हवा को प्रदूषित करने वाली निर्माण कंपनियों पर होगा केस दर्ज जानिए जुर्माना: DC नितीश कुमार यादव

भवन निर्माण के दौरान उठने वाली धूल-मिट्टी से हवा को प्रदूषित करने वाली निर्माण कंपनियों की जिला स्तरीय मॉनिटरिंग टीम करेगी रैगूलर मॉनिटरिंग, दोषी पाए जाने पर नोटिस और केस होगा दर्ज, कैद और जुर्माना दोनों हो सकते हैं : उपायुक्त एवं जिला मॉनिटरिंग टीम के अध्यक्ष निशांत कुमार यादव।

करनाल 2 दिसम्बर, भवन निर्माण के दौरान प्रदूषण को रोकने के लिए गठित राज्य पर्यावरण प्रभाव आंकलन प्राधिकरण (एसईआईआईए) के नियमों की अनुपालना न करने वाली कंपनियों पर शिकंजा कसने के लिए अब प्राधिकरण से जुड़ी जिला निगरानी टीम हर महीने निर्माण स्थलों पर जाकर निरीक्षण करेगी। निरीक्षण के दौरान कमियां पाए जाने पर पहले नोटिस और फिर केस बनाया जाएगा।

उपायुक्त निशांत कुमार यादव जो जिला निगरानी समिति के अध्यक्ष भी हैं, ने बुधवार को इस संबंध में बुलाई गई मीटिंग के हवाले से बताया कि मौजूदा दौर में पर्यावरण प्रदूषण की समस्या एक ज्वलंत उदाहरण के रूप में सबके सामने है, जो मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। प्रदूषण को बढ़ावा देने वाली निर्माण कंपनियों व प्रतिष्ठानों के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व एनजीटी की ओर से सख्त हिदायतें जारी हैं। धूल, मिट्टी या डस्ट का उचित प्रबंधन भी उनमें से एक है। ऐसी कमियों पर अंकुश लगाने के लिए जिला स्तरीय मॉनिटरिंग टीम ज्यादा से ज्यादा इंस्पैक्शन करेगी। मीटिंग में नगराधीश विजया मलिक उपस्थित थी।

यह अधिकारी होंगे टीम में :

उपायुक्त ने बताया कि मॉनिटरिंग टीम में सीईओ जिला परिषद के अतिरिक्त प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यकारी अभियंता, सदस्य सचिव, जन स्वास्थ्य विभाग व नगरनिगम के कार्यकारी अभियंता को बतौर मेम्बर शामिल किया गया है। निरीक्षण को लेकर टीम हर महीने जो कार्यवाही करेगी उसकी समीक्षा भी की जाएगी।

निरीक्षण में क्या होगा :

उन्होंने बताया कि उपरोक्त टीम केवल कंस्ट्रक्शन गतिविधियों का निरीक्षण करेगी जिसमें डस्ट या धूल-मिट्टी का उचित प्रबंधन, मास्क के साथ लेबर, निर्माण सामग्री उचित तरीके से ढकी हो, उसकी लोडिंग-अनलोडिंग और निर्माण यूनिट से निकलने वाले दूषित पानी को उपचारित करने के लिए एसटीपी जैसे प्रावधान शामिल रहेंगे।

नियमों की अवहेलना पर यह है सजा :

उपायुक्त ने बताया कि नियमों की अवहेलना करने वाले व्यक्ति को पहले नोटिस दिया जाएगा, उचित जवाब न मिलने पर केस बनाया जाएगा, जिसकी सुनवाई कुरूक्षेत्र स्थित स्पैशल एन्वायरमेंट कोर्ट में होगी। दोषी पाए जाने पर 6 साल की कैद व 10 लाख रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

अंसल के दो प्रोजैक्ट पर की गई कार्यवाही :

 

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यकारी अभियंता शैलेन्द्र अरोड़ा ने मीटिंग में बताया कि अंसल के दो प्रोजैक्ट का मौके पर जाकर निरीक्षण किया गया था, जिसमें निर्माण को शुरू करने की अनुमति नहीं ली गई थी। मामला इस साल का है। संबंधित कंपनी को नोटिस दिया जा चुका है और अब उसके विरूद्ध केस तैयार किया जा रहा है जो स्पैशल एन्वायरमेंट कोर्ट में दाखिल किया जाएगा।

 

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