साइकिल पर मां से मिलने 800 किमी के सफर पर निकले मासूम, पुलिस ने पकड़ा

अंबाला से एक चौदह साल का किशोर अपने आठ वर्षीय ममेरे भाई के साथ फूलों से सजी साइकिल पर 23 जून की तपती दोपहरी में अनजान राहों पर निकल पड़ा। ना रास्ते का ज्ञान है और ना ही भूख प्यास की चिंता। सिर्फ याद है तो इतना कि मां से मिलना है।

इसी आस ने दोनों को इतनी हिम्मत दे दी कि वह आठ सौ किमी लंबी अनजान राहों पर साइकिल से ही निकल पड़े। जब दोनों करनाल पहुंचे तो सूर्य ने अलविदा कह दिया। राह में ही अंधेरा छा गया। भूख प्यास ने भी दोनों को व्याकुल कर दिया। ऐसे में दो युवकों की नजरें उन पर पड़ी तो वह भूखे प्यासे बच्चों की मनोस्थिति को समझ गए। उन्होंने पुलिस को इसकी खबर की। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची।

दोनों बच्चे अंबाला से साइकिल से राय बरेली के लिए निकले थे, जो करीब 800 किमी दूर है। दो युवकों की नजर पड़ी तो उन्होंने फोन पर सूचना दी। फोन से परिजनों के अंबाला व राय बरेली दोनों ही स्थानों पर परिजनों से बात हो गई है। दोनों के परिजन पहुंच रहे हैं। उनके आते ही दोनों बच्चों को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया जाएगा। अभिभावकों को ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे ऐसे अकेले न निकलें। क्योंकि यह दिल्ली चंडीगढ़ हाईवे है। अंधेरा है, कोई दुर्घटना भी हो सकती है।

ये है मामला

यूपी के राय बरेली का रहने वाला 14 वर्षीय सतनाम हरियाणा के अंबाला में अपनी बहन और बहनोई के घर रहता है। लेकिन अचानक उसके मन में अपने माता पिता से मिलने की इच्छा हुई। बहन बहनोई से कहा, अभी सामान्य तौर पर बसें व ट्रेने नहीं चल रही हैं, काफी दिन पहले टिकट बुक कराने होते हैं। कोई सीधी बस या ट्रेन नहीं होने के कारण बहन बहनोई भी उसे राय बरेली पहुंचाने की व्यवस्था नहीं कर सके। लेकिन सतनाम का मन अपने माता पिता से मिलने को मचलने लगा।

ऐसे में उसने अपनी बहन के आठ वर्षीय पुत्र कर्ण से बात की, उसकी साइकिल को फूलों से सजाया और फिर उसी साइकिल पर दोनों सवार होकर मंगलवार की सुबह अंबाला से राय बरेली के लिए निकल पड़े। नादान मन यह विचार नहीं कर सका कि 800 किमी का सफर साइकिल से तय करना आसान नहीं है, कई दिन लग सकते हैं, रास्ते में भूख प्यास भी लगेगी। लेकिन जेब में सिर्फ बीस रुपये लेकर अंबाला से निकल पड़े। करनाल आते-आते अंधेरा घिरने लगा, भूख प्यास से व्याकुल होने लगे तो साइकिल की रफ्तार भी धीमी पड़ने लगी।

गनीमत यह रही कि करनाल में दो युवकों की नजर उन पर पड़ी। बालकों की स्थिति को देखकर कुछ देर तो उनके साथ चले, आखिरकार दोनों को नीलकंठ स्टार ढाबे पर रोककर पूछा तो हैरत में पड़ गए। दोनों युवकों ने सेक्टर 4 पुलिस चौकी को फोन पर सूचना दी। ढाबा भी बंद हो रहा था, लेकिन बच्चों को भूखा देखकर ढाबा संचालक ने दोनों बच्चों को भोजन कराया। चौकी प्रभारी संदीप कुमार पुलिस बल के साथ पहुंचे। बच्चों से फोन नंबर लेकर उनके परिजनों से संपर्क किया।

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