रहते हैं। जरुरत पड़ते ही एमडीयू कैंपस में बने हेल्थ सेंटर में तैनात डॉक्टरों से इलाज भी करवाया जाता है। रूम को भी सेनिटाइजेशन करने के लिए प्रबंध कर दिए गए हैं।

मैस में अपनानी होगी सोशल डिस्टेंसिंग: अब हॉस्टल में बनी हुई मैस में खाना खाने के सिस्टम का भी बदलाव किया जाएगा। हालांकि अब तक हॉस्टल के मैस में एक समय में 70 स्टूडेंट्स एक ही बार में खाना खाते हैं और खासतौर से एक-दूसरे साथ साझा करके भी खाना खाते रहे हैं। अब इस सिस्टम को बदलाव कर एक बार में 24 या 35 स्टूडेंट्स को ही सोशल डिस्टेंसिंग से बैठकर खाना खाने की व्यवस्था बनाई जा रही है। बीच में एक-एक कुर्सी को हटाकर इसके लिए सीटिंग प्लान तैयार किया जाएगा।

वहीं मैस में अभी दो घंटे के लिए ही टाइमिंग तय की गई है। यानि ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर के लिए किसी भी स्टूडेंट्स को खाना खाने के लिए मैस में आना है तो वह दो घंटे के दौरान ही आकर खा सकता है, इसके बाद मैस बंद कर दी जाती है। अब इसे तीन घंटे करने की तैयारी है। एडिशनल चीफ वार्डन डॉ. राहुल ऋषि और डॉ. दलीप सिंह समेत 10 वार्डन की ओर से बैठक कर इसके लिए तैयारियां भी शुरु कर दी गई है।

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